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एडिटोरियल

  • 27 Feb, 2023
  • 12 min read
आंतरिक सुरक्षा

तस्करी की समस्या का मुकाबला

यह एडिटोरियल 24/02/2023 को ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ में प्रकाशित “Dealing with the smuggling menace” लेख पर आधारित है। इसमें तस्करी की समस्या और इससे निपटने के तरीकों के बारे में चर्चा की गई है।

संदर्भ

तस्करी (Smuggling) एक बहुआयामी मुद्दा है जिसका अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। तस्करी, गलत घोषणा (misdeclaration) या मुक्त व्यापार समझौतों का दुरुपयोग कर सीमा का उल्लंघन किया जाता है।

  • तस्करी और व्यापक गलत घोषणा (जो मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों एवं संधियों का लाभ उठाती है) का घातक मेल देश की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के लिये एक बड़ा खतरा बन गया है।
  • स्थानीय बाज़ारों और गलियों में ऐसी कई वस्तुएँ दिख जाती हैं जो इस अभ्यास का परिणाम हैं। उदाहरण के लिये, आकर्षक दिखने वाली पतली सिगरेटें जिनके डब्बों पर ‘सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम’ (COTPA) के दिशानिर्देशों के अनुरूप आवश्यक चेतावनी छवि या संदेश भी नहीं होता। ये सिगरेटें आयात की जाती हैं और इनमें निर्माता, आयातक या पैकर का नाम एवं पता, उत्पाद की मात्रा, निर्माण का महीना व वर्ष, खुदरा बिक्री मूल्य और ऐसी अन्य आवश्यक सूचनाएँ दर्ज नहीं होती हैं जो विधिक माप विज्ञान (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमावली, 2011 का खुला उल्लंघन करती हैं।
  • समय आ गया है कि भारत इस खतरे को रोकने के लिये आंतरिक क्षेत्रों और सीमाओं, दोनों पर ही कड़ी कार्रवाई करे। इस विषय में भारत को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिये और एक तस्करी विरोधी दिवस (Anti-Smuggling Day) घोषित करना चाहिये; साथ ही इसे एक वैश्विक प्रयास बनाने के लिये अन्य देशों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिये।

तस्करी के प्रभाव

  • अपराध को बढ़ावा:
    • तस्करी एक अवैध गतिविधि है जिसमें ड्रग्स, आग्नेयास्त्रों और नकली उत्पादों जैसे वर्जित वस्तुओं का परिवहन एवं वितरण शामिल है।
    • यह अवैध व्यापार संगठित अपराध की वृद्धि में योगदान कर सकती है, क्योंकि यह आपराधिक समूहों के दोहन के लिये एक लाभदायक भूमिगत बाज़ार का निर्माण करती है।
  • आतंकवाद का वित्तपोषण:
    • तस्करी आतंकवादी संगठनों के लिये वित्तपोषण का एक स्रोत भी बन सकती है, क्योंकि वे तस्करी से प्राप्त आय का उपयोग अपनी आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिये कर सकते हैं।
    • इसका राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर अस्थिरताकारी प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि यह इन समूहों को अपने हिंसक कार्यों को जारी रखने की अनुमति देता है।
  • काले धन का सृजन और उसका प्रसार:
    • तस्करी में प्रायः नकद धन के बदले वस्तुओं एवं सेवाओं का आदान-प्रदान शामिल होता है, जिसका उपयोग काले धन का सृजन और उसके प्रसार के लिये किया जा सकता है।
    • इससे सरकारों को कर राजस्व की हानि हो सकती है, साथ ही अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान हो सकता है, जो फिर औपचारिक आर्थिक संस्थानों की प्रभावशीलता को कम कर सकता है।
  • राजस्व की हानि:
    • तस्करी में प्रायः करों एवं शुल्कों से बचना या उनकी चोरी करना भी शामिल होता है, जिसके परिणामस्वरूप सरकारों को राजस्व की उल्लेखनीय हानि होती है।
    • यह सार्वजनिक सेवाओं और अवसंरचना के लिये उपलब्ध धन की मात्रा को कम कर सकता है।
      • भारत में पाँच उद्योगों में अवैध व्यापार के प्रभाव का विश्लेषण करने वाली ‘अवैध बाजार: हमारे राष्ट्रीय हितों के लिये खतरा’ (Illicit Markets: A Threat to Our National Interests) शीर्षक रिपोर्ट में बताया गया है कि इन उद्योगों में अवैध बाज़ारों का आकार 2.6 ट्रिलियन रुपए का है।
      • इस अवैध व्यापार के परिणामस्वरूप 15.96 लाख की कुल अनुमानित वैध रोज़गार हानि और केंद्र के लिये कर हानि की स्थिति बनी है जो दस वर्षों में 163% तक बढ़ गई है।

तस्करी से निपटने में व्याप्त चुनौतियाँ

  • तस्करी का पैमाना:
    • तस्करी एक मल्टी-मिलियन डॉलर उद्योग है और इसमें ड्रग्स, हथियार, नकली सामान, वन्य जीव और मनुष्यों सहित मालों की एक विशाल शृंखला शामिल है।
    • तस्करी का यह व्यापक स्तर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिये इसमें शामिल अपराधियों से निपटना कठिन बना देता है।
  • तस्करी नेटवर्क का परिष्कार:
    • तस्कर प्रायः अत्यधिक संगठित नेटवर्क में कार्य करते हैं जो कई देशों में फैले होते हैं, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिये उनका पता लगाना कठिन हो जाता है।
    • ये नेटवर्क प्रायः अत्यधिक परिष्कृत होते हैं और नज़र में आने से बचने के लिये उन्नत तकनीक का उपयोग करते हैं।
  • भ्रष्टाचार:
    • तस्कर प्रायः अपनी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिये भ्रष्टाचार पर भरोसा करते हैं। यह भ्रष्टाचार सीमा शुल्क अधिकारियों से लेकर पुलिस अधिकारियों एवं राजनेताओं तक सभी स्तरों पर मौजूद हो सकता है।
    • भ्रष्टाचार कानूनों एवं विनियमों को लागू करना कठिन बना देता है और तस्करी से निपटने के प्रयासों को कमज़ोर कर देता है।
  • संसाधनों की कमी:
    • तस्करी से निपटने करने के लिये कर्मियों, उपकरणों और धन सहित महत्त्वपूर्ण संसाधनों की आवश्यकता होती है।
    • कई कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास वित्तपोषण और कर्मचारियों की कमी की स्थिति है, जिससे उनके लिये तस्करी से प्रभावी ढंग से निपटना कठिन हो जाता है।
  • समस्या की वैश्विक प्रकृति:
    • तस्करी एक वैश्विक समस्या है जिससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं समन्वय की आवश्यकता है।
    • विभिन्न देशों में तस्करी से संबंधित अलग-अलग कानून और नियम प्रवर्तित हैं, जिससे प्रयासों को समन्वित करना कठिन सिद्ध हो सकता है।
  • लगातार बदलते हथकंडे:
    • पकड़े जाने से बचने के लिये तस्कर लगातार अपने हथकंडे बदलते रहते हैं। वे नई तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं, अपने मार्गों को बदल सकते हैं या माल के परिवहन के लिये कई अलग-अलग तरीकों का उपयोग कर सकते हैं।
  • सार्वजनिक सहयोग:
    • आम लोग तस्करी से निपटने के प्रयासों के समर्थन के लिये हमेशा तत्पर नहीं होते, विशेष रूप से यदि इसमें अधिक निगरानी या अन्य उपाय शामिल हों जो उनकी गोपनीयता का उल्लंघन करते हों।
    • सार्वजनिक समर्थन की यह कमी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिये प्रभावी कार्रवाई करना कठिन बना सकती है।

संबंधित कदम

  • तस्करी को रोकने के लिये माल, पैटर्न और मॉड्यूल का पता लगाने के लिये एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है।
  • हार्डवेयर-आधारित हस्तक्षेप:
    • यूरोप हाई-टेक एंटी-स्मगलिंग टूल्स की एक नई शृंखला की तैनाती कर रहा है, जिसमें एक ऐसी मशीन का उपयोग भी शामिल है जो परमाणु के एक हिस्से को कंटेनरों पर दागती है जो फिर उनकी सामग्री का विश्लेषण करने में मदद करती है।
    • इलेक्ट्रॉनिक स्निफर डॉग भी तैनात किये जा रहे हैं जो बिना थके लगातार असली कुत्तों की तरह कंटेनर के अंदर के कणों को सूँघ सकते हैं। समुद्री निगरानी, सर्वेक्षण और गहरे समुद्र में तस्करों का पीछा करने के लिये मानवरहित सतही जहाज़ भी इस्तेमाल किये जा रहे हैं।

आगे की राह

  • बेहतर सीमा-पार समन्वय:
    • तस्करी से निपटने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है विभिन्न एजेंसियों और देशों के बीच सीमा-पार समन्वय में सुधार लाना।
    • इसमें तस्करी के सामानों की पहचान करने और उन्हें रोकने के लिये खुफिया जानकारी साझा करना, संचार बढ़ाना एवं संयुक्त अभियान कार्यान्वित करना शामिल हो सकता है।
  • ट्रेड-डेटा मिलान (Trade-data Reconciliations):
    • तस्करी का मुकाबला करने का एक अन्य तरीका है ट्रेड-डेटा मिलान को लागू करना, जिसमें विसंगतियों एवं अनियमिततों की पहचान करने के लिये विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा की तुलना करना शामिल है।
    • इन विसंगतियों की पहचान करके अधिकारी अधिक आसानी से संभावित तस्करों की पहचान कर सकते हैं और उन्हें रोकने के लिये कार्रवाई कर सकते हैं।
  • ‘ग्रे मार्केट’ पर देश के भीतर कार्रवाई:
    • एक अन्य प्रभावी रणनीति है ग्रे बाज़ारों की नकेल कसना जो प्रायः तस्करी के सामान के स्रोत होते हैं।
    • इसमें प्रवर्तन प्रयासों को बढ़ाना, कड़े नियमों को लागू करना और उपभोक्ताओं को तस्करी के सामान खरीदने से संबद्ध खतरों के बारे में शिक्षित करना शामिल हो सकता है।
  • विधि माप विज्ञान जैसे विभागों में जनशक्ति बढ़ाना:
    • विधिक माप विज्ञान विभाग (जो वजन एवं माप से संबंधित नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये ज़िम्मेदार है) जैसे विभागों में जनशक्ति को बढ़ाना तस्करी से निपटने का एक अन्य उपाय हो सकता है।
    • निरीक्षकों की संख्या में वृद्धि करके संबंधी प्राधिकरण अधिक प्रभावी ढंग से माल की आवाजाही की निगरानी कर सकते हैं और संभावित तस्करी गतिविधियों की पहचान कर सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न: तस्करी के तरीकों की बदलती प्रकृति और संगठित अपराध समूहों की बढ़ती भागीदारी के आलोक में कौन-से तस्करी विरोधी उपाय लागू किये जा सकते हैं? चर्चा कीजिये।


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