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शुक्र ग्रह

  • 10 May 2021
  • 5 min read

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में वैज्ञानिकों ने रेडियो तरंगों (Radio Waves) की सहायता से शुक्र ग्रह से संबंधित नया डेटा प्राप्त किया है।

  • वैज्ञानिकों द्वारा वर्ष 2006 से वर्ष 2020 के मध्य कुल 21 बार रेडियो तरंगों को शुक्र ग्रह पर भेजा गया। कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान (Mojave Desert ) में स्थित नासा के गोल्डस्टोन एंटीना (NASA's Goldstone Antenna) से भेजी गईं तरंगों से उत्पन्न ध्वनि का अध्ययन कर शुक्र के बारे में कई नई जानकारियांँ प्राप्त की गई हैं।

प्रमुख बिंदु: 

खोज से प्राप्त परिणाम: 

  • शुक्र का एक घूर्णन पृथ्वी के 243.0226 दिनों के बराबर है। इसका अर्थ है कि शुक्र का एक दिन पृथ्वी के एक वर्ष से अधिक का होता है, जो कि सूर्य के चारों ओर 225 दिनों में अपना एक चक्कर पूरा करता है।
  • शुक्र ग्रह के कोर का व्यास लगभग 7,000 किलोमीटर है, जो कि पृथ्वी के कोर के व्यास (6,970) की तुलना में अधिक है।
  • अपने अक्ष पर शुक्र का झुकाव 2.64 डिग्री है, जबकि पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री पर झुकी हुई है।

पूर्व में की गई खोज के परिणाम: 

  • पूर्व में शुक्र के वातावरण में फॉस्फीन (Phosphine) की उपस्थिति का पता लगाया गया था। जो  शुक्र ग्रह पर जीवन की उपस्थिति की संभावना को इंगित करता है।
  • ‘नेचर जियोसाइंस’ (Nature Geoscience) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, शुक्र अभी भी भौगोलिक रूप से सक्रिय (Geologically Active) है।
    • अध्ययन ने शुक्र की सतह पर रिंग के आकार की संरचना (Ring-Like Structures) के रूप में 37 सक्रिय ज्वालामुखियों की पहचान की, जिन्हें कोरोने (Coronae) नाम दिया गया।

शुक्र ग्रह के बारे में: 

  • सूर्य से दूरी के हिसाब से यह दूसरा ग्रह है। संरचनात्मक रूप से पृथ्वी से कुछ समानता रखने के कारण इसे पृथ्वी का जुड़वाँ ग्रह (Earth’s Twin) भी कहा जाता है। 
  • शुक्र ग्रह पर वातावरण काफी सघन और विषाक्त है, जिसमें मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड गैस और सल्फ्यूरिक एसिड के बादल विद्यमान हैं।
  • तेज़ी से बढ़ते ग्रीनहाउस प्रभाव/रनवे ग्रीन हाउस इफेक्ट (Runaway Greenhouse’ Effec) के साथ, इसकी सतह का तापमान 471 डिग्री सेल्सियस तक पहुंँच गया है, जो इसकी सतह को गर्म करके पिघलने के लिये काफी है।
    • रनवे ग्रीन हाउस इफेक्ट तब  उत्पन्न होता है, जब कोई ग्रह सूर्य से अधिक ऊर्जा अवशोषित कर उसे अंतरिक्ष में वापस उत्सर्जित करता है। इन परिस्थितियों में, सतह का तापमान जितनी तीव्र गति से बढ़ेगा है, सतह उतनी ही तेज़ी से गर्म होती है।
  • शुक्र सिर्फ दो ग्रहों में से एक है जो पूर्व से पश्चिम की ओर घूमते हैं। केवल शुक्र और यूरेनस ही इस प्रकार रोटेशन करते है। 
  • शुक्र के पास अपना कोई चंद्रमा और वलय नहीं है।
  • शुक्र पर,  दिन-रात का एक चक्र पृथ्वी के 117  दिन के बराबर होता हैं क्योंकि शुक्र, सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षीय घूर्णन के विपरीत दिशा में घूमता है।

शुक्र ग्रह से संबंधित मिशन:

  • इसरो शुक्रयान: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन  (Indian Space Research Organisation- ISRO) भी शुक्र ग्रह से संबंधित एक मिशन की योजना बना रहा है, जिसे फिलहाल ‘शुक्रयान मिशन’ कहा गया है।
  • अकात्सुकी (वर्ष 2015- जापान)
  • वीनस एक्सप्रेस (वर्ष 2005- यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी)
  • नासा का मैजलन (वर्ष 1989)

स्रोत: द हिंदू

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