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जैवविविधता और पर्यावरण

तीव्र श्वसन संक्रमण (ARI)

  • 06 Nov 2019
  • 3 min read

प्रीलिम्स के लिये

Acute Respiratory Infection-ARI क्या है?

मेन्स के लिये

वायु प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्ट-2019 में फेफड़े के संक्रमण संबंधी बीमारियों के बढ़ते प्रभावों पर चिंता जाहिर की गई है।

मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में केवल तीव्र श्वसन संक्रमण (Acute Respiratory Infection-ARI), कुल संक्रामक बीमारियों का लगभग 69 प्रतिशत था तथा ARI से संक्रमित 27 प्रतिशत लोग मौत के शिकार हुए।
  • ARI के सर्वाधिक मामले आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल में दर्ज किये गए।
  • WHO के अनुसार, ARI एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसकी वजह से पूरे विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 26 लाख मौतें होती हैं।

ARI क्या है?

  • ARI एक गंभीर संक्रमण है जो सामान्य श्वास क्रिया को रोक देता है। यह आमतौर पर नाक, श्वासनली (Trachea) या फेफड़ों में वायरल संक्रमण के रूप में शुरू होता है तथा एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है।

वायु प्रदूषण: ARI का प्रमुख कारक

  • हवा में बढ़ता प्रदूषण गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशुओं के लिये नुकसानदायक होता है। भ्रूण को ऑक्सीजन की प्राप्ति माँ से होती है, यदि माँ प्रदूषित हवा में साँस लेती है तो यह भ्रूण के स्वास्थ्य को खतरा पहुँचा सकता है।
  • भ्रूण में जन्म से पहले प्रदूषकों की उपस्थिति के कारण समय से पूर्व प्रसव, जन्म के समय कम वज़न तथा बच्चे के विकास में बाधा पहुँचती है।
  • छोटी उम्र के बच्चों में यह समस्या अधिक होती है क्योंकि अधिकांश बच्चे मुँह से साँस लेते हैं जिसकी वजह से नाक की नली द्वारा होने वाला निस्पंदन (Filteration) नहीं हो पाता है तथा हवा में मौजूद प्रदूषक फेफड़ों में गहराई तक समाहित हो जाते हैं।
  • भारतीयों में यह समस्या बढ़ाने में वायु प्रदूषण दोहरी भूमिका निभाता है। प्रदूषित हवा में साँस लेने से वायु में उपस्थित सूक्ष्म कण व अन्य प्रदूषक फेफड़े व श्वासनलियों को छिद्रित तथा संक्रमित करते हैं। यह कई बीमारियों को जन्म देता है। जैसे- वायुस्फिती (Emphysema), अस्थमा, श्वासनली का संक्रमण, ह्रदय रोग, खाँसी, गले में जलन या साँस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

स्रोत : द हिंदू

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