दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

उत्तराखंड स्टेट पी.सी.एस.

  • 02 Mar 2026
  • 0 min read
  • Switch Date:  
उत्तराखंड Switch to English

चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026 उत्तराखंड में

चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026' का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। यह एक सप्ताह तक चलने वाला सांस्कृतिक और पर्यटन कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र की विरासत, संस्कृति और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना है।

मुख्य बिंदु:

  • स्थल: यह आयोजन उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित चंपावत ज़िले  में आयोजित किया जा रहा है।
    • यह महोत्सव चंपावत क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है, विशेष रूप से काली कुमाऊँ की होली परंपराओं का, जिनमें बैठकी होली, खड़ी होली, चौफुल्ला, लय-ताल, राग-रागिनी और विविध लोक कलाएँ शामिल हैं।
  • पर्यटन फोकस: इस संस्करण को ‘विंटर कॉर्बेट फेस्टिवल’ के रूप में भी नामित किया गया है, जिसका उद्देश्य शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देना है।
    • पर्यटन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय युवाओं के लिये रोज़गार सृजन हेतु पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, ट्रेकिंग और माउंटेन बाइकिंग जैसी साहसिक गतिविधियाँ भी आयोजित की जाएंगी।
  • स्थानीय कला एवं हस्तशिल्प: कुमाऊँनी पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और स्थानीय कृषि उपज के प्रचार हेतु प्रदर्शनियाँ लगाई गई हैं।
    • ये पहलें स्थानीय कारीगरों, उत्पादकों और स्वयं सहायता समूहों को समर्थन प्रदान करेंगी तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ विज़न के अनुरूप हैं।
  • महत्त्व: चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026, उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और साहसिक पर्यटन को एकीकृत कर आर्थिक विकास को गति देने, क्षेत्रीय परंपराओं के संरक्षण तथा चंपावत को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयासों को दर्शाता है।

और पढ़ें: स्वयं सहायता समूह, ‘वोकल फॉर लोकल’ विज़न


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

ईरान ने अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में अली खामेनेई की कथित मृत्यु के बाद, ईरान के इस्लामी गणराज्य ने अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद के एक प्रमुख सदस्य के रूप में नियुक्त किया है, जिससे प्रभावी रूप से उन्हें संक्रमण काल ​​के दौरान कार्यवाहक सर्वोच्च अभिकर्त्ता के रूप में तैनात किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • नेतृत्व परिषद: ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत, अब एक तीन-सदस्यीय अंतरिम निकाय इस्लामी गणराज्य का शासन चला रहा है। 
    • इसमें अराफी के साथ राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं, जो नेतृत्व के इस अभूतपूर्व शून्य के बीच सत्ता की निरंतरता सुनिश्चित करते हैं।
  • भूमिका और अधिकार: अंतरिम नेतृत्व परिषद सर्वोच्च अभिकर्त्ता के संवैधानिक कर्त्तव्यों का तब तक निर्वहन करती है, जब तक कि 'विशेषज्ञों की सभा' द्वारा स्थायी उत्तराधिकारी का चयन नहीं कर लिया जाता। 
    • ईरान में सर्वोच्च अभिकर्त्ता सर्वोच्च अधिकार होता है, जो सशस्त्र बलों, न्यायपालिका, राज्य प्रसारण और प्रमुख नीतिगत निर्णयों की देख-रेख करता है।
  • अराफी की पृष्ठभूमि: वह एक वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं और उन्होंने ईरान के धार्मिक प्रतिष्ठान में प्रमुख पदों पर कार्य किया है, जिसमें 'गार्जियन काउंसिल' और 'विशेषज्ञों की सभा' दोनों की सदस्यता शामिल है। 
    • कौम के प्रमुख मदरसों (सेमिनरी) का नेतृत्व भी किया है।
    • कौम शिया इस्लामी छात्रवृत्ति/विद्वत्ता का ईरान का प्रमुख केंद्र है और इसके मदरसों के साथ अराफी का जुड़ाव उनकी लिपिकीय (धार्मिक) स्थिति को और मज़बूत करता है।
  • शासन की निरंतरता: अंतरिम परिषद यह सुनिश्चित करती है कि संक्रमण काल ​​के दौरान कार्यकारी, सैन्य और न्यायिक अधिकार निर्बाध रूप से बने रहें।
  • महत्त्व: अंतरिम नेतृत्व परिषद में अलीरेज़ा अराफी की नियुक्ति ईरान के राजनीतिक संक्रमण का एक महत्त्वपूर्ण क्षण है, जो बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच नेतृत्व के उत्तराधिकार के लिये संवैधानिक प्रक्रियाओं को रेखांकित करता है।
और पढ़ें: ईरान-इज़राइल संघर्ष

close
Share Page
images-2
images-2