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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 30 Oct, 2020
  • 20 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रिलिम्स फैक्ट्स: 30 अक्तूबर, 2020

इंस्टीट्यूशन  ऑफ एमिनेंस

(Institution of Eminence)

हाल ही में सोनीपत (हरियाणा) स्थित ‘ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी’ (O.P. Jindal Global University) को ‘उत्कृष्ट संस्थान’ या ‘इंस्टीट्यूशन  ऑफ एमिनेंस’ (Institution of Eminence- IoE) की उपाधि प्रदान की गई है। 

  • गौरतलब है कि वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission- UGC) द्वारा देश के 13 अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ ‘ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी’ को IoE की उपाधि प्रदान करने के लिये चुना गया था, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि के लिये कुछ विधायी और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को पूरा करना आवश्यक था। 
  • 29 अक्तूबर को ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के बीच एक समझौता-ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए, जिसके बाद इस यूनिवर्सिटी को IoE के रूप में घोषित करने की आधिकारिक पुष्टि की गई।   

‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस’

(Institution of Eminence- IoE): 

  • ‘उत्कृष्ट संस्थान योजना’ या ‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस स्कीम’ की घोषणा सबसे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2016 के बजट भाषण के दौरान की गई थी।
  • IoE के रूप में संस्थानों के चयन हेतु UGC द्वारा सितंबर 2017 में सार्वजनिक संस्थानों के लिये ‘यूजीसी (सरकारी शिक्षण संस्थानों को इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस के रूप में घोषित करने हेतु) दिशा-निर्देश, 2017’ और निजी संस्थानों के लिये ‘यूजीसी (इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस मानद विश्वविद्यालय) दिशा-निर्देश, 2017’ को अधिसूचित किया गया।
  • इसका उद्देश्य देश के उच्च शिक्षा संस्थानों को सशक्त बनाने तथा उन्हें वैश्विक स्तर के शिक्षण और अनुसंधान संस्थान बनने में सहायता के लिये सरकार की प्रतिबद्धताओं को लागू करना है।
  • इसके पहले चरण के तहत वैश्विक स्तर के शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के रूप में उभरने के लिये देश के 10 सार्वजनिक और 10 निजी उच्च शिक्षा संस्थानों को चिह्नित करने का लक्ष्य रखा गया था।
  • इसके तहत वर्ष 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र से आईआईटी-दिल्ली, आईआईटी-बंबई और बंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) तथा निजी क्षेत्र से मणिपाल अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन एवं बीआईटीएस, पिलानी (BITS Pilani) को चुना गया तथा महाराष्ट्र के जियो इंस्टीट्यूशन को ग्रीनफील्ड श्रेणी में चुना गया था। 

चयन प्रक्रिया:

  • IoE के रूप में चयन के लिये केंद्र सरकार द्वारा एक अधिकार प्राप्त विशेषज्ञ समिति (Empowered Expert Committee- EEC) का गठन किया गया।
  • इस समिति द्वारा ‘राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क’ (National Institutional Ranking Framework-NIRF) पर निजी संस्थानों की रैंकिंग और क्‍यूएस-2020 विश्व श्रेणी में सार्वजनिक संस्थानों के प्रदर्शन के आधार पर उनका चुनाव किया गया।   
  • IoE के तहत चयनित ग्रीनफील्ड संस्थानों को निर्माण पूरा करने और संचालन शुरू करने के लिये 3 वर्ष  का समय दिया गया है।

लाभ:  

  • IoE के रूप में चिह्नित संस्थानों को पूरी तरह से शैक्षिणिक और प्रशासनिक (फीस, पाठ्यक्रम आदि का निर्धारण) स्वतंत्रता प्रदान की जाती है।  
  • IoE के रूप में चिह्नित सार्वजनिक उच्च शिक्षा संस्थान सरकार द्वारा 1000 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त करने के पात्र होंगे, हालाँकि निजी संस्थानों को यह सुविधा नहीं प्रदान की जाएगी।

टाइफून मोलावे

(Typhoon Molave)

हाल ही में मध्य वियतनाम में आए टाइफून मोलावे के कारण मूसलाधार वर्षा और भू-स्खलन की  वजह से इस क्षेत्र में जन-धन की भारी क्षति हुई है। 

  • गौरतलब है कि अक्तूबर की शुरुआत से ही वियतनाम तूफान, भारी बारिश और बाढ़ के प्रकोप से जूझ रहा है, जिसके कारण देश में लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है। 
  • टाइफून मोलावे वियतनाम में पिछले  दो दशकों में आया सबसे बड़ा तूफान है।   
  • 28 अक्तूबर, 2020 को इस तूफान के कारण वियतनाम के क्वांग नैम प्रांत (Quang Nam Province) के दो ज़िलों में भारी भू-स्खलन  की घटनाएँ देखी गईं।   
  • वियतनाम  पहुँचने से पहले टाइफून मोलावे फिलीपींस से गुज़रा था, जहाँ इसके कारण आई बाढ़ और भू-स्खलन में कम-से-कम 16 लोगों की मौत हो गई।

टाइफून: 

  • टाइफून, हरिकेन (Hurricane) या चक्रवात  (Cyclone) ये सभी एक प्रकार के उष्णकटिबंधीय तूफान है, हालाँकि विश्व में अलग-अलग स्थानों पर इनकी अवस्थिति के आधार पर इन्हें अलग नामों से जाना जाता है।
  •  उत्तरी अटलांटिक महासागर और पूर्वोत्तर प्रशांत क्षेत्र में इसे हरिकेन कहा जाता है, जबकि उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में इसे टाइफून और दक्षिण प्रशांत तथा  हिंद महासागर में चक्रवात के नाम से जाना जाता है।
  • उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में अधिकांश टाइफून मई से अक्तूबर के बीच आते हैं, हालाँकि ये वर्ष भर में कभी भी आ सकते हैं।

सर्ब-पावर योजना

[SERB-POWER (Promoting Opportunities for Women in Exploratory Research)]

हाल ही में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिला शोधकर्त्ताओं को शोध एवं विकास गतिविधियों के लिये प्रोत्साहित करने हेतु ‘सर्ब-पावर’ (SERB-POWER) नामक एक योजना की शुरुआत की गई है। 

  • गौरतलब है कि भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से संबद्ध ‘विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड’ (Science and Engineering Research Board- SERB) द्वारा लंबे समय से विज्ञान व इंजीनियरिंग अनुसंधान के क्षेत्र में लैंगिक असमानता को कम करने के लिये एक योजना लागू करने पर विचार किया जा रहा था। 
  • इस योजना के निम्नलिखित दो घटक होंगे:
    1. सर्ब-पावर फैलोशिप/छात्रवृत्ति (SERB-POWER Fellowship)
    2. सर्ब-पावर शोध अनुदान (SERB-POWER Research Grant)

1. सर्ब-पावर फेलोशिप : 

  • लक्ष्य: यह फेलोशिप 35-55 वर्ष आयु वर्ग की महिला शोधकर्त्ताओं पर केंद्रित होगी,  इसके तहत प्रतिवर्ष 25 शोधार्थियों को फेलोशिप प्रदान की जाएगी, हालाँकि किसी भी दिये गए समय में इनकी संख्या 75 से अधिक नहीं होगी। 
  • सहायता: इसके तहत शोधार्थियों को नियमित आय के साथ प्रतिमाह  15,000 रुपए की फेलोशिप, 10 लाख रुपए/प्रतिवर्ष शोध अनुदान और 90,000 रुपए/प्रतिवर्ष अतिरिक्त खर्च के रूप में दिए जाएंगे। 
  • अवधि: यह फेलोशिप किसी शोधार्थी को उसके पूरे कॅरियर (Career) में एक बार ही दी जाएगी और इसकी अवधि तीन वर्ष (बगैर किसी विस्तार की संभावना के) की होगी। 

2. सर्ब-पावर शोध अनुदान: 

  • सर्ब-पावर अनुदान के तहत महिला शोधकर्त्ताओं को निम्नलिखित दो श्रेणियों के माध्यम से वित्तपोषण प्रदान कर सशक्त बनाया जाएगा। 

श्रेणी-I:  आईआईटी, आईआईएसईआर, आईआईएससी, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और केंद्र सरकार के संस्थानों की राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के आवेदकों के लिये। 

  • इस श्रेणी के तहत शोधार्थियों को तीन वर्ष के लिये अधिकतम 60 लाख रुपए प्रदान किये जाएंगे। 

श्रेणी-II:   राज्य विश्वविद्यालयों/कॉलेजों और निजी शैक्षणिक संस्थानों के आवेदकों के लिये।

  • इस श्रेणी के तहत शोधार्थियों को तीन वर्ष के लिये अधिकतम 30 लाख रुपए प्रदान किये जाएंगे। 
  • सर्ब-पावर शोध अनुदान को  ‘विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड-कोर अनुसंधान अनुदान’ (Science and Engineering Research Board-Core Research Grant- SERB-CRG) के दिशा-निर्देशों पर आधारित शर्तों के अनुसार विनियमित किया जाएगा।
  • सर्ब-पावर फेलोशिप के लिये शोधार्थियों के चयन हेतु एक ‘खोज-सह-चयन समिति’ (Search-cum-Selection Committee) का गठन किया गया है।
  •  सर्ब-पावर शोध अनुदान के लिये शोधार्थियों का चयन ‘कार्यक्रम सलाहकार समिति’ (Programme Advisory Committee- PAC) तंत्र के माध्यम से किया जाएगा।

मेरी सहेली पहल

(“Meri Saheli”initiative  by RPF)

रेल यात्रा के दौरान महिलाओं के लिये बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु हाल ही में ‘रेलवे सुरक्षा बल’ (Railway Protection Force-RPF) द्वारा ‘मेरी सहेली’ नामक एक पहल (Meri Saheli) की शुरुआत की गई है।  

Meri-Saheli

  • इस पहल का उद्देश्य रेल यात्रा के दौरान महिला यात्रियों में सुरक्षा की भावना उत्पन्न करना और महिलाओं को  सुरक्षा संबंधी किसी चुनौती के मामले में प्रभावी प्रतिक्रिया देना है। 
  • इसके तहत रेल यात्रा के दौरान महिलाओं की सहायता हेतु महिला अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की एक टीम (एक महिला सब इंस्पेक्टर और हवलदार) गठित की गई है।
  • यह टीम महिला कोच में जाकर उन्हें यात्रा के दौरान ध्यान में रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी देगी, साथ ही यह टीम अकेले यात्रा कर रही महिलाओं की भी पहचान करेगी तथा उनकी जानकारी (जैसे- सीट और कोच संख्या आदि) नोट करेगी जिसके बाद इसे अगले डिवीज़न या ज़ोन के अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा।
  • यात्रा की समाप्ति के समय महिला यात्रियों से उनके अनुभव और सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में फीडबैक भी लिया जाएगा। 
  • इसके साथ ही उन्हें राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के हेल्पलाइन नंबरों 182 (RPF) और 1512 (GRP) की जानकारी देते हुए किसी भी विषम परिस्थिति में इनका प्रयोग करने के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • इस पहल को सितंबर 2020 में दक्षिण-पूर्व रेलवे द्वारा शुरू किया गया था तथा महिला यात्रियों से इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने बाद इसे रेलवे के सभी ज़ोन में विस्तारित कर दिया गया है।

विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 30 अक्तूबर, 2020

केशुभाई पटेल 

गुजरात के अनुभवी राजनीतिज्ञ और पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का 93 वर्ष की आयु में अहमदाबाद में निधन हो गया है। 24 जुलाई, 1928 को गुजरात के जूनागढ़ ज़िले में जन्मे केशुभाई पटेल का मूल नाम केशुभाई देसाई था, जिन्होंने राजनीति में सक्रिय होने के बाद अपना उपनाम ‘देसाई’ से बदलकर ‘पटेल’ कर लिया था। केशुभाई पटेल ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत राजकोट नगरपालिका में चुनाव लड़कर की थी, इसके बाद उन्होंने अपना पहला आम चुनाव वांकानेर (Wankaner) (तब राजकोट ज़िले में विधानसभा सीट) से भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में लड़ा था, हालाँकि वे इस चुनाव में असफल हुए थे। 1970 के दशक में केशुभाई पटेल राष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर तब प्रमुखता हासिल की जब इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भेज दिया गया, वर्ष 1977 में उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता। वर्ष 1995 में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने, हालाँकि उन्हें जल्द ही इस्तीफा देना पड़ा। वर्ष 1998 में पुनः चुनाव आयोजित किये गए और एक बार फिर केशुभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री बने और वर्ष 2001 तक इस पद पर रहे।

आरोग्य वन- गुजरात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा ज़िले में केवडि़या में ‘आरोग्‍य वन’ का उद्घाटन किया है। इस संबंध में जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, योग, आयुर्वेद और ध्‍यान को बढावा देने के उद्देश्य से बनाया गया ‘आरोग्‍य वन’ 17 एकड़ भूमि पर स्थित है और इसमें 380 चयनित प्रजातियों के पाँच लाख पौधे लगाए गए हैं। साथ ही गुजरात स्थिति इस आरोग्‍य वन में कैफेटेरिया और दुकानें भी हैं। इस आरोग्य वन में कमल का तालाब, योग और ध्यान उद्यान, इनडोर प्लांट सेक्शन, डिजिटल सूचना केंद्र, दुकान और एक कैफेटेरिया भी है, जहाँ आयुर्वेदिक भोजन परोसा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवडिया में 'एकता मॉल' और चिल्ड्रेन न्यूट्रिशन पार्क का भी उद्घाटन किया है। 

तमिलनाडु में मेडिकल पाठ्यक्रम में आरक्षण

तमिलनाडु सरकार ने राष्ट्रीय पात्रता सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) पास करने वाले सरकारी स्कूल के छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में 7.5 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का कार्यकारी आदेश पारित किया है। ध्यातव्य है कि तमिलनाडु सरकार ने सितंबर माह में इस संबंध में विधेयक पारित किया था, किंतु अभी यह विधेयक राज्य के राज्यपाल के समक्ष लंबित है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा की गई इस व्यवस्था के मध्यम से राज्य की 300 से अधिक मेडिकल सीटें आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लोगों को मिल सकेंगी। नगरपालिका स्कूलों, आदिवासी कल्याण स्कूलों, कल्ला भर्ती स्कूलों, वन विभाग के स्कूलों और राज्य सरकार के विभागों द्वारा प्रबंधित अन्य स्कूलों से उच्चतर माध्यमिक तक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस आरक्षण की व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा। 

‘सुमंगल’ पोर्टल

अंतर-जातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ‘सुमंगल’ नाम से एक वेब पोर्टल लॉन्च किया है, जो कि अंतर-जातीय जोड़ों को आवेदन की तारीख से 60 दिनों के भीतर प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने में मदद करेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अंतर्जातीय विवाह करने वाले जोड़ों को मिलनी वाली प्रोत्साहन राशि को 1 लाख रुपए से बढाकर 2.5 लाख रुपए करने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तरह के विवाहों से सामाजिक समरसता में बढ़ोतरी होगी। ध्यातव्य है कि ओडिशा में अंतर्जातीय विवाह से संबंधित एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिये विवाह में एक पक्ष का उच्च जाति और दूसरे पक्ष का अनुसूचित जाति से होना अनिवार्य है। इसके अलावा विवाह को  हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत पंजीकृत होना भी अनिवार्य है।


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