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राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल

  • 02 Nov 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल

मेन्स के लिये:

‘राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय (The Ministry of Home Affairs- MHA) ने सभी राज्यों को ‘राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ (National Cybercrime Reporting Portal)- www.cybercrime.gov.in पर प्राप्त शिकायतों की जाँच करने के बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के रूप में उनका पंजीकरण करने के लिये कहा है।

प्रमुख बिंदु:

  • मंत्रालय के पास उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, ‘राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ पर पंजीकृत कुल शिकायतों में से केवल 2.5% को ही एफआईआर के रूप में बदला जाता है।
  • MHA के इस निर्देश का उद्देश्य ‘राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ के माध्यम से इंटरनेट पर "गैर-कानूनी सामग्री" के निषेध के लिये ‘साइबर क्राइम वॉलंटियर्स’ (Cybercrime Volunteers) के समूह को प्रोत्साहित करना है।
  • वेबसाइट के अनुसार, अवैध/गैर-कानूनी ऑनलाइन सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग और उसे हटाने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सुविधा के लिये गैर-कानूनी सामग्री को चिह्नित करने हेतु ‘साइबर क्राइम वॉलंटियर्स’ के रूप में पंजीकरण के लिये अच्छे नागरिकों का स्वागत किया जाएगा।
  • गैर-कानूनी सामग्री को ऐसी सामग्री के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्यों की सुरक्षा तथा विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के विरुद्ध कार्य करती है तथा यह सांप्रदायिक स्वभाव को बिगाड़ने, सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी, बाल उत्पीड़न से संबंधित होती है।
  • ‘साइबर क्राइम वॉलंटियर्स’ के रूप में सूचीबद्ध होने के लिये इच्छुक नागरिक को अपना फोटोग्राफ, नाम और पते का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।

पंजीकृत शिकायतों का एफआईआर के रूप में पंजीकृत न होना:

  • वर्ष 2019 में ‘राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ की शुरुआत के बाद से इस पर 2 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं, लेकिन एफआईआर केवल 5,000 मामलों की दर्ज की गई है।
  • एफआईआर में शिकायतों के रूपांतरण की दर बहुत कम है। उदाहरणस्वरूप जुलाई में 30,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं परंतु इनमें से केवल 273 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई।
  • वर्ष 2020 में जनवरी-सितंबर तक बाल पोर्नोग्राफी, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की कुल संख्या 13,244 थी।
  • 4 फरवरी, 2020 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री द्वारा राज्यसभा में दी गई सूचना के अनुसार, 30 अगस्त, 2019 से 30 जनवरी, 2020 तक पोर्टल पर 33,152 साइबर क्राइम की घटनाएँ दर्ज की गईं, जहाँ संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा 790 एफआईआर दर्ज की गई थीं। 

साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या:

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau-NCRB) द्वारा संकलित आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में पिछले वर्ष की तुलना में पंजीकृत साइबर अपराधों की संख्या में 63.5% की वृद्धि हुई है।
  • वर्ष 2019 में वर्ष 2018 के 27,248 मामलों की तुलना में साइबर अपराध के तहत कुल 44,546 मामले दर्ज किये गए।
  • वर्ष 2019 में साइबर अपराध के 60.4% मामले (44,546 मामलों में से 26,891) धोखाधड़ी से संबंधित, 5.1% (2,266 मामले) यौन शोषण और 4.2% (1,874 मामले) विवादों से संबंधित दर्ज किये गए।
  • इस पोर्टल के माध्यम से केवल दिल्ली में वित्तीय साइबर अपराध के शिकार लोगों के लिये एक हेल्पलाइन शुरू की गई है, जो 155260 नंबर पर या www.cybercrime.gov.in पर घटना की रिपोर्ट कर सकते हैं।
  • गृह मंत्रालय के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने पर नामित पुलिस अधिकारी इस मामले की पुष्टि करने के बाद संबंधित बैंक और वित्तीय मध्यस्थ या भुगतान वॉलेट इत्यादि को साइबर धोखाधड़ी में शामिल धन को अवरुद्ध करने के लिये रिपोर्ट करेगा।
  • इस सुविधा के उपयोग से वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोगों को अपना धन प्राप्त करने में और पुलिस को साइबर अपराधी की पहचान करने में मदद मिलेगी तथा उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकेगी।

‘राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’

(National Cybercrime Reporting Portal):

  • ‘राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ को 30 अगस्त, 2019 को लोगों को एक केंद्रीकृत मंच पर सभी प्रकार के साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने में मदद के लिये लॉन्च किया गया था।
  • सर्वोच्च न्यायलय के निर्देश पर सितंबर, 2018 में शुरू किये गए पोर्टल का एक पूर्व संस्करण, केवल बाल पोर्नोग्राफी, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न से संबंधित अपराधों की शिकायत के लिये प्रारंभ किया गया था।

स्रोत- द हिंदू

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