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महामारी संधि मसौदे में AMR को संबोधित करना

  • 07 Jun 2023
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

विश्व स्वास्थ्य सभा, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR), "शून्य मसौदा", विश्व स्वास्थ्य संगठन, महामारी, वैक्सीन, कोविड-19 महामारी

मेन्स के लिये:

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) को संबोधित करना, स्वास्थ्य क्षेत्र हेतु जोखिम उत्पन्न करने वाली चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों?

महामारी संधि मसौदे को "शून्य मसौदा" के रूप में भी जाना जाता है, जिस पर वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य सभा में शामिल सदस्य देशों द्वारा चर्चा की जा रही है।

  • हालाँकि इस बात की चिंता बढ़ रही है कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance- AMR) को संबोधित करने वाले प्रावधानों को अंतिम रूप से हटाए जाने का खतरा है।
  • नागरिक समाज और अनुसंधान संगठनों ने AMR को संबोधित करने हेतु विश्लेषण एवं सिफारिशें प्रदान कीं।
  • जर्नल ऑफ मेडिसिन, लॉ एंड एथिक्स के एक विशेष संस्करण ने संधि में AMR को शामिल करने के महत्त्व पर ज़ोर दिया। 

महामारी संधि मसौदा:

  • परिचय: 
    • महामारी संधि मसौदा महामारी और वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों को रोकने, तैयारी एवं प्रतिक्रिया देने हेतु प्रस्तावित एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है।
    • इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization- WHO) और सदस्य देशों द्वारा बातचीत की जा रही है।
    • इस संधि का उद्देश्य स्वास्थ्य खतरों को दूर करने में वैश्विक सहयोग और एकजुटता को मज़बूत करना है।
    • इसमें निगरानी, पहचान, अधिसूचना, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों तक पहुँच, सहयोग और जवाबदेही जैसे पहलू शामिल हैं।
    • यह संधि मानवाधिकारों, समानता और एकजुटता के सिद्धांतों पर आधारित है, साथ ही यह प्रत्येक राज्य की स्वास्थ्य नीतियों को निर्धारित करने के संप्रभु अधिकार का सम्मान करती है।
    • यह वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम परिषद, वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम कोष एवं स्वतंत्र समीक्षा और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करता है।
    • महामारी संधि मसौदा कोविड-19 महामारी के प्रभावस्वरूप एक प्रतिक्रिया है।
  • मसौदे के प्रमुख घटक: 
    • वैश्विक सहयोग: 
      • यह महामारी और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों की तैयारी व प्रतिक्रिया में वैश्विक समन्वय तथा सहयोग बढ़ाने का आह्वान करता है।
      • स्वास्थ्य प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण:
      • यह सभी देशों में विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत करने की आवश्यकता पर बल देता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे महामारी एवं अन्य वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिये बेहतर तरीके से तैयार हैं।
    • अनुसंधान और विकास में निवेश:
      • यह महामारी और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान टीके, निदान तथा उपचार जैसी आवश्यक स्वास्थ्य तकनीकों तक बेहतर पहुँच का आह्वान करता है।
      • यह स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाने का आह्वान करता है, विशेष रूप से उन बीमारियों के लिये जो वैश्विक स्वास्थ्य के लिये गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
    • सूचना साझा करने में पारदर्शिता:
      • यह महामारी और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के बारे में अधिक पारदर्शिता एवं जानकारी साझा करने का आह्वान करता है, जिसमें बीमारियों के प्रसार तथा हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता पर डेटा शामिल है।
    • पैथोजन एक्सेस और बेनिफिट-शेयरिंग सिस्टम (PABS):
      • WHO के तहत PABS का गठन किया गया है, जिससे महामारी की क्षमता वाले सभी रोगजनकों के जीनोमिक अनुक्रम को सिस्टम में "समान स्तर" पर साझा किया जा सके।
        • PABS प्रणाली नई दवाओं और टीकों के अनुसंधान एवं विकास में रोगजनकों तथा उनके आनुवंशिक संसाधनों के ज़िम्मेदार और न्यायसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है, जबकि इन संसाधनों को प्रदान करने वाले देशों तथा समुदायों के अधिकारों और हितों की भी पहचान करता है।
    • लैंगिक असमानताओं को संबोधित करना:
      • हेल्थकेयर वर्कफोर्स में लैंगिक असमानताओं को संबोधित करने में मसौदे का उद्देश्य समान वेतन पर ज़ोर देकर और नेतृत्व की भूमिका निभाने में महिलाओं के लिये विशिष्ट बाधाओं को दूर करके "सभी श्रमिकों का स्वास्थ्य एवं देखभाल, सार्थक प्रतिनिधित्व, जुड़ाव, भागीदारी और सशक्तीकरण सुनिश्चित करना" है।

महामारी संधि में AMR का महत्त्व: 

  • AMR को शामिल करने का कारण: 
    • AMR वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा रोगाणुओं के कारण होने वाले संक्रमण इनके उपचार के लिये विकसित दवाओं के लिये प्रतिरोधी बन जाते हैं।
      • सूक्ष्मजीवों में बैक्टीरिया, कवक, वायरस और परजीवी शामिल हैं। 
      •  जीवाणु संक्रमण वैश्विक स्तर पर आठ मौतों में से एक का कारण बनता है।
    • सभी महामारियाँ वायरस के कारण नहीं होती हैं तथा पिछली महामारियाँ बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों के कारण हुई हैं।
    • AMR दवा-प्रतिरोधी तपेदिक, निमोनिया और दवा-प्रतिरोधी स्टैफ संक्रमण (स्टैफिलोकोकस (staphylococcus) नामक बैक्टीरिया के कारण) जैसे मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकस ऑरियस (methicillin-Resistant Staphylococcus Aureus- MRSA) सहित दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के उदय को बढ़ावा दे रहा है।
    • विषाणुजनित महामारी के दौरान द्वितीयक जीवाणु/फंगल संक्रमण एक गंभीर चिंता का विषय है जिसके लिये प्रभावी एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होती है।
      • नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोध से पता चलता है कि अस्पताल में भर्ती कोविड-19 रोगियों में से कई मौतें निमोनिया से जुड़ी थीं। इसका संबंध द्वितीयक जीवाणु संक्रमण से है जिसका एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज किया जाना चाहिये।
      • ब्लैक फंगस म्यूकोरेल्स फंगी (Mucorales fungi) के कारण होने वाला एक फंगल संक्रमण है जो मुख्य रूप से कोविड-19 या मधुमेह जैसी स्थितियों में कमज़ोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को प्रभावित करता है।  
  • AMR उपायों को अस्वीकार करने का प्रभाव:
    • AMR से संबंधित उपायों को हटाने से लोगों को भविष्य की महामारियों से बचाने के प्रयासों में बाधा आएगी।
    • AMR को हटाने के जोखिम में स्वच्छ पेयजल तक पहुँच, संक्रमण की रोकथाम, निगरानी और रोगाणुरोधी प्रबंधन शामिल हैं।
      • रोगाणुरोधी प्रबंधन यह मापने और सुधारने का प्रयास करता है कि कैसे एंटीबायोटिक दवाओं को चिकित्सकों द्वारा निर्धारित किया जाता है तथा रोगियों द्वारा उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य चिकित्सा परिणामों में सुधार करना और एंटीबायोटिक प्रतिरोध के विकास सहित एंटीबायोटिक उपयोग से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं को कम करना है।
    • संधि की शर्तों को कमज़ोर करने से देशों को निवारक कार्यवाहियों से बाहर निकलने (ऑप्ट-आउट) की अनुमति मिल सकती है।
  • महामारी संधि में AMR को संबोधित करने की तात्कालिकता:
    • प्रभाव को कम करने के लिये AMR को वैश्विक राजनीतिक कार्यवाही और सहयोग की आवश्यकता है।
    • महामारी के प्रति प्रतिक्रिया और तैयारियों के लिये रोगाणुरोधी संरक्षण महत्त्वपूर्ण है।
    • महामारी संधि भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों से बचाव करने वाले देशों और समुदायों के व्यापक उद्देश्यों को खतरे में डाल सकती है यदि इसमें AMR की समस्या का निपटान नहीं किया जाता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-से भारत में सूक्ष्मजैविक रोगजनकों में बहु-औषध प्रतिरोध के होने के कारण हैं? (2019)

  1. कुछ व्यक्तियों में आनुवंशिक पूर्ववृत्ति (जेनेटिक प्रीडिस्पोजीशन)
  2. रोगों के उपचार के लिये  प्रतिजैविकों (एंटीबायोटिक) की गलत खुराक लेना
  3. पशुधन फार्मिंग में प्रतिजैविकों का इस्तेमाल
  4. कुछ व्यक्तियों में चिरकालिक रोगों की बहुलता होना

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4 

उत्तर: (b) 

मेन्स:

प्रश्न. वैक्सीन विकास का आधारभूत सिद्धांत क्या है? वैक्सीन कैसे कार्य करती हैं? कोविड-19 टीकों के निर्माण हेतु वैक्सीन निर्माताओं ने क्या-क्या पद्धतियाँ अपनाई हैं?

स्रोत: द हिंदू

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