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उत्तर प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 01 Jan 2026
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मिर्ज़ापुर में पूर्वांचल का पहला यार्न प्रोसेसिंग प्लांट

चर्चा  में क्यों?

पूर्वांचल का पहला यार्न प्रोसेसिंग प्लांट उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर ज़िले में स्थापित किया जाएगा।

मुख्य बिंदु 

  • उद्देश्य: इस संयंत्र का प्रमुख उद्देश्य कालीन उद्योग को स्थानीय स्तर पर संसाधित धागे की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जिससे अन्य राज्यों पर निर्भरता में कमी आएगी।
  • आर्थिक महत्त्व: मिर्ज़ापुर–भदोही क्षेत्र हस्तनिर्मित कालीनों के उत्पादन एवं निर्यात का एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र है, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
  • निवेश मॉडल: यह परियोजना सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के अंतर्गत विकसित की जा रही है।
  • निवेश: संयंत्र के लिये लगभग 8 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश का प्रस्ताव किया गया है।
  • कारीगरों को लाभ: इस परियोजना से स्थानीय बुनकरों और कालीन निर्माताओं को कच्चे माल की लागत में कमी, गुणवत्ता युक्त धागे की समयबद्ध उपलब्धता तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।
  • समय-सीमा: संयंत्र को अप्रैल 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • नीतिगत समर्थन: राज्य सरकार उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान नीति, 2022 जैसी नीतिगत पहलों के माध्यम से वस्त्र और कालीन क्षेत्र को सुदृढ़ करने हेतु सक्रिय प्रयास कर रही है।
  • क्षेत्रीय विशिष्टता: मिर्ज़ापुर संयंत्र विशेष रूप से पूर्वांचल क्षेत्र के कालीन और ऊन उद्योगों के लिये समर्पित पहला यार्न प्रोसेसिंग प्लांट है।

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पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'अंजदीप'

चर्चा  में क्यों?

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित तीसरा पनडुब्बी-रोधी शैलो वाटर युद्धपोत (ASW–SWC) ‘अंजदीप’ को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

मुख्य बिंदु 

  • अंजदीप के बारे में: 
    • इस पोत को चेन्नई स्थित INS अड्यार में भारतीय नौसेना को सुपुर्द किया गया। 
    • इसका डिज़ाइन और निर्माण स्वदेशी रूप से गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा एल एंड टी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली के सहयोग से किया गया है।
  • तकनीकी क्षमताएँ
    • यह युद्धपोत हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट प्रणाली तथा शैलो वाटर के लिये उपयुक्त सोनार सिस्टम से सुसज्जित है। 
    • इसे विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन तथा पानी के नीचे मौजूद खतरों का प्रभावी पता लगाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
  • प्रणोदन प्रणाली
    • लगभग 77 मीटर लंबाई वाला यह पोत वाटरजेट प्रणोदन प्रणाली से संचालित होने वाले सबसे बड़े भारतीय नौसैनिक युद्धपोतों में शामिल है।
  • सामरिक महत्त्व
    • यह पोत तटीय निगरानी और समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करता है। इससे तटीय क्षेत्र में भारत की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को मज़बूती मिलती है।
  • स्वदेशीकरण का पक्ष
    • यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता में हो रही निरंतर वृद्धि और स्वदेशी प्रौद्योगिकी के सफल उपयोग को प्रतिबिंबित करती है।

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भारत में पहली 3D फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी

चर्चा में क्यों?

भारतीय सेना अस्पताल, दिल्ली कैंट द्वारा iStent के साथ भारत की पहली 3D फ्लेक्स एक्वियस एंजियोग्राफी का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया है, जो ग्लूकोमा के निदान और उपचार के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है।

मुख्य बिंदु

  • प्रयुक्त प्रौद्योगिकी
    • यह प्रक्रिया स्टैंड-माउंटेड स्पेक्ट्रालिस प्रणाली तथा 3D ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप का उपयोग करते हुए सम्पन्न की गई, जिससे सटीक इमेजिंग और न्यूनतम इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी संभव हो सकी।
  • iStent डिवाइस
    • यह ग्लूकोमा रोगियों में आँख के जलीय द्रव के बहिर्वाह को सुगम बनाने तथा अंतःनेत्र दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रत्यारोपित किया जाने वाला एक सूक्ष्म चिकित्सकीय उपकरण है।
  • महत्त्व
    • इस उन्नत तकनीक से नेत्र शल्य चिकित्सा में सटीकता, सुरक्षा और उपचार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है।
  • ग्लूकोमा
    • यह नेत्र विकारों का एक समूह है, जिसमें अत्यधिक अंतःनेत्र दबाव के कारण ऑप्टिक तंत्रिका को क्षति पहुँचती है और समय पर उपचार न होने पर दृष्टि हानि का जोखिम बढ़ जाता है।

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