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उत्तराखंड स्टेट पी.सी.एस.

  • 13 Feb 2026
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दिल्ली ने ‘लखपति बिटिया योजना’ शुरू की

चर्चा में क्यों?

दिल्ली सरकार ने बालिकाओं की शिक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लखपति बिटिया योजना नामक एक नई सामाजिक कल्याण योजना शुरू की है, जिसके तहत जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक संरचित वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: लखपति बिटिया योजना की घोषणा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा की गई है और यह 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगी।
    • यह योजना वर्ष 2008 में शुरू की गई पुरानी ‘लाड़ली योजना’ का स्थान लेगी और उसे उन्नत रूप में लागू करेगी, जिसे क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
  • उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के स्कूल छोड़ने की समस्या को रोकना तथा उनकी शैक्षिक निरंतरता, वित्तीय सुरक्षा और सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है।
    • यह आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की बालिकाओं को शिक्षा के प्रमुख चरणों पर चरणबद्ध बैंक जमा के माध्यम से सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
  • वित्तीय संरचना: इस कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता को प्रमुख शैक्षिक चरणों से जोड़कर किस्तों में जमा किया जाएगा — जन्म से लेकर स्नातक या डिप्लोमा पाठ्यक्रम तक
    • जमा की गई कुल राशि पर ब्याज अर्जित होगा और परिपक्वता पर लाभार्थी के बैंक खाते में यह राशि ₹1 लाख से अधिक हो जाने के लिये डिज़ाइन की गई है।
    • जो बालिकाएँ पूर्व ‘लाड़ली योजना’ की लाभार्थी हैं, उन्हें उनके अधिकार मिलते रहेंगे, जबकि नए लाभार्थियों को संशोधित लखपति बिटिया योजना के अंतर्गत पंजीकृत किया जाएगा।
  • पात्रता मानदंड: योजना का लाभ पाने के लिये बालिका का जन्म दिल्ली में होना चाहिये और उसके परिवार का कम से कम तीन वर्ष से दिल्ली में निवास होना आवश्यक है, जिसकी वार्षिक आय ₹1.20 लाख से अधिक न हो।
    • प्रति परिवार अधिकतम दो बालिकाएँ इस योजना के अंतर्गत पात्र होंगी।
  • प्रत्यक्ष अंतरण: भुगतान पूरी तरह डिजिटल आवेदन और वितरण प्रक्रिया के माध्यम से सीधे लाभार्थी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में जमा किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता तथा सुगमता सुनिश्चित होगी।

और पढ़ें: आधार


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विश्व रेडियो दिवस 2026

चर्चा में क्यों?

विश्व रेडियो दिवस एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है, जिसे प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रेडियो को संचार का एक सशक्त माध्यम, सूचना तक पहुँच का महत्त्वपूर्ण साधन और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने वाले माध्यम के रूप में मान्यता देना है।

मुख्य बिंदु:

  • आधिकारिक थीम: रेडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: AI एक उपकरण है, आवाज़ नहीं (Radio and Artificial Intelligence: AI is a tool, not a voice)।
  • थीम का उद्देश्य: ‘रेडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय इस बात का अन्वेषण करता है कि उभरती प्रौद्योगिकियाँ प्रसारकों का समर्थन कैसे कर सकती हैं, बिना उन्हें प्रतिस्थापित किये।
  • मान्यता: यह वर्ष 1946 में संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना का सम्मान करता है और समावेशी समाजों के निर्माण तथा पूरे विश्व में विविध श्रोताओं तक पहुँचने में रेडियो की भूमिका को स्वीकार करता है।
  • स्वीकृति: इस दिवस की घोषणा वर्ष 2011 में UNESCO द्वारा की गई थी और बाद में वर्ष 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसे अपनाया गया।
  • विश्व रेडियो दिवस कॉन्क्लेव 2026: आकाशवाणी रायपुर (छत्तीसगढ़) ने UNESCO के सहयोग से छत्तीसगढ़ में एक प्रमुख कॉन्क्लेव का आयोजन किया, जिसमें मानव-केंद्रित संचार के संरक्षण में AI की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
  • महत्त्व: विश्व रेडियो दिवस तेज़ी से बदलते मीडिया परिवेश में रेडियो की स्थायी प्रासंगिकता का उत्सव मनाता है।

और पढ़ें: UNESCO


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