बिहार Switch to English
बिहार में क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण कार्यशाला
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने भारत के पूर्वी राज्यों के लिये बिहार के पटना में उपभोक्ता संरक्षण पर एक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
मुख्य बिंदु:
- पटना क्षेत्रीय केंद्र के रूप में: बिहार के पटना में आयोजित इस कार्यशाला में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के उपभोक्ता संरक्षण मामलों पर चर्चा की गई तथा बिहार की क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण सुधारों में उभरती भूमिका को रेखांकित किया गया।
- कार्यशाला का उद्देश्य: कार्यशाला का मुख्य फोकस उपभोक्ता मामलों का त्वरित निपटान, आयोग के आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन और प्रौद्योगिकी-संचालित शिकायत निवारण को अपनाने पर था।
- आयोजक: इसका आयोजन उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा किया गया है।
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन:
- शिकायत दर्ज करने के लिये टोल-फ्री नंबर 1915 और ऑनलाइन पोर्टल।
- बहुभाषी समर्थन ताकि अधिक लोगों को पहुँच सुनिश्चित हो सके।
- डिजिटल ट्रैकिंग, त्वरित प्रतिक्रिया और विश्लेषण आधारित निगरानी सक्षम करना।
- ई-जागृति: ई-जागृति में ई-दाखिल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, रियल-टाइम डैशबोर्ड और AI टूल्स शामिल हैं, जो मामला प्रबंधन को सरल तथा प्रक्रियागत विलंब को कम करने में सहायता करते हैं।
- डिजिटल बाज़ारों में संरक्षण: कार्यशाला में डार्क पैटर्न और भ्रामक ऑनलाइन प्रथाओं की चुनौतियों पर चर्चा की गई तथा ई-कॉमर्स में मज़बूत उपभोक्ता सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
- परिणाम: कार्यशाला पूर्वी भारत के लिये पारदर्शी, प्रभावी और प्रौद्योगिकी-सक्षम उपभोक्ता संरक्षण ढाँचे के निर्माण पर सहमति के साथ समाप्त हुई।
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और पढ़ें: ई-दाखिल, डार्क पैटर्न, AI, ई-कॉमर्स, उपभोक्ता संरक्षण |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
अरलम तितली अभयारण्य
चर्चा में क्यों?
केरल सरकार ने कन्नूर ज़िले के अरलम वन्यजीव अभयारण्य का आधिकारिक रूप से नाम बदलकर अरलम तितली अभयारण्य कर दिया है।
मुख्य बिंदु:
- सूचना: इस नाम परिवर्तन की आधिकारिक सूचना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत जारी की गई।
- कारण: क्षेत्र में तितली प्रजातियों की समृद्ध विविधता और संख्या के कारण तथा उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा एवं संवर्द्धन की आवश्यकता के चलते।
- तितली विविधता: अरलम में लगभग 266 तितली प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो केरल की कुल तितली विविधता का 80% से अधिक हैं।
- स्थानीय प्रजातियाँ: अरलम में 27 प्रजातियाँ केवल पश्चिमी घाटों में ही पाई जाती हैं।
- WP अधिनियम के तहत सुरक्षा: अरालम में दर्ज 6 तितली प्रजातियाँ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध हैं।
- ऐतिहासिक स्थिति: अरलम क्षेत्र को मूल रूप से वर्ष 1984 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
- वैश्विक महत्त्व: यह अभयारण्य पश्चिमी घाटों का हिस्सा होने के नाते वैश्विक पारिस्थितिक महत्त्व रखता है, जिसे UNESCO ने विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है।
- सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव: नाम परिवर्तन से जैव विविधता संरक्षण को मज़बूत करने, पर्यावरणीय शिक्षा, इकोटूरिज़्म को बढ़ावा देने और तितलियों की संख्या की सुरक्षा में समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।
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और पढ़ें: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, IUCN रेड लिस्ट, UNESCO |
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