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साइबर धोखाधड़ी के लिये हेल्पलाइन

  • 19 Jun 2021
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये

साइबर धोखाधड़ी के लिये हेल्पलाइन, साइबर सुरक्षा, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र

मेन्स के लिये

साइबर धोखाधड़ी और उससे होने वाले नुकसान को रोकने हेतु उठाए गए कदम

चर्चा में क्यों?

गृह मंत्रालय ने साइबर धोखाधड़ी के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने के लिये राष्ट्रीय हेल्पलाइन 155260 और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म का संचालन शुरू किया है। इस हेल्पलाइन को 1 अप्रैल को लॉन्च किया गया था।

  • राष्ट्रीय हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म साइबर धोखाधड़ी में ठगे गए व्यक्तियों को ऐसे मामलों की रिपोर्ट करने के लिये एक तंत्र प्रदान करता है ताकि उनकी गाढ़ी कमाई को नुकसान से बचाया जा सके।
  • साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक के कार्यालय द्वारा एक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति 2020 तैयार की जा रही है।

साइबर सुरक्षा

  • साइबर सुरक्षा का आशय किसी भी प्रकार के हमले, क्षति, दुरुपयोग और जासूसी से महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना सहित संपूर्ण साइबर स्पेस की रक्षा करने से है।
  • महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (CII): सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 70(1) के अनुसार, CII को एक "कंप्यूटर संसाधन के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसकी अक्षमता या विनाश, राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य या सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डालेगा"।
  • साइबर धोखाधड़ी: यह किसी अन्य व्यक्ति की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी को ऑनलाइन संग्रहीत करने के इरादे से कंप्यूटर के माध्यम से किया गया अपराध है।
    • यह धोखाधड़ी का सबसे आम प्रकार है और व्यक्तियों तथा संगठनों को सतर्क रहने एवं धोखेबाजों से अपनी जानकारी की रक्षा करने की आवश्यकता होती है।

प्रमुख बिंदु

  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक, सभी प्रमुख बैंकों, भुगतान बैंकों, वॉलेट और ऑनलाइन व्यापारियों के समन्वय से इस हेल्पलाइन को शुरु किया गया है।
  • नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली I4C के कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा बैंकों व वित्तीय मध्यस्थों को एकीकृत करने के लिये विकसित की गई है।
  • ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी साझा करने और वास्तविक समय में कार्रवाई करने के लिये आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाकर यह सुविधा बैंकों तथा पुलिस दोनों को सशक्त बनाती है।
  • अपने सॉफ्ट लॉन्च के बाद से दो महीने की छोटी अवधि में इस हेल्पलाइन ने 1.85 करोड़ रुपए से अधिक की बचत करने में मदद की है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C):

  • I4C की स्थापना योजना को सभी प्रकार के साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने के लिये अक्तूबर 2018 में मंज़ूरी दी गई थी।
  • इसके सात घटक हैं:
    • नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट,
    • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल,
    • राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रशिक्षण केंद्र,
    • साइबर अपराध पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन इकाई,
    • राष्ट्रीय साइबर अपराध अनुसंधान और नवाचार केंद्र,
    • राष्ट्रीय साइबर अपराध फोरेंसिक प्रयोगशाला पारिस्थितिकी तंत्र,
    • संयुक्त साइबर अपराध जाँच दल प्लेटफॉर्म।
  • 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने क्षेत्रीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र स्थापित करने के लिये अपनी सहमति व्यक्त की है।
  • यह अत्याधुनिक केंद्र दिल्ली में स्थित है।   
  • बुडापेस्ट कन्वेंशन को कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से ज़ेनोफोबिया और जातिवाद पर एक प्रोटोकॉल द्वारा समर्थन प्रदान किया गया है।
  • भारत इसका पक्षकार नहीं है। भारत ने हाल ही में एक अलग सम्मेलन स्थापित करने के लिये रूस के नेतृत्त्व वाले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। प्रस्ताव में अमेरिका समर्थित बुडापेस्ट समझौते के काउंटर विकल्प के रूप में माने जाने वाले नए साइबर मानदंड स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

स्रोत: द हिंदू

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