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एडिटोरियल

  • 17 Jun, 2020
  • 15 min read
शासन व्यवस्था

डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र: चुनौतियाँ व संभावनाएँ

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र व Gov Tech 3.0 से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ 

भारत ‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन’ के विचार को बढ़ावा दे रहा है। इस विचार के विकास में डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की प्रभावी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस संदर्भ में कुछ दिन पूर्व ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics of Information Technology-MeITY) ने राष्ट्रीय मुक्त डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र (National Open Digital Ecosystem-NODE) ​​के लिये रणनीति बनाने पर एक परामर्श पत्र जारी किया है। जिसे Gov Tech 3.0 नाम दिया गया है। यह राष्ट्रीय मुक्त डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर केंद्रित है। राष्ट्रीय मुक्त डिजिटल पारिस्थितिकी या GovTech 3.0 को खुले और सुरक्षित वितरण प्लेटफार्मों के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसे पारदर्शी शासन तंत्र द्वारा निर्देशित किया जाएगा। यह सामाजिक परिणामों में परिवर्तन करने के लिये नागरिकों, व्यवसायों और सरकार के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाने में सहायता करेगा।

Gov Tech 3.0 के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं- (i) पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं जैसे आधार और GST नेटवर्क, (ii) डेटा गोपनीयता, सुरक्षा और डोमेन-विशिष्ट नीतियों और मानकों के संबंध में बुनियादी ढाँचे को नियंत्रित करने के कानून, और (iii) इस इंफ्रास्ट्रक्चर को लाभप्रद बनाना ताकि सभी के लिये यह महत्त्वपूर्ण साबित हो।

वस्तुतः मुक्त डिजिटल पारिस्थितिकी संचार के विभिन्न पहलूओं में समन्वय करती है परंतु डिजिटल नेटवर्क से संबंधित कई अंतर्निहित चुनौतियाँ हैं जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय मुक्त डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र

  • यह डिजिटल प्रशासन को सक्षम करने के लिये एक राष्ट्रीय रणनीति है, जिसका उद्देश्य नागरिकों, व्यवसायों और सरकार के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाकर सामाजिक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाना है।
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत ई-ट्रांसपोर्ट मिशन मोड परियोजना राष्ट्रीय मुक्त डिजिटल पारिस्थितिकी का एक बेहतर उदाहरण है।
  • इस परियोजना में दो एप्लिकेशन शामिल हैं- वाहन और सारथी जो क्रमशः वाहन पंजीकरण और ड्राइवर लाइसेंस संचालन को स्वचालित करते हैं। इस डिजिटल डेटा की उपलब्धता इस प्लेटफॉर्म को नागरिकों, ऑटोमोबाइल डीलरों, बीमा कंपनियों और सुरक्षा एजेंसियों सहित विभिन्न संस्थाओं को सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम बनाती है।  
  • यह भुगतान गेटवे और डिजि-लॉकर जैसे बाहरी अनुप्रयोगों के साथ इंटर-ऑपरेबिलिटी भी प्रदान करता है।

शासन में प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • Gov Tech 1.0 आयकर प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने जैसी मैनुअल प्रक्रियाओं के ‘कम्प्यूटरीकरण’ का युग था।
  • Gov Tech 2.0 तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करते हुए एंड-टू-एंड प्रक्रियाओं को डिजिटाइज़ करता था, जैसे- सरकार की ‘ई-ऑफिस’ फ़ाइल प्रबंधन प्रणाली। 
  • Gov Tech 3.0 मुक्त डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित है। यह सरकार को ‘डिजिटल कॉमन्स’ बनाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिये प्रोत्साहित करता है। 
    • यह डिजिटल अवसंरचना बनाकर सरकार को सुविधाओं का आपूर्तिकर्ता बनाने की परिकल्पना करता है, जिस पर इनोवेटर्स जनता की भलाई के लिये सहयोग कर सकते हैं। उदाहरण- सार्वजनिक व निज़ी भागीदारी के माध्यम से तैयार किया गया आरोग्य सेतु एप 

Govtech

डिजिटल नवाचार का केंद्र बन रहा भारत

  • डिजिटल इंडिया देश में डिजिटल तरीके से सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये आवश्यक डिजिटल आधारभूत ढाँचा खड़ा करते हुए डिजिटल सशक्तीकरण का माध्यम बन रहा है।
  • एक ऐसे विश्व में जहाँ अब भौगोलिक दूरियाँ, बेहतर भविष्य के निर्माण में बाधा के रूप में नहीं रह गई है, भारत हर क्षेत्र में डिजिटल नवाचार का सशक्त केंद्र बन चुका है। 
  • ऑप्टिकल फाइबर से जुड़े एक लाख से अधिक गाँव, 121 करोड़ मोबाइल फोन, लगभग 122  करोड़ आधार और 50 करोड़ इंटरनेट सेवा का उपयोग करने वाले लोगों के साथ भारत अब दुनिया में प्रौद्योगिकी के साथ सहजता से जुड़ी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है।

Gov Tech 3.0 से लाभ 

  • सरकारी सेवाओं का एकीकरण: Gov Tech 3.0 के माध्यम से सभी सेवाओं का एकीकरण कर जनता को ऑनलाइन सेवाओं का मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
    • इसे उमंग एप के प्रयोग के माध्यम से समझ सकते हैं, जहाँ अधिकाँश सरकारी सेवाएँ व योजनाएँ एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
    • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत ई-ट्रांसपोर्ट मिशन मोड परियोजना भी सरकारी सेवाओं के एकीकरण का उदाहरण हैं

सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा 

  • इसके माध्यम से सभी लोगों को आसान एवं सिंगल विंडो एक्सेस उपलब्ध कराने के लिये विभागों और सभी ज़िला मुख्यालयों का समेकन किया गया है।
  • सभी सरकारी कागज़ात/प्रमाणपत्र क्लाउड पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • प्रत्येक नागरिक को अनोखी, आजीवन, ऑनलाइन और प्रमाणन योग्य डिजिटल पहचान प्रदान की जाएगी। 
  • मोबाइल फोन तथा बैंक एकाउंट को आपस में जोड़कर व्यक्तिगत स्तर पर डिजिटल और वित्तीय रूप से प्रत्येक व्यक्ति को समर्थ बनाया जाएगा।
  • शिक्षकों के लिये नेशनल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर DIKSHA शिक्षा सुधारों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 
  • इसी प्रकार कृषि के लिये एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाना है, जिसे एक अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा डिज़ाइन किया जा रहा है।

अर्थव्यवस्था और डिजिटल भारत 

  • भारत को पाँच ट्रिलियन डॉलर वाली डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने के लिये इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डाटा संरक्षण नीति में बदलाव सहित कई अन्य नीतियाँ शुरू की जा रही हैं।
  • विमुद्रीकरण के बाद से ही सरकार द्वारा डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में देश में डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस जैसे मिशनों को तेज़ी से लागू किया जा रहा है। 
  • इस लक्ष्य को वित्त वर्ष 2024-25 तक हासिल करने के लिये कार्ययोजना बनाई गई है।

डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में चुनौतियाँ 

  • आवश्यक संरचना का अभाव: एसोचैम और डेलाइट की एक रिपोर्ट के अनुसार नीतियों में अस्पष्टता व ढाँचागत कठिनाइयों के चलते महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय मुक्त डिजिटल पारिस्थितिकी परियोजना के सफल कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के मामले में अनेक चुनौतियाँ हैं। इसके अलावा बार-बार नेटवर्क कनेक्टिविटी टूट जाना या फिर सर्वर का ठप हो जाना भी कठिनाई पैदा करता है।
  • डिजिटल डिवाइड: डिजिटल पारिस्थितिकी के विकास के लिये सुदूर गाँवों में भी पर्याप्त कनेक्टिविटी उपलब्ध कराकर डिजिटल डिवाइड को खत्म करने की ज़रूरत है। देश में अब भी 50 हज़ार से अधिक गाँव ऐसे हैं, जहाँ मोबाइल कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। 
  • साइबर सुरक्षा का मुद्दा: भारत का मौज़ूदा सूचना प्रौद्योगिकी कानून साइबर अपराधों को रोकने के लिहाज़ से बहुत प्रभावी नहीं है। एटीएम कार्ड की क्लोनिंग के अलावा, बैंक अकाउंट का हैक हो जाना, डेटा और गोपनीय जानकारी हैकर्स तक पहुँच जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। ऐसे में जब तक साइबर अपराधों को लेकर कानून में कठोर प्रावधान नहीं होंगे, तब तक डिजिटल पारिस्थितिकी को वह रफ्तार नहीं मिल पाएगी, जो अपेक्षित है।
  • असमानताओं में वृद्धि: सेवाओं के डिजिटल प्रावधान में सफलता कई अंतर्निहित कारकों पर निर्भर है, जिसमें डिजिटल साक्षरता, शिक्षा और स्थिर और तेज़ दूरसंचार सेवाओं तक पहुँच शामिल है। इन मुद्दों का समाधान किये बिना सेवाओं के बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप मौजूदा असमानताओं में वृद्धि हो सकती है।
  • डेटा की सुरक्षा का मुद्दा: यह सवाल बार-बार उठता है कि क्या इंटरनेट पर हमारी जानकारी और पहचान सुरक्षित है? देश के मौजूदा कानून के मुताबिक सभी सर्विस प्रोवाइडरों को अपने इंटरनेट और मोबाइल ग्राहकों की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को देनी होती है। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आईएसपी) स्वयं को केवल  इंटरनेट ग्राहक तक पहुँचाने का हाईवे मानते हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट यूज़र के मेल या सोशल नेटवर्किंग साइट पर दी जानकारी केवल विदेशी कंपनियों के सर्वर में होती है और भारत में उसे डिक्रिप्ट नहीं किया जा सकता।

समाधान

  • डिजिटल पारिस्थितिकी के निर्माण में सुरक्षित डेटाबेस डिज़ाइन करना महत्त्वपूर्ण है। इसलिये यह आवश्यक है कि GovTech 3.0 को नियंत्रित करने वाले नियम व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 के प्रावधानों को ध्यान में रखें। 
  • डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान चला रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य समस्त राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में प्रत्येक उपयुक्त परिवारों के एक व्यक्ति को डिजिटल साक्षर कर 40 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को इस योजना से जोड़ना है।

  • भारतनेट परियोजना के माध्यम से ग्राम पंचायतों को 100 Mbps की स्पीड पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया। यह विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल कनेक्टिविटी परियोजना है और अनेक आयामों में विशिष्ट है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय और गुणवत्तायुक्त ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगी। 
  • डिजिटल पारिस्थितिकी के निर्माण के लिये सरकार ब्रॉडबैंड हाईवे, पब्लिक इंटरनेट एक्सेस जैसे कार्यक्रम लागू कर रही है। 

आगे की राह

  • डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को उपलब्धता, पहुंच, सामर्थ्य, मूल्य और विश्वास के मानकों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिये।
  • जिन अदृश्य नियमों को ‘तकनीक’ के नाम पर कोडित किया गया है, उन्हें विचारशील डिज़ाइन सिद्धांतों, कानून, शासन, अवसंरचना और सार्वजनिक जुड़ाव के माध्यम से पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।
  • यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि GovTech 3.0 नागरिक-केंद्रित हो और विकास की मुख्य धारा में अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक समावेशी सेवाओं की पहुँच उपलब्ध कराता है।

प्रश्न- GovTech 3.0 से आप क्या समझते हैं? शासन में प्रौद्योगिकी के उपयोग को रेखांकित करते हुए डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के मार्ग में आने वाली चुनौतियों और इन चुनौतियों के समाधान का उल्लेख कीजिये।


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