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ध्यान दें:

प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 31 Mar, 2021
  • 10 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रिलिम्स फैक्ट्स : 31 मार्च, 2021

केप ऑफ गुड होप

Cape of Good Hope

चर्चा में क्यों?

हाल ही में स्वेज़ नहर (Suez Canal) में रुकावट के कारण केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) के माध्यम से जहाज़ों के पुनः संचालन के लिये मार्ग का विकल्प खोजा गया।

प्रमुख बिंदु:

  • केप ऑफ गुड होप के बारे में: 
    • केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के केप प्रायद्वीप (Cape Peninsula) पर अटलांटिक के तट पर एक चट्टानी हेडलैंड (Headland) है।
      • हेडलैंड अर्थात् रास, प्रायद्वीप का एक प्रकार है। यह सागर में भूमि का एक उभरा हुआ भाग होता है जो तीन ओर से पानी से घिरा होता है।
    • केप ऑफ गुड होप मार्ग पूर्वी एशिया और यूरोप को अफ्रीका के दक्षिणी भागों से जोड़ता है।
    • वर्ष 1869 में स्वेज़ नहर का संचालन शुरू होने से भूमध्य सागर से हिंद महासागर की दूरी काफी कम हो गई, जिसके चलते अफ्रीका के आस-पास से होकर जाने वाले लंबे मार्ग का उपयोग कम हो गया।
      • केप ऑफ गुड होप मार्ग, स्वेज़ नहर मार्ग से 8900 किमी. लंबा है जिसे पूरा करने में अतिरिक्त दो सप्ताह का समय लगता है।
    • एक गलत अवधारणा यह है कि केप ऑफ गुड होप अफ्रीका का दक्षिणी छोर है।
      • समकालीन भौगोलिक जानकारी के अनुसार, अफ्रीका का सबसे दक्षिणी बिंदु केप अगुलहास है जो पूर्व और दक्षिण-पूर्व में लगभग 150 किमी. दूर स्थित है।
      • अगुलहास की गर्म जलधारा (हिंद महासागर) बेंगुला की ठंडी जलधारा (अटलांटिक महासागर) से  केप-अगुलहास और केप प्वाइंट (केप ऑफ गुड होप से लगभग 1.2 किमी. पूर्व) के मध्य मिलती है।
  • इतिहास:
    • पुर्तगाली खोजकर्त्ता बार्टोलोमू डायस द्वारा वर्ष 1488 में केप को मूल रूप से   केप ऑफ स्टॉर्म नाम दिया गया था।
    • बाद में केप सी रूट (Cape Sea Route) जो कि अफ्रीका के दक्षिणी तट से गुज़रता है, अधिक लोगों द्वारा पार करने के कारण इसे केप गुड होप नाम दिया गया।
    • अंततः यूरोप से एशिया की यात्रा करने वाले नाविकों के लिये केप एक महत्त्वपूर्ण  बंदरगाह मार्ग बन गया।

Suez-Canel


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 31 मार्च, 2021

राजस्थान दिवस

30 मार्च, 2021 को राष्ट्रपति ने राजस्थान के स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य के लोगों को बधाई दी। राजस्थान दिवस का आयोजन राज्य के गठन के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को किया जाता है। राजस्थान, आधिकारिक तौर पर 30 मार्च, 1949 को तब अस्तित्व में आया, जब इस राजपूताना क्षेत्र को भारत में शामिल किया गया था। ज्ञात हो कि क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है।  सातवीं शताब्दी में यहाँ चौहान राजपूतों का प्रभुत्व बढ़ने लगा और बारहवीं शताब्दी तक उन्होंने एक साम्राज्य स्थापित कर लिया था। वर्ष 1857 के विद्रोह के बाद लोग स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिये महात्मा गांधी के नेतृत्व में एकजुट हुए और वर्ष 1935 में अंग्रेज़ी शासन वाले भारत में प्रांतीय स्वायत्तता लागू होने के बाद राजस्थान में नागरिक स्वतंत्रता तथा राजनीतिक अधिकारों के लिये आंदोलन और तेज़ हो गया। वर्ष 1948 में बिखरी हुई विभिन्न रियासतों को एक करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो वर्ष 1956 में राज्य में पुनर्गठन कानून लागू होने तक जारी रही। राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान है, जबकि उत्तर में पंजाब, उत्तर-पूर्व में हरियाणा, पूर्व में उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम में गुजरात है। राजस्थान भौगोलिक रूप से कुल 9 क्षेत्रों में विभाजित है और ये सभी क्षेत्र विरासत और कलात्मक दृष्टि से काफी समृद्ध हैं। राज्य में कुल दो नेशनल टाइगर रिज़र्व हैं- सवाई माधोपुर में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान और अलवर में सरिस्का टाइगर रिज़र्व। राजस्थान का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से शुरू होता है। ईसा पूर्व 3000 से 1000 के बीच यहाँ की संस्कृति सिंधु घाटी सभ्यता जैसी थी।

रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र

भारत के विदेश सचिव हर्षवर्द्धन शृंगला ने सूचित किया है कि भारत, बांग्लादेश को दी गई क्रेडिट लाइन के हिस्से के रूप में रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिये ट्रांसमिशन लाइनों के विकास में सहायता करेगा। रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र की ट्रांसमिशन लाइनों को भारतीय कंपनियों द्वारा क्रेडिट लाइन के तहत विकसित किया जाएगा। इन ट्रांसमिशन लाइनों का मूल्य लगभग 1 बिलियन डॉलर से अधिक होगा। ज्ञात हो कि बांग्लादेश की सरकार, पद्मा नदी के पूर्वी हिस्से में स्थित रूपपुर में अपना पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र बना रही है। इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दो इकाइयाँ शामिल होंगी, रूपपुर यूनिट-1 और रूपपुर यूनिट-2, और इन दोनों की क्षमता 1.2GW होगी। रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी और इसका निर्माण कार्य वर्ष 2017 में शुरू हुआ था। इस परियोजना का कार्यान्वयन बांग्लादेश परमाणु ऊर्जा आयोग द्वारा किया जा रहा है। यह नया संयंत्र बांग्लादेश की बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगा और उसे ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। साथ ही इस परियोजना में भारत की हिस्सेदारी दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मज़बूत करेगी।

‘ट्राइबल टीबी’ पहल

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने हाल ही में टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये ‘ट्राइबल टीबी’ पहल की शुरुआत की है। विदित हो कि भारत में 104 मिलियन से अधिक जनजातीय आबादी रहती है, इसमें 705 जनजातियाँ शामिल हैं और यह देश की कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत है। 177 जनजातीय ज़िलों की पहचान उच्च प्राथमिकता वाले ज़िलों के रूप में की गई है, जहाँ की आबादी कुपोषण, जीवन की बदहाल स्थिति और जागरुकता के अभाव के कारण टीबी के प्रति काफी संवेदनशील है। इस पहल के तहत प्रारंभ में 18 चिह्नित राज्यों के 161 ज़िलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इन ज़िलों में उन्नत संवेदनशीलता मैपिंग तकनीक, स्वच्छता संगठन और वॉलंटियर्स के लिये क्षमता निर्माण का आयोजन, समय-समय पर टीबी के सक्रिय मामलों की खोज हेतु अभियान, संवेदनशील आबादी की पहचान के लिये टीबी प्रिवेंटिव थैरेपी के प्रावधान लागू करने और संवेदनशीलता को कम करने हेतु दीर्घकालिक तंत्र विकसित करने आदि पर ज़ोर दिया जाएगा। 

‘एको’ और ‘बीफरोस्ट’ अंडरवाटर केबल परियोजना 

दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक और गूगल दक्षिण-पूर्व एशिया को उत्तरी अमेरिका से जोड़ने के लिये दो नए अंडरवाटर इंटरनेट केबल स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिंगापुर और इंडोनेशिया में और अधिक तेज़ गति से इंटरनेट की सुविधा प्रदान करना है। इसमें पहली अंडरवाटर केबल परियोजना- ‘एको’ है, जो कि सिंगापुर को प्रत्यक्ष तौर पर अमेरिका से जोड़ेगी। इस परियोजना में ‘फेसबुक’ और ‘गूगल’ द्वारा संयुक्त रप से निवेश किया जाएगा, जबकि दूसरी अंडरवाटर केबल परियोजना- ‘बीफरोस्ट’ है, जो कि दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र को अमेरिका के पश्चिमी तट से जोड़ेगी। इस परियोजना को ‘फेसबुक’ द्वारा क्षेत्रीय कंपनियों के सहयोग से पूरा किया जाएगा।


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