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केरल बना शहरी नीति बनाने वाला भारत का पहला राज्य
चर्चा में क्यों?
केरल देश का पहला राज्य बन गया है जिसने दीर्घकालिक विकास को दिशा देने और तीव्र शहरीकरण का प्रभावी प्रबंधन करने के उद्देश्य से एक व्यापक शहरी नीति तैयार की है।
मुख्य बिंदु:
- विज़न 2050: यह नीति वर्ष 2050 तक राज्य को जलवायु-स्मार्ट शहरों और कस्बों के एक सतत नेटवर्क के रूप में देखने की परिकल्पना करती है, जिसमें वैज्ञानिक योजना तथा सतत शासन पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
- स्वीकृति: स्थानीय स्वशासन विभाग द्वारा लगभग दो वर्षों की तैयारी के बाद, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में केरल मंत्रिमंडल ने इस मसौदा नीति को स्वीकृति दी।
- इस पहल की पहली घोषणा वर्ष 2023-24 के राज्य बजट में की गई थी और रोडमैप तैयार करने के लिये राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों से युक्त केरल शहरी नीति आयोग का गठन किया गया।
- परामर्श: आयोग ने मार्च 2025 में नव केरल शहरी नीति रिपोर्ट प्रस्तुत की और कोच्चि में आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन से प्राप्त सुझावों को नीति में शामिल किया गया।
- आयोग के आकलन के अनुसार, वर्ष 2050 तक केरल की शहरी जनसंख्या लगभग 80% तक पहुँचने की संभावना है, जिसके लिये सक्रिय और समावेशी शहरी शासन की आवश्यकता होगी।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र: इस नीति में कानूनों और संस्थागत प्रणालियों में सुधार, क्षमता निर्माण, अवसंरचना विकास, जन-केंद्रित सेवाएँ तथा स्थानिक योजना जैसे प्रमुख विषयगत क्षेत्रों को रेखांकित किया गया है।
- इसका उद्देश्य शहरीकरण के लाभों का उपयोग करते हुए असमानताओं को कम करना, सामाजिक समर्थन प्रणालियों को सुदृढ़ करना तथा शहरी क्षेत्रों में अवसंरचना की गुणवत्ता में सुधार करना है।
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और पढ़ें: शहरीकरण, स्थानीय स्वशासन, जलवायु-स्मार्ट शहर |
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सरकार ने शिक्षा में AI को जोड़ने के लिये बोधन AI लॉन्च किया
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने पूर्व-प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी स्तरों पर शिक्षा प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरणों को एकीकृत करने की घोषणा की है।
मुख्य बिंदु:
- बोधन AI: IIT मद्रास में स्थित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन AI फॉर एजुकेशन' में 'बोधन एआई' (Bodhan AI) नामक एक गैर-लाभकारी कंपनी शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र के लिये बुनियादी AI तकनीकें विकसित करना है
- बोधन AI, भारत EduAI स्टैक को एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के रूप में विकसित करेगा जो अवधारणा में UPI के समान है ताकि शिक्षा के लिये बड़े पैमाने पर, परस्पर-संगत AI सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।
- उद्देश्य: यह केंद्र पूरे देश में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में AI उपकरणों को शामिल करने की योजना बना रहा है, जिससे शिक्षा अधिक अनुकूल, प्रभावी और सुलभ बन सके।
- मुख्य क्षेत्र: इस पहल में भारतीय भाषाओं में AI क्षमताओं के अनुसंधान एवं विकास को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें स्वचालित वाक् पहचान (Automatic Speech Recognition), वाक् संश्लेषण (Speech Synthesis) और बहुभाषी भाषा मॉडल शामिल हैं।
- मुख्य ज़ोर ऐसे बहुभाषी AI सिस्टम पर होगा जो विभिन्न भारतीय भाषाओं को समझने और उनमें संवाद करने में सक्षम हों, ताकि छात्रों को उनकी मातृभाषा में प्रतिक्रिया तथा सहयोग मिल सके।
- अनुप्रयोग: AI उपकरणों से व्यक्तिगत छात्र-अधिगम को बढ़ावा मिलने, शिक्षकों को हस्तक्षेप रणनीतियों में सहायता मिलने तथा प्रशासकों को ज़िला और विद्यालय स्तर पर शैक्षिक परिणामों के मूल्यांकन में सहायता मिलने की अपेक्षा है।
- डेटा गोपनीयता और नैतिकता: इस पहल से जुड़े विशेषज्ञों ने छात्र डेटा की सुरक्षा, व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक मंचों पर संग्रहीत न करने तथा AI के उपयोग और उत्तरदायित्वपूर्ण स्क्रीन उपयोग के मध्य संतुलन पर भी बल दिया है।
- नीतिगत ढाँचा: AI उपकरणों का विकास एवं कार्यान्वयन 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020' के अनुरूप होगा, जिसमें NCERT और SCERT के शैक्षिक ढाँचों को AI इकोसिस्टम में शामिल किया जाएगा।
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और पढ़ें: AI, इंडियाAI स्टैक, बोधन AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) |

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