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लेबर मार्केट पर AI इंपैक्ट स्टडी

  • 12 Mar 2026
  • 88 min read

प्रिलिम्स के लिये: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM), चैटजीपीटी, जनरेटिव एआई चैटबॉट, एमएसएमई, बौद्धिक संपदा, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020।              

मेन्स के लिये: AI इंपैक्ट पर एंथ्रोपिक लेबर मार्केट स्टडी के मुख्य परिणाम, AI से रोज़गार को खतरा, AI के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ रोज़गार को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक उपाय।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

चर्चा में क्यों?

एंथ्रोपिक द्वारा की गई हालिया लेबर मार्केट स्टडी रोज़गार पैटर्न पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालती है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि जहाँ लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) सैद्धांतिक रूप से कई पेशेवर कार्य कर सकते हैं, वहीं उनका वर्तमान वास्तविक दुनिया में उपयोग अभी भी सीमित है।

  • स्टडी ने "ऑब्ज़र्व्ड एक्सपोज़र" नामक एक नए मापदंड की शुरुआत की है। यह सैद्धांतिक AI क्षमता से आगे बढ़कर यह आकलन करता है कि पेशेवर परिवेश में AI पूर्व से ही प्रत्यक्ष रूप से क्या कार्य कर रहा है।

सारांश 

  • एंथ्रोपिक लेबर मार्केट स्टडी से पता चलता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) रोज़गार को तीव्रता से प्रभावित कर रही है, विशेष रूप से ज्ञान-गहन क्षेत्रों में।
  • हालाँकि AI की सैद्धांतिक क्षमता उच्च है, वास्तविक कार्यस्थल उपयोग सीमित बना हुआ है, लेकिन इसमें तेज़ी से वृद्धि हो रही है।
  • AI युग में रोज़गार की सुरक्षा के लिये कौशल पुनर्निर्माण (रीस्किलिंग), AI साक्षरता और नीतिगत उपायों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं।

AI इंपैक्ट पर एंथ्रोपिक लेबर मार्केट स्टडी के मुख्य निष्कर्ष क्या हैं?

  • सैद्धांतिक क्षमता और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर: क्लॉड जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल सैद्धांतिक रूप से कंप्यूटर और गणित पेशेवरों के 94% कार्य कर सकते हैं। हालाँकि व्यवहार में क्लॉड के वर्तमान संस्करणों का उपयोग केवल उन कार्यों के लगभग 33% के लिये किया जाता है।
  • हाई-एक्सपोज़र और संरक्षित क्षेत्रों की पहचान:
    • सर्वाधिक जोखिम वाली नौकरियाँ: कंप्यूटर प्रोग्रामर, कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव और वित्तीय विश्लेषकों को "मोस्ट एक्पोज़्ड" माना जाता है, जहाँ AI सैद्धांतिक रूप से व्यवसाय, वित्त, कंप्यूटर विज्ञान, इंजीनियरिंग, कानून और कार्यालय प्रशासन जैसे क्षेत्रों में अधिकांश कार्यों को कवर कर सकता है।
    • संरक्षित क्षेत्र: विनिर्माण, कृषि, सुरक्षा सेवाएँ और व्यक्तिगत देखभाल में सैद्धांतिक AI का उपयोग सीमित है, जिससे इन क्षेत्रों में नौकरियाँ तत्काल AI डिसरप्शन से अधिक सुरक्षित रहती हैं।
  • प्रवेश-स्तर की भर्ती में तीव्र गिरावट: वर्ष 2022 के अंत में चैटजीपीटी लॉन्च होने के बाद से 22 से 25 वर्ष के श्रमिकों के बीच उच्च-जोखिम वाले व्यवसायों में प्रवेश 14% कम हो गया है। कंपनियाँ स्नातक कार्यक्रमों, प्रवेश-स्तर विश्लेषक समूहों और जूनियर डेवलपर पाइपलाइनों को कम कर रही हैं, जिससे व्यापक स्तर पर छँटनी के बगैर भी नए कर्मचारियों के लिये "फ्रंट डोर" प्रभावी रूप से बंद हो रहा है।
  • AI जोखिम में जनसांख्यिकी असमानताएँ: सर्वाधिक AI-जोखिम वाले व्यवसायों में श्रमिक विशिष्ट जनसांख्यिकी विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं:
    • लैंगिक स्तर: सर्वाधिक जोखिम वाले समूह में 54.4% महिलाएँ हैं।
    • शिक्षा: स्नातक डिग्री वाले श्रमिकों के अप्रभावित समूह की तुलना में सर्वाधिक जोखिम वाले क्वार्टाइल में होने की संभावना लगभग 4 गुना अधिक है।
    • जाति: श्वेत कर्मचारी हाई-एक्सपोज़र ग्रुप का 65.1% हिस्सा बनाते हैं; एशियाई कर्मचारियों के सर्वाधिक जोखिम वाले समूह में होने की संभावना लगभग दोगुनी है।
    • आयु: हाई-एक्सपोज़र वाली लेबर की औसत आयु (42.9 वर्ष) अप्रभावित भूमिका वालों की तुलना में थोड़ी अधिक है।
  • भारत-विशिष्ट निहितार्थ: भारतीय IT सेवा क्षेत्र गंभीर जोखिमों का सामना कर रहा है, पिछले एक वर्ष में निफ्टी IT इंडेक्स और TCS, विप्रो और इंफोसिस जैसे दिग्गजों के शेयरों में 20% से अधिक की गिरावट आई है।
    • एंथ्रोपिक के वर्कप्लेस ऑटोमेशन टूल डेटा प्रोसेसिंग, अनुबंध विश्लेषण, अनुपालन निगरानी और कस्टमर सपोर्ट जैसी सेवाओं को स्वचालित करके सीधे भारतीय IT व्यवसाय मॉडल को चुनौती देते हैं।
    • भारत संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करता है, जिसमें गणितीय एवं वैज्ञानिक कौशल की कमी और अमेरिका तथा चीन की तुलना में कम अनुसंधान एवं विकास (R&D) संबंधी व्यय शामिल है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोज़गार के लिये कैसे खतरा उत्पन्न कर रहा है?

  • नियमित और दोहराव वाले कार्यों का स्वचालन: AI-संचालित सिस्टम, जिनमें रोबोट, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन और प्रोसेस ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर शामिल हैं, मनुष्यों की तुलना में अधिक स्पीड, सटीकता और स्थिरता के साथ मानकीकृत कार्यों को अंजाम देते हैं। यह असेंबली लाइनों, डेटा एंट्री और बुनियादी प्रसंस्करण भूमिकाओं में श्रमिकों को समाप्त करता है जहाँ कार्यों में जटिल निर्णय क्षमता का अभाव है। उदाहरण के लिये, ओला इलेक्ट्रिक ने AI टूल्स के साथ संचालन को सुव्यवस्थित करने के बाद 1,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया।
  • कस्टमर सर्विस में मनुष्यों का प्रतिस्थापन: जनरेटिव एआई चैटबॉट और वर्चुअल एजेंट स्वायत्त रूप से बड़ी संख्या में प्रश्नों, शिकायतों और ट्रांजेक्शन को सँभालते हैं, जिससे ह्यूमन कॉल-सेंटर स्टाफ की आवश्यकता कम या समाप्त हो जाती है। उदाहरण के लिये, लाइमचैट जैसे स्टार्टअप ग्राहकों को मासिक रूप से 10,000 प्रश्नों का जवाब देने के लिये आवश्यक श्रमिकों की संख्या में 80% की कटौती करने में सक्षम बनाते हैं।
  • वेश-स्तरीय तकनीकी कौशल की मांग में कमी: AI कोडिंग असिस्टेंट (जैसे– GitHub कोपायलट) और ऑटोमेटेड टेस्टिंग टूल जूनियर डेवलपर्स की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से सॉफ्टवेयर कोड प्रोड्यूस, डीबग को तैयार करते हैं, जिससे प्रवेश-स्तर और मध्य-स्तरीय प्रोग्रामिंग की मांग कम हो रही है। यह रोज़गार बाज़ार में एक "ऑवरग्लास इफेक्ट" उत्पन्न करता है, अर्थात वरिष्ठ विशेषज्ञों की उच्च मांग लेकिन मध्य-स्तर और प्रवेश-स्तर के पदों का कम होना। उदाहरण के लिये IT क्षेत्र में वर्ष 2024 में 50,000 से अधिक नौकरियों में कटौती हुई, जिसका मुख्य रूप से प्रवेश-स्तर के प्रोग्रामर प्रभावित हुए।
  • रचनात्मक कार्य का अवमूल्यन: क्रिएटिव फ्रीलांसर (ग्राफिक डिज़ाइनर, कंटेंट राइटर) जो लोगो या ब्लॉग पोस्ट बनाकर कमाते हैं, अब ग्राहकों को नगण्य लागत पर विकल्प उत्पन्न करने के लिये AI टूल (DALL-E, मिडजर्नी) का उपयोग करते हुए देखते हैं। मानव की भूमिका मूल कार्य को करने के बजाय AI आउटपुट को संपादित करने तक सीमित हो गई है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के विरुद्ध रोज़गार को अनुकूल बनाने के लिये किन उपायों की आवश्यकता है?

  • शिक्षा में क्रांति लाना: गणित और सामाजिक अध्ययन के साथ  डेटा, एल्गोरिद्म और नैतिकता की अवधारणाओं को एकीकृत करके स्कूलों में बुनियादी स्तर पर AI साक्षरता को शामिल करना।
  • राष्ट्रीय स्तर पर कौशल विकास कार्यक्रम बनाना: ‘भविष्य के कौशल’ नामक एक कर क्रेडिट को वित्त पोषित करना, जो व्यवसायों को AI से संबंधित क्षेत्रों, जैसे– त्वरित इंजीनियरिंग, डेटा एनोटेशन और रोबोटिक्स रखरखाव में कर्मचारियों के कौशल को बढ़ाने के लिये कर लाभ प्रदान करना।
  • कार्यस्थल पर ‘सहयोगी रोबोटिक्स’ (कोबोटिक्स) का उपयोग: कार्यस्थल में पूर्ण स्वचालन की बजाय सहयोगी रोबोटिक्स (कोबोटिक्स) को अपनाना चाहिये, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मानव कर्मचारियों को सहायता प्रदान करती है। उदाहरण के लिये, कॉल सेंटर एजेंटों को AI उपकरण प्रदान किये जा सकते हैं, जो भावनात्मक स्वर का विश्लेषण कर सकें और वास्तविक समय में समाधान सुझा सकें।
  • शिक्षुता अर्थव्यवस्था की रक्षा करना: IT क्षेत्र में ऐसे आनुवांशिक वातावरण स्थापित करना, जहाँ कनिष्ठ कर्मचारी उत्पादकता बढ़ाने के लिये AI का उपयोग करना, लेकिन नवाचार और मूल्यवर्द्धन के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाए, जिससे ‘कौशल में कमी के खतरे’ का मुकाबला किया जा सके।
  • MSME के लिये साइबर-अनुकूलता सुनिश्चित करना: रोज़गार के नुकसान का कारण बनने वाली बौद्धिक संपदा की चोरी को रोकने के लिये, हैदराबाद में फार्मा या सूरत में कपड़ा जैसे MSME समूहों को रियायती ‘AI फायरवॉल एज़ ए सर्विस’ प्रदान की जानी चाहिये।
  • पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को प्रभावी ढंग से लागू करके, यह गारंटी दी जानी चाहिये कि गिग वर्कर्स का सामाजिक सुरक्षा योगदान उनके सभी प्लेटफॉर्मों पर उनके साथ बना रहे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कारण प्रति-कार्य मज़दूरी का अवमूल्यन होने पर भी, वे पेंशन और स्वास्थ्य बीमा जैसे लाभ प्राप्त कर सकें।

निष्कर्ष:

एंथ्रोपिक (Anthropic) श्रम बाज़ार अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि किस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) रोज़गार के प्रारूप को पुनर्गठित कर रहे हैं, जो विशेष रूप से ज्ञान-आधारित और प्रवेश-स्तर की भूमिकाओं को प्रभावित कर रहे हैं। हालाँकि AI को अपनाना अभी भी आंशिक है, लेकिन इसके तीव्र विस्तार के कारण कौशल विकास, शिक्षा सुधार और AI-मानव सहयोग मॉडल में तत्काल निवेश की आवश्यकता है, ताकि रोज़गार सुगमता और समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. उन विभिन्न तंत्रों की चर्चा कीजिये जिनके माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोज़गार के लिये खतरा उत्पन्न करता है। प्रासंगिक भारत-विशिष्ट उदाहरणों के साथ अपने उत्तर की पुष्टि कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. कौन-से क्षेत्र AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं?
कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, वित्त, व्यवसाय प्रबंधन, कानूनी सेवाएँ, इंजीनियरिंग और कार्यालय प्रशासन जैसे क्षेत्र AI के प्रभाव के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, क्योंकि इनकी प्रकृति कार्य-आधारित और ज्ञान-गहन होती है।

2. एंट्री-लेवल नौकरियाँ AI के प्रति विशेष रूप से अधिक संवेदनशील क्यों हैं?
AI कोडिंग टूल्स, चैटबॉट्स और ऑटोमेशन सिस्टम नियमित तकनीकी कार्यों को कर सकते हैं, जिससे जूनियर डेवलपर्स, विश्लेषकों और ग्रेजुएट ट्रेनीज़ की आवश्यकता कम हो सकती है।

3. कुछ क्षेत्र AI के प्रभाव से अपेक्षाकृत कम प्रभावित क्यों होते हैं?
निर्माण, कृषि, सुरक्षा सेवाओं और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़ी नौकरियों में शारीरिक कार्य, परिस्थिति के अनुसार निर्णय और मानवीय संपर्क की आवश्यकता होती है, जिससे इन क्षेत्रों में AI द्वारा प्रतिस्थापन की संभावना सीमित रहती है।

4. AI नौकरी बाज़ार में “आवरग्लास इफेक्ट” कैसे उत्पन्न करता है?
AI ‘आवरग्लास प्रभाव’ पैदा करता है, क्योंकि यह वरिष्ठ विशेषज्ञों (ऊपरी स्तर) की मांग बढ़ाता है, जबकि मिड-लेवल और एंट्री-लेवल पदों को कम करता है (सँकरा मध्य भाग), जिससे पारंपरिक कॅरियर प्रगति को खतरा उत्पन्न होता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रिलिम्स

प्रश्न: विकास की वर्तमान स्थिति के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य प्रभावी ढंग से कर सकती है? (2020)

1. औद्योगिक इकाइयों में बिजली की खपत को कम करना

2. सार्थक लघु कथाओं और गीत की रचना

3. रोग निदान

4. टेक्स्ट-टू-स्पीच रूपांतरण

5. विद्युत ऊर्जा का वायरलेस संचरण

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1, 2, 3 और 5

(b) केवल 1, 3 और 4

(c) केवल 2, 4 और 5

(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: (b)


मेन्स

प्रश्न.  कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की अवधारणा का परिचय दीजिये। AI क्लिनिकल निदान में कैसे मदद करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में AI के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं? (2023)

प्रश्न. भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप औपचारिक क्षेत्र में रोज़गार कैसे कम हुए? क्या बढ़ती हुई अनौपचारिकता देश के विकास के लिये हानिकारक है? (2016)

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