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विश्व स्वास्थ्य सभा का 75वां सत्र

  • 25 May 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व स्वास्थ्य सभा, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता (आशा)।

मेन्स के लिये:

विश्व स्वास्थ्य सभा, विश्व स्वास्थ्य संगठन के कामकाज़ में भारत की भागीदारी।

चर्चा में क्यों?

विश्व स्वास्थ्य सभा का 75वाँ सत्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुख्यालय जिनेवा में 22 से 28 मई, 2022 तक आयोजित किया जा रहा है।

  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने एक अधिक लचीले वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा ढाँचा के निर्माण की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया।
  • विश्व स्वास्थ्य सभा, 2022 का विषय ‘शांति के लिये स्वास्थ्य, स्वास्थ्य के लिये शांति’ है।
  • भारत के मान्यता प्राप्त ‘सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं (आशा)’ को 75वें विश्व स्वास्थ्य सभा में ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया, ताकि "वैश्विक स्वास्थ्य को आगे बढ़ाने, नेतृत्व करने और क्षेत्रीय स्वास्थ्य के मुद्दों के प्रति प्रतिबद्धता" के लिये उनके उत्कृष्ट योगदान को मान्यता दी जा सके।

विश्व स्वास्थ्य सभा:

  • परिचय:
    • विश्व स्वास्थ्य सभा सदस्य राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों से बनी है।
    • प्रत्येक राष्ट्र का प्रतिनिधित्व अधिकतम तीन प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है जिनमें से किसी एक को मुख्य प्रतिनिधि के रूप में नामित किया जाता है।
    • इन प्रतिनिधियों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी तकनीकी क्षमता के आधार पर सबसे योग्य व्यक्तियों में से चुना जाता है क्योंकि ये सदस्य राष्ट्र के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रशासन का अधिमान्य प्रतिनिधित्व करते हैं।
    • विश्व स्वास्थ्य सभा की बैठक नियमित रूप से वार्षिक सत्र और कभी-कभी विशेष सत्रों में भी आयोजित की जाती है।
  • विश्व स्वास्थ्य सभा के कार्य:
    • विश्व स्वास्थ्य सभा WHO की नीतियों का निर्धारण करती है।
    • यह संगठन की वित्तीय नीतियों की निगरानी करती है एवं बजट की समीक्षा तथा अनुमोदन करती है।
    • यह WHO तथा संयुक्त राष्ट्र के मध्य होने वाले किसी भी समझौते के संदर्भ में आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council) को रिपोर्ट करती है।
  • 75वें सत्र में केंद्रीय मंत्रियों के संबोधन की मुख्य विशेषताएंँ:
    • अधिक लचीले वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा संरचना के लिये टीकों और चिकित्सा विधान हेतु WHO की अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता है।बौद्धिक संपदा पहलुओं सहित टीकों व दवाओं तक समान पहुँच की अनुमति दी जानी चाहिये।
    • लागत प्रभावी अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षेत्रीय विनिर्माण क्षमता प्राथमिकता सूची में होनी चाहिये।
    • WHO के अनुसार, भारत में कोविड के कारण 4.7 मिलियन मौतें (आधिकारिक आँकड़े का 10 गुना) दर्ज की गई हैं। इसलिये WHO के हालिया अभ्यास पर चिंता व्यक्त की गई, जिसमें कोविड-19 से सभी कारणों से अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई है।
    • भारत ने WHO से भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) द्वारा नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के माध्यम से प्रकाशित देश-विशिष्ट प्रामाणिक डेटा पर विचार करने का आग्रह किया।
    • डेटा भविष्यवाणी के गणितीय मॉडल के उपयोग पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिये। नतीजतन, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत स्थापित) ने इस संबंध में WHO के दृष्टिकोण की निंदा करते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया।

मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता (ASHA):

  • परिचय:
    • ‘आशा’ राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NHRM) के प्रमुख घटकों में से एक है।
    • ये 25-45 वर्ष के आयु वर्ग में एक सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता होती हैं, जो महिलाओं और बच्चों सहित ग्रामीण आबादी के वंचित वर्गों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये संपर्क के पहले बिंदु के रूप में कार्य करती हैं।
    • आमतौर पर प्रति 1000 जनसंख्या पर एक आशा होती है। हालाँकि जनजातीय, पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में काम के बोझ के आधार पर इस मानदंड को "एक आशा प्रति बस्ती" तक कम किया जा सकता है।
  • ज़िम्मेदारियांँ और भूमिका:
    • लोगों को पोषण, बुनियादी स्वच्छता और स्वच्छ प्रथाओं, स्वस्थ रहने तथा काम करने की स्थिति आदि के बारे में ज़ानकारी प्रदान करके स्वास्थ्य निर्धारकों के बारे में जागरूकता पैदा करना।
      • वह मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में भी जानकारी प्रदान करती है और लोगों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवाओं के समय पर उपयोग के लिये प्रोत्साहित करती है।
    • जन्म की तैयारी, सुरक्षित प्रसव के महत्त्व, स्तनपान, गर्भनिरोधक, टीकाकरण, बच्चे की देखभाल और प्रजनन पथ के संक्रमण/यौन संचारित संक्रमण (आरटीआई / एसटीआई) की रोकथाम पर महिलाओं को परामर्श देना।
    • समुदाय को एकत्रित करके गांँव/उप-केंद्र/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसवपूर्व जांँच (एएनसी), प्रसवोत्तर जांँच (पीएनसी), टीकाकरण, स्वच्छता और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंँच को सुगम बनाना।
    • ग्राम पंचायत की ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति के सहयोग से कार्य कर व्यापक स्वास्थ्य योजना का विकास करना।
    • संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बुखार, दस्त और मामूली चोटों जैसे मामूली विकारों के लिये प्राथमिक चिकित्सा देखभाल प्रदान करना।
    • गर्भवती महिलाओं और उन बच्चों के लिये अनुरक्षण की व्यवस्था करना जिन्हें उपचार की आवश्यकता है या जिन्हें निकटतम स्वास्थ्य देखभाल सुविधा हेतु भर्ती करने की आवश्यकता है।
    • उप-केंद्रों/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अपने गांँव में जन्म और मृत्यु तथा समुदाय में किसी भी बीमारी के प्रकोप/असामान्य स्वास्थ्य चिंताओं के बारे में सूचित करना।

स्रोत: द हिंदू

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