उत्तराखंड Switch to English
उत्तराखंड छोटे राज्यों में नीति आयोग के एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स में पहले स्थान पर
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड ने नीति आयोग द्वारा जारी एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स (EPI) 2024 में छोटे राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया है।
मुख्य बिंदु:
- रणनीतिक पहल: उत्तराखंड ने यह स्थिति निर्यात एवं लॉजिस्टिक्स नीति जैसी नई पहलों को लागू करके और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत प्रत्येक ज़िले से दो उत्पादों को प्रचारित करने के चयन के माध्यम से हासिल की।
- शीर्ष छोटे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश: उत्तराखंड के बाद जम्मू-कश्मीर और नागालैंड शीर्ष रैंक वाले क्षेत्र हैं, इसके बाद दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव तथा गोवा आते हैं।
- शीर्ष बड़े राज्य: महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात निर्यात तैयारी के मामले में अग्रणी बड़े राज्य हैं।
- महत्त्व: EPI राज्यों में निर्यात तंत्र की ताकत और कमियों की पहचान करने में सहायता करता है, जिससे नीति निर्धारक लक्षित रणनीतियाँ तैयार कर सकते हैं, निर्यात बढ़ा सकते हैं, वैश्विक समाकलन को बढ़ावा दे सकते हैं तथा आर्थिक विकास को तेज़ कर सकते हैं।
- EPI: एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स (EPI) एक व्यापक मूल्यांकन उपकरण है, जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके निर्यात तैयारियों के आधार पर विभिन्न स्तंभों जैसे कि निर्यात नीतियाँ, व्यावसायिक वातावरण, निर्यात तंत्र, अवसंरचना और निर्यात परिणामों में मापता है।
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
विशाखापत्तनम में भारतीय प्रकाशस्तंभ महोत्सव का उद्घाटन
चर्चा में क्यों?
तीसरा भारतीय प्रकाशस्तंभ महोत्सव 9 जनवरी, 2026 को विशाखापत्तनम में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा उद्घाटित किया गया।
मुख्य बिंदु:
- पर्यटन प्रोत्साहन: यह महोत्सव ऐतिहासिक प्रकाशस्तंभ को जीवंत पर्यटन केंद्रों में बदलने का लक्ष्य रखता है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिले।
- नई परियोजनाएँ: विशाखापत्तनम में आंध्र प्रदेश का पहला प्रकाशस्तंभ म्यूज़ियम और असम के नदी क्षेत्र में चार नए प्रकाशस्तंभ बनाने की योजनाएँ प्रस्तुत की गईं।
- MGM पार्क: कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी शामिल थीं, जो ‘सिटी ऑफ डेस्टिनी’ की समुद्री विरासत को उजागर करती हैं।
- मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030: यह महोत्सव मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और पर्यटन-आधारित तटीय विकास के लिये सरकार की रणनीति के अनुरूप है।
- सागरमाला कार्यक्रम: प्रकाशस्तंभ का कायाकल्प, बंदरगाह-आधारित विकास और तटीय समुदाय के सशक्तीकरण का एक उप-घटक है।
- महत्त्व: यह प्रकाशस्तंभ पर्यटन की अवधारणा को एक अद्वितीय क्षेत्रीय पर्यटन विकल्प के रूप में मज़बूत करता है, जिससे स्थानीय आजीविका, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत की विस्तृत तटीय रेखा के आसपास सतत पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
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और पढ़ें: सागरमाला कार्यक्रम, मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030, प्रकाशस्तंभ म्यूज़ियम |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
नमामि गंगे के तहत जलीय जैव विविधता पहल शुरू की
चर्चा में क्यों?
14 जनवरी, 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने नमामि गंगे के अंतर्गत जल जैव विविधता संरक्षण परियोजनाओं की एक शृंखला का उद्घाटन भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून में किया।
मुख्य बिंदु:
- नया केंद्र: गंगा और अन्य नदियों के लिये एक्वा लाइफ कंज़र्वेशन मॉनिटरिंग सेंटर नामक एक समर्पित राष्ट्रीय केंद्र स्थापित किया गया है, जो स्वच्छ जल की जैव विविधता के वैज्ञानिक मॉनिटरिंग, अनुसंधान और नीतिगत मार्गदर्शन को समर्थन देगा।
- नई सुविधाएँ: केंद्र में इकोटॉक्सिकोलॉजी, एक्वाटिक इकोलॉजी, स्पैशियल इकोलॉजी और माइक्रोप्लास्टिक विश्लेषण के लिये उन्नत प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।
- डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस: TSAFI द्वारा संचालित विशेष रूप से सुसज्जित डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस शुरू की गई, जो संकटग्रस्त गंगा डॉल्फिन के लिये तीव्र और वैज्ञानिक आपातकालीन सहायता प्रदान करेगी।
- इंडियन स्किमर संरक्षण परियोजना: बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के सहयोग से इस दुर्लभ पक्षी प्रजाति इंडियन स्किमर के लिये एक संरचित संरक्षण योजना औपचारिक रूप से शुरू की गई, जो गंगा बेसिन में इसके आवास संरक्षण पर केंद्रित है।
- प्रजाति संरक्षण: गंगा डॉल्फिन और हिल्सा मछली के लिये नई संरक्षण योजनाएँ शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य इनके प्राकृतिक आवास का पुनर्स्थापन है।
- जैवविविधता: गंगा बेसिन में 2,500 से अधिक जीव और वनस्पति प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- नमामि गंगे चरण II: अब ध्यान केवल ‘अविरल’ (निरंतर प्रवाह) और ‘निर्मल’ (स्वच्छ प्रवाह) से आगे बढ़कर ज्ञान गंगा (अनुसंधान) तथा अर्थ गंगा (आर्थिक स्थिरता) पर भी केंद्रित है।
- महत्त्व: यह केंद्र दीर्घकालिक प्रजाति निगरानी, स्वच्छ जल की पारिस्थितिकी पर अनुसंधान, नीतिगत समर्थन तथा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित निर्णय-निर्माण के लिये एक प्रमुख वैज्ञानिक हब के रूप में कार्य करेगा।
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और पढ़ें: नमामि गंगे, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, गंगा डॉल्फिन, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) |
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