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जैव विविधता और पर्यावरण

ग्रेट निकोबार द्वीप के लिये नीति आयोग की परियोजना

  • 11 May 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में एक पर्यावरण मूल्यांकन समिति, जिसने ग्रेट निकोबार द्वीप से संबंधित परियोजना पर चिंता व्यक्त की थी, ने अब पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) अध्ययनों के लिये इस परियोजना को 'संदर्भ की शर्तों के अनुदान' हेतु अनुशंसित किया है।

  • अगस्त, 2020 में प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को ‘मेरीटाइम एंड स्टार्टअप हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु:

परियोजना के बारे में:

  • इस प्रस्ताव में एक अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांस-शिपमेंट टर्मिनल, एक ग्रीनफील्ड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक बिजली संयंत्र और 166 वर्ग किलोमीटर में फैला एक टाउनशिप कॉम्प्लेक्स का निर्माण शामिल है। यह निर्माण मुख्य रूप से प्राचीन तटीय प्रणाली और उष्णकटिबंधीय वनों की भूमि पर किया जाएगा।
  • इस पर होने वाला अनुमानित व्यय 75,000 करोड़ रुपए है।

परियोजना से संबंधित मुद्दे:

  • भूकंपीय और सूनामी खतरों, मीठे पानी की आवश्यकता और विशालकाय लेदरबैक कछुओं पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित विवरण का अभाव।
  • वनोन्मूलन से संबंधित विवरण का अभाव- इस परियोजना में 130 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में लाखों की संख्या में पेड़ों को काटा जा सकता है। इस क्षेत्र में भारत के कुछ बेहतरीन उष्णकटिबंधीय वन मौज़ूद हैं।
  • इसके अतिरिक्त इसमें कई अन्य मुद्दे जैसे गैलाथिया खाड़ी, बंदरगाह निर्माण का स्थान और नीति आयोग के प्रस्ताव के केंद्र बिंदु आदि भी शामिल हैं।
    • गैलाथिया की खाड़ी, दुनिया के सबसे बड़े समुद्री कछुए ‘एंजीमेटिक जिआंट टर्टल’ का ‘नेस्टिंग’ स्थल है, यह दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री कछुआ है जो तीन दशकों में किये गए सर्वेक्षणों के माध्यम से खोजा गया है।
    • पिछले कुछ वर्षों में पारिस्थितिक सर्वेक्षणों ने ऐसी कई नई प्रजातियों की सूचना दी है, जो केवल गैलाथिया क्षेत्र तक सीमित हैं।
    • इनमें गंभीर रूप से लुप्तप्राय निकोबार छछूँदर (Nicobar Shrew), ग्रेट निकोबार क्रेक, निकोबार मेंढक, निकोबार कैट स्नेक (Nicobar Cat Snake), एक नया स्किंक (Lipinia Sp), एक नई छिपकली (Dibamus Sp) और लाइकोडोन एसपी (Lycodon Sp) का एक साँप शामिल है।
  • बंदरगाह हेतु साइट का चयन मुख्य रूप से तकनीकी और वित्तीय मानदंडों के आधार पर किया गया है, इसमें पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी की गई।

समिति द्वारा सूचीबद्ध एक्शन प्लान:

  • तेल रिसाव सहित ड्रेजिंग, पुनर्ग्रहण और बंदरगाह संचालन के प्रभाव पर अध्ययन के साथ-साथ स्थलीय और समुद्री जैव विविधता के स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता है।
  • पर्यावरण और पारिस्थितिकी प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करने के लिये बंदरगाह हेतु वैकल्पिक साइटों के अध्ययन की आवश्यकता के साथ विशेष रूप से लेदरबैक कछुओं पर आने वाले जोखिम से निपटने की क्षमताओं के विश्लेषण की भी आवश्यकता है।
  • भूवैज्ञानिक अध्ययन और सतही जल पर परियोजना के प्रभाव का आकलन करने के लिये एक भूकंपीय और सूनामी खतरा मानचित्र, एक आपदा प्रबंधन योजना, श्रम का विवरण, श्रम शिविरों और इसके संचयी प्रभाव के आकलन की आवश्यकता है।

Andaman-Nicobar-Islands

ग्रेट निकोबार:

  • ग्रेट निकोबार ‘निकोबार द्वीप समूह’ का सबसे दक्षिणी द्वीप है।
  • इसमें 1,03,870 हेक्टेयर के अद्वितीय और संकटग्रस्त उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं।
  • यह एक बहुत ही समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें एंजियोस्पर्म, फर्न, जिम्नोस्पर्म, ब्रायोफाइट्स की 650 प्रजातियाँ शामिल हैं।
  • जीवों के संदर्भ में बात करें तो यहाँ 1800 से अधिक प्रजातियाँ हैं, जिनमें से कुछ इस क्षेत्र की स्थानिक प्रजातियाँ भी हैं।

पारिस्थितिकी विशेषताएँ:

  • ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिज़र्व, उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वनों, पर्वत शृंखलाओं और समुद्र तल से 642 मीटर (माउंट थ्यूलियर) की ऊँचाई वाले पारिस्थितिक तंत्रों की एक विस्तृत शृंखला है।

जनजाति:

  • मंगोलोइड शोम्पेन जनजाति, जिसमें लगभग 200 सदस्य हैं, विशेष रूप से नदियों और नदी धाराओं के किनारे जैवमंडल रिज़र्व के वनों में पाई जाती है।
    • वे शिकार और भोजन के लिये तथा अपनी जीविका हेतु वन और समुद्री संसाधनों पर निर्भर हैं।
  • एक अन्य मंगोलोइड जनजाति, निकोबारी में लगभग 300 सदस्य थे और ये पश्चिमी तट के किनारे बस्तियों में निवास करती थी।
    • वर्ष 2004 में आई सुनामी, जिसने पश्चिमी तट पर बनी बस्ती को तबाह कर दिया, के बाद उन्हें उत्तरी तट और कैम्पबेल बे में अफरा खाड़ी में स्थानांतरित कर दिया गया।

स्रोत- द हिंदू

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