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भारत की रामसर सूची में दो नई आर्द्रभूमियाँ शामिल की
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 से पहले भारत की रामसर सूची में दो नई आर्द्रभूमियों को जोड़े जाने की घोषणा की।
मुख्य बिंदु:
- नई रामसर स्थल: उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ ज़िले में स्थित छारी–ढांड को भारत की रामसर सूची में अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के आर्द्रभूमियों के रूप में शामिल किया गया है।
- भारत का रामसर नेटवर्क वर्ष 2014 में 26 स्थलों से बढ़कर वर्ष 2026 में 98 स्थलों तक पहुँच गया है।
- पटना पक्षी अभयारण्य: यह सबसे छोटे संरक्षित पक्षी अभयारण्यों में से एक है और एक महत्त्वपूर्ण पक्षी एवं जैव-विविधता क्षेत्र (IBA) भी है।
- छारी–ढांड आर्द्रभूमि: कच्छ के रण क्षेत्र में स्थित एक मौसमी लवणीय आर्द्रभूमि, जो प्रवासी जलपक्षियों और मरुस्थलीय जैव-विविधता के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- यह नलसरोवर, थोल, खिजड़िया और वधवाना के बाद गुजरात का पाँचवाँ रामसर स्थल है।
- महत्त्व: नए जोड़े गए स्थल सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियों का समर्थन करते हैं तथा संकटग्रस्त पक्षियों के अतिरिक्त चिंकारा, भेड़िये, कैराकल, मरु बिल्ली एवं मरु लोमड़ी जैसे वन्यजीवों का भी आवास हैं।
- प्रासंगिकता: रामसर सूची में शामिल होना वैश्विक रूप से स्वीकृत ढाँचों के अंतर्गत आर्द्रभूमि संरक्षण और सतत प्रबंधन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दर्शाता है।
- रामसर कन्वेंशन: यह आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के लिये एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिस पर वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किये गए थे।
- भारत 1 फरवरी, 1982 को इसका पक्षकार बना।
- विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: यह 2 फरवरी को मनाया जाता है।
- थीम: आर्द्रभूमियाँ और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव।
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और पढ़ें: विश्व आर्द्रभूमि दिवस, रामसर स्थल, रामसर कन्वेंशन, प्रवासी पक्षी |
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MoSPI ने PAIMANA पोर्टल लॉन्च किया
चर्चा में क्यों?
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने ₹150 करोड़ और उससे अधिक लागत वाले केंद्रीय क्षेत्र के अवसंरचना परियोजनाओं के लिये PAIMANA नामक एक नया वेब-आधारित निगरानी पोर्टल शुरू किया है।
मुख्य भाग:
- PAIMANA: इसका पूर्ण रूप प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग एंड एनालिटिक्स फॉर नेशन-बिल्डिंग पोर्टल है और यह बड़े अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिये एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है।
- यह वास्तविक-समय ट्रैकिंग और विश्लेषण में सुधार हेतु पूर्ववर्ती OCMS-2006 (ऑनलाइन कंप्यूटराइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम) का स्थान ले चुका है।
- एकीकरण: PAIMANA को DPIIT के इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग पोर्टल के साथ एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे स्वचालित डेटा प्रवाह संभव होता है और मैनुअल डेटा प्रविष्टि कम होती है।
- यह एकीकरण ‘वन डेटा, वन एंट्री’ सिद्धांत का पालन करता है, ताकि परियोजना रिपोर्टिंग को मानकीकृत किया जा सके और त्रुटियाँ न्यूनतम हों।
- परियोजना कवरेज: दिसंबर 2025 तक कुल 1,392 चालू केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाएँ PAIMANA पोर्टल पर शामिल की जा चुकी हैं।
- क्षेत्रीय विस्तार: परियोजनाएँ परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, रेलवे, कोयला, विद्युत, आवास एवं शहरी कार्य, जल संसाधन, दूरसंचार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आदि प्रमुख क्षेत्रों में फैली हुई हैं।
- विशेषताएँ: यह पोर्टल बेहतर निगरानी और निर्णय-निर्माण के लिये इंटरैक्टिव डैशबोर्ड, उन्नत विश्लेषण, भूमिका-आधारित पहुँच, स्वचालित रिपोर्ट तथा क्वेरी मॉड्यूल प्रदान करता है।
- उद्देश्य: प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता, डेटा गुणवत्ता और समयबद्धता को बढ़ाना, जिससे राष्ट्र-निर्माण तथा आर्थिक विकास को समर्थन मिले।
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मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज UNESCO विश्व धरोहर सूची के लिये नॉमिनेट हुए
चर्चा में क्यों?
भारत ने मेघालय की लिविंग रूट ब्रिज को ‘जिंगकिएंग जरी/ल्यू च्राई सांस्कृतिक परिदृश्य’ शीर्षक के अंतर्गत UNESCO में नामांकन दस्तावेज़ (डॉसियर) के रूप में प्रस्तुत किया है।
मुख्य बिंदु:
- नामांकन प्रस्तुत: UNESCO में भारत के राजदूत विशाल वी. शर्मा ने UNESCO विश्व धरोहर केंद्र के निदेशक को नामांकन दस्तावेज़ सौंपा।
- धरोहर का मत्त्व: यह नामांकन इन लिविंग रूट ब्रिज के सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और तकनीकी महत्त्व पर प्रकाश डालता है, जिसमें पारंपरिक पारिस्थितिक प्रबंधन तथा पीढ़ीगत ज्ञान पर ज़ोर दिया गया है।
- स्थान: ये ब्रिज मुख्यतः मेघालय में खासी और जयंतिया पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों में स्थित हैं।
- सांस्कृतिक महत्त्व: ये ब्रिज स्वदेशी खासी और जयंतिया समुदायों द्वारा निर्मित तथा संरक्षित जैव-अभियांत्रिक (Bio-engineered) संरचनाएँ हैं।
- ये लोगों, प्रकृति और पारंपरिक ज्ञान के बीच गहरे सामंजस्य का प्रतीक हैं।
- वैश्विक मान्यता: यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो यह स्थल UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करेगा, जिससे वैश्विक पहचान मिलेगी और संरक्षण प्रयासों तथा सतत पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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और पढ़ें: UNESCO, विश्व धरोहर स्थल, लिविंग रूट ब्रिज |
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पश्चिम बंगाल में पुलिस में बड़ा फेरबदल: पीयूष पांडे को कार्यवाहक DGP नियुक्त किया
चर्चा में क्यों?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले किये गए एक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल में राज्य सरकार ने वरिष्ठ IPS अधिकारी पीयूष पांडेय को राजीव कुमार के स्थान पर कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है।
मुख्य बिंदु:
- DGP नियुक्ति नियम: प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) के निर्णय के अनुसार—
- चयन: राज्यों को पात्र वरिष्ठ अधिकारियों की सूची UPSC को भेजनी होती है।
- संक्षिप्त सूची: UPSC योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार करता है।
- कार्यकाल: सेवानिवृत्ति की तिथि चाहे जो भी हो, DGP का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष होना चाहिये।
- कार्यवाहक DGP: सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार ‘कार्यवाहक DGP’ नियुक्त करने की प्रथा को हतोत्साहित किया है और इस तर्क पर ज़ोर दिया है कि वर्तमान पदाधिकारी के सेवानिवृत्त होने से पहले स्थायी नियुक्ति अंतिम कर ली जानी चाहिये।
- चुनाव-पूर्व तैयारी: 52 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला-पुनर्नियोजन विधानसभा चुनावों से पहले प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिये एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
- ‘कार्यवाहक’ DGP की प्रवृत्ति: यह नियुक्ति अंतरिम व्यवस्थाओं की परंपरा को आगे बढ़ाती है। चयन पैनल को लेकर राज्य सरकार और UPSC के बीच चल रहे कानूनी विवादों के कारण पश्चिम बंगाल में दिसंबर 2023 से कोई स्थायी DGP नहीं रहा है।
- कानूनी अड़चनें: स्थायी नियुक्ति से संबंधित मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
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और पढ़ें: प्रकाश सिंह केस (2006), सर्वोच्च न्यायालय |
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अमेरिकी म्यूज़ियम लौटाएगा तमिलनाडु से चोरी तीन दुर्लभ कांस्य मूर्तियाँ
चर्चा में क्यों?
स्मिथसोनियन के नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट ने घोषणा की है कि वह तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियाँ भारत को वापस करेगा। यह निर्णय कई वर्षों तक चली स्रोत-जाँच के बाद लिया गया है, जिसमें यह पुष्टि हुई कि ये कलाकृतियाँ तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से हटाई गई थीं।
मुख्य बिंदु:
- वापस लाई गई मूर्तियाँ: ये तीनों धरोहर दक्षिण भारतीय कांस्य शिल्पकला की उत्कृष्ट कृतियाँ हैं, जिन्हें मूल रूप से मंदिर अनुष्ठानों में पवित्र शोभायात्रा मूर्तियों (उत्सव मूर्तियों) के रूप में उपयोग किया जाता था—
- शिव नटराज: चोल काल की एक उत्कृष्ट कृति, जो लगभग 990 ईस्वी की मानी जाती है।
- सोमस्कंद: 12वीं शताब्दी की चोलकालीन कांस्य प्रतिमा, जिसमें शिव अपनी पत्नी पार्वती और पुत्र स्कंद के साथ दर्शाए गए हैं।
- परवई के साथ संत सुंदरर: 16वीं शताब्दी की विजयनगर कालीन कांस्य मूर्ति, जिसमें तमिल संत और उनकी पत्नी को दर्शाया गया है।
- पहचान: मूर्तियों के मूल स्थानों की पुष्टि पुदुचेरी स्थित फ्रेंच इंस्टीट्यूट के अभिलेखागार में उपलब्ध 1950 के दशक की दुर्लभ तस्वीरों के माध्यम से की गई।
- मूल स्थल: शिव नटराज की मूर्ति तंजावुर ज़िले के श्री भव औषधेश्वर मंदिर से चुराई गई थी।
- सोमस्कंद की प्रतिमा तिरुवरूर ज़िले के अलाथुर गाँव स्थित विश्वनाथ स्वामी मंदिर से संबंधित पाई गई।
- संत सुंदरर की मूर्ति कल्लाकुरिची ज़िले के वीरसोलापुरम गाँव के एक शिव मंदिर से प्राप्त हुई थी।
- संग्रहालय की नैतिक प्रतिबद्धता: स्मिथसोनियन संग्रहालय ने मूर्तियों की वापसी पर सहमति देने के आधार के रूप में अपनी नैतिक प्रबंधन और पारदर्शिता नीतियों का हवाला दिया, जिसमें इसकी 'साझा प्रबंधन और नैतिक वापसी नीति' (Shared Stewardship and Ethical Returns Policy) भी शामिल है।
- सांस्कृतिक विरासत की पुनर्स्थापना: पवित्र मंदिर-कांस्य मूर्तियों की वापसी भारत के अपने कलात्मक वंश और धार्मिक इतिहास को पुनः प्राप्त करने के प्रयासों को सशक्त बनाती है।
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भारतीय विदेश व्यापार संस्थान ने टाइम्स B-स्कूल रैंकिंग 2026 में टॉप किया
चर्चा में क्यों?
भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) ने टाइम्स B-स्कूल रैंकिंग 2026 में पहला स्थान हासिल किया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक व्यवसाय शिक्षा पर विशेष ध्यान देने वाले भारत के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में उसकी स्थिति और सुदृढ़ हुई है।
मुख्य बिंदु:
- IIFT: यह वर्ष 1963 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय के रूप में स्थापित किया गया।
- स्थिति: यह एक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय है जिसके परिसर दिल्ली, कोलकाता, काकिनाडा और गिफ्ट सिटी में स्थित हैं।
- मुख्य फोकस: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिये विशेष रूप से तैयार प्रमुख MBA कार्यक्रम, कार्यकारी शिक्षा और डॉक्टोरल अनुसंधान प्रदान करता है।
- SRM यूनिवर्सिटी AP (पारी स्कूल ऑफ बिज़नेस): शीर्ष उभरते B-स्कूल श्रेणी में प्रथम स्थान पर रही।
- रैंकिंग का महत्त्व: टाइम्स B-स्कूल रैंकिंग 2026 शैक्षणिक उत्कृष्टता, रोज़गार परिणाम, उद्योग सहभागिता, पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता और प्रतिष्ठा जैसे मापदंडों पर बिज़नेस स्कूलों का मूल्यांकन करती है।
- नेतृत्वकारी भूमिका: IIFT का प्रथम स्थान हासिल करना अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय शिक्षा में उसकी मज़बूती और वैश्विक व्यापार की गतिशीलताओं के लिये भविष्य के अभिकर्त्ताओं को तैयार करने में उसकी भूमिका को दर्शाता है।
- रणनीतिक विस्तार: यह उपलब्धि संस्थान के बढ़ते वैश्विक उन्मुखीकरण, शैक्षणिक कठोरता और दुबई में उसके ऑफशोर परिसर जैसी नई पहलों की शुरुआत को श्रेय दिया जाता है।
- विज़न 2047: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ज़ोर दिया कि संस्थान की उत्कृष्टता ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है और ऐसे प्रशिक्षित कार्यबल को तैयार कर रही है जो भारत को वैश्विक व्यापार की महाशक्ति बनाने में सक्षम हों।
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कैप्टन हंसजा शर्मा रुद्रा आर्म्ड हेलीकॉप्टर की पहली महिला पायलट बनीं
चर्चा में क्यों?
कैप्टन हंसजा शर्मा ने इतिहास रच दिया है, क्योंकि वे भारतीय सेना में रुद्र सशस्त्र हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिये बनने पहली महिला पायलट बन गई हैं। यह अत्याधुनिक हथियारों से लैस हेलीकॉप्टर अग्रिम मोर्चों पर युद्धक भूमिकाओं में इस्तेमाल किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक उपलब्धि: जहाँ अब तक महिलाएँ परिवहन और उपयोगिता हेलीकॉप्टरों (जैसे चीता और चेतक) को उड़ाती रही हैं, वहीं कैप्टन शर्मा एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH-WSI) रुद्र—एक समर्पित आक्रमण मंच पर स्थानांतरित होने वाली पहली महिला बनी हैं।
- रुद्र सशस्त्र हेलीकॉप्टर: रुद्र, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) का सशस्त्र संस्करण है।
- यह 20 मिमी टर्रेट (Turret) गन, 70 मिमी रॉकेट तथा टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइलों से लैस है।
- इसे निकटवर्ती वायु सहायता (CAS) और उच्च-ऊँचाई वाले युद्ध अभियानों के लिये डिज़ाइन किया गया है।
- युद्ध भूमिकाओं में लैंगिक समानता: यह उपलब्धि वर्ष 2021 में महिलाओं को आर्मी एविएशन कोर में पायलट के रूप में शामिल करने के निर्णय के बाद संभव हुई। इससे पहले महिलाएँ प्रायः स्थानीय ज़िम्मेदारियों या गैर-युद्धक उड़ानों तक सीमित थीं।
- एविएशन कोर का आधुनिकीकरण: कैप्टन शर्मा जैसे प्रशिक्षित पायलटों को रुद्र बेड़े में शामिल करने से सेना की आकाशीय ‘आँखों और कानों’ की संचालन क्षमता और मज़बूत होती है।
- स्वदेशी शक्ति का प्रतीक: रुद्र का संचालन रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत पहल के साथ मानव कौशल के समन्वय को प्रदर्शित करता है।

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