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उत्तर प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 14 Jan 2026
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उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026

चर्चा में क्यों?

उत्तर प्रदेश ने हाल ही में लखनऊ में क्षेत्रीय AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 तथा आर्थिक वृद्धि और सामाजिक कल्याण हेतु AI कार्यकारी समूह की चौथी बैठक की मेज़बानी की।

मुख्य बिंदु:

  • मेज़बान: उत्तर प्रदेश सरकार ने इंडिया AI के सहयोग से और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समर्थन से इस आयोजन की मेज़बानी की।
  • UP AI मिशन: सम्मेलन में औपचारिक रूप से UP AI मिशन की घोषणा की गई।
    • निवेश: राज्य में AI लैब्स, डेटा सेंटर और शोध हब स्थापित करने के लिये तीन वर्षों में लगभग ₹2,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
  • फोकस: इसका प्रमुख एजेंडा स्वास्थ्य क्षेत्र में AI अपनाने पर है। 
    • प्रारंभिक रोग निदान, डेटा-आधारित नीति निर्णय और बेहतर रोगी देखभाल को लक्षित करते हुए, उत्तर प्रदेश को AI-सक्षम स्वास्थ्य देखभाल समाधानों के लिये एक पायलट राज्य के रूप में स्थापित करना।
  • AI इंफ्रास्ट्रक्चर: इस मिशन में 62 AI और डेटा लैब्स का निर्माण, अकादमी एवं उद्योग के साथ सहयोग तथा AI नवाचार और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना शामिल है।
  • महत्त्व: यह पहल सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, डिजिटल शासन को सुदृढ़ करने और समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को भारत में AI अपनाने के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।

और पढ़ें: AI इम्पैक्ट समिट, इंडियाAI, AI


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

अरलम तितली अभयारण्य

चर्चा में क्यों?

केरल सरकार ने कन्नूर ज़िले के अरलम वन्यजीव अभयारण्य का आधिकारिक रूप से नाम बदलकर अरलम तितली अभयारण्य कर दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • सूचना: इस नाम परिवर्तन की आधिकारिक सूचना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत जारी की गई।
  • कारण: क्षेत्र में तितली प्रजातियों की समृद्ध विविधता और संख्या के कारण तथा उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा एवं संवर्द्धन की आवश्यकता के चलते।
    • तितली विविधता: अरलम में लगभग 266 तितली प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो केरल की कुल तितली विविधता का 80% से अधिक हैं।
    • स्थानीय प्रजातियाँ: अरलम में 27 प्रजातियाँ केवल पश्चिमी घाटों में ही पाई जाती हैं।
  • WP अधिनियम के तहत सुरक्षा: अरालम में दर्ज 6 तितली प्रजातियाँ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध हैं।
  • ऐतिहासिक स्थिति: अरलम क्षेत्र को मूल रूप से वर्ष 1984 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
  • वैश्विक महत्त्व: यह अभयारण्य पश्चिमी घाटों का हिस्सा होने के नाते वैश्विक पारिस्थितिक महत्त्व  रखता है, जिसे UNESCO ने विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है।
  • सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव: नाम परिवर्तन से जैव विविधता संरक्षण को मज़बूत करने, पर्यावरणीय शिक्षा, इकोटूरिज़्म को बढ़ावा देने और तितलियों की संख्या की सुरक्षा में समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।

और पढ़ें: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, IUCN रेड लिस्ट, UNESCO


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