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स्टेट पी.सी.एस.

  • 30 Sep 2022
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उत्तर प्रदेश Switch to English

उत्तर प्रदेश में एमएसएमई नीति-2022 लागू

चर्चा में क्यों?

29 सितंबर, 2022 को उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) विभाग ने एमएसएमई नीति-2022 को लागू करने संबंधी शासनादेश जारी कर दिया। यह नीति सितंबर 2027 तक प्रभावी रहेगी।

प्रमुख बिंदु 

  • एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग में निवेश करने वाले उद्यमियों को दो करोड़ रुपए तक के कोलेटरल फ्री ऋण (यानी बिना गिरवी के ऋण) पर बैंकों की ओर से ली जाने वाली वन टाइम गारंटी फीस राज्य सरकार वहन करेगी।
  • नए सूक्ष्म उद्योग के लिये ऋण पर देय वार्षिक ब्याज का 50 प्रतिशत (अधिकतम 25 लाख रुपए) प्रति इकाई पाँच वर्षों के लिये दिया जाएगा।
  • उद्यमियों को पूंजीगत निवेश पर 10 से 25 फीसदी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को ऋण के ब्याज पर 60 फीसदी तक सब्सिडी दी जाएगी।
  • बुंदेलखंड व पूर्वांचल क्षेत्रों में क्रमश: 25, 20 और 15 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। मध्यांचल एवं पश्चिमांचल में क्रमश: 20, 15 और 10 प्रतिशत होगी। अनुसूचित जाति, जनजाति व महिला उद्यमियों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त निवेश प्रोत्साहन सहायता प्रदान की जाएगी।
  • निवेश प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा 4 करोड़ रुपए प्रति इकाई होगी। पाँच करोड़ रुपए और इससे अधिक की मशीनरी एवं संयंत्र वाली सभी नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को कच्चे माल की खरीद पर पाँच वर्ष के लिये मंडी शुल्क से छूट की व्यवस्था मंडी अधिनियम के अनुसार प्रदान की जाएगी। विभाग के औद्योगिक आस्थानों में भूखंडों और शेडों के आवंटन की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा।
  • सूक्ष्म इकाइयों के पात्र निवेश के लिये आवेदन अवधि दो वर्ष, लघु उद्योग के लिये तीन वर्ष और मध्यम उद्योग के लिये चार वर्ष होगी। 
  • प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों को अधिक-से-अधिक स्रोतों से क्रेडिट उपलब्ध कराने के लिये स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग पर खर्च के 20 प्रतिशत (अधिकतम 5 लाख रुपए) की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
  • तंबाकू उत्पादन, गुटखा, पान मसाला, अल्कोहल, वातयुक्त पेय पदार्थ, कार्बोनेटेड उत्पाद, पटाखों का विनिर्माण, प्लास्टिक कैरीबैग (40 माइक्रॉन से कम), राज्य सरकार की ओर से समय-समय पर प्रतिबंधित श्रेणी में वर्गीकृत मोटाई के प्लास्टिक बैग और समय-समय पर प्रतिबंधित श्रेणी सूची में श्रेणीकृत उत्पादों के निवेश प्रस्तावों पर यह नीति लागू नहीं होगी।

उत्तर प्रदेश Switch to English

उत्तर प्रदेश के चार और शहरों में मेट्रो चलाने की तैयारी

चर्चा में क्यों?

हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य के चार और शहरों में मेट्रो चलाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिये नए सिरे से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिये गए।

प्रमुख बिंदु

  • उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य के मेरठ, बरेली, झाँसी व प्रयागराज में मेट्रो चलाने के लिये उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को प्री फिजिविलिटी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इन शहरों में लाइट अथवा नियो मेट्रो चलाई जाएंगी।
  • बनारस में मेट्रो की जगह रोप-वे की तैयारी है। यहाँ पर रोपवे का नए सिरे से टेंडर होगा। इसके अलावा गोरखपुर में लाइट मेट्रो परियोजना की मंज़ूरी के लिये केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
  • एनसीआर के साथ लखनऊ, कानपुर, आगरा के बाद अब राज्य के चार और बड़े शहरों में मेट्रो के निर्माण की तैयारी और तेज हो गई है। बरेली, झाँसी, प्रयागराज के लिये पूर्व में स्थानीय स्तर पर खुद ही डीपीआर तैयार कराई गई थी, लेकिन अब यह उपयोगी नहीं है।
  • मेरठ, बरेली, झाँसी व प्रयागराज शहरों में मेट्रो की जगह लाइट अथवा नियो मेट्रो की संभावना तलाशी जा रही है। इसलिये शासन ने यहाँ नए सिरे से फिजिविलिटी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इसी के साथ-साथ डीपीआर भी तैयार कराई जाएगी। इसमें मेरठ को भी शामिल किया गया है।          

बिहार Switch to English

बिहार इन्वेस्टर्स मीट-2022

चर्चा में क्यों?

29 सितंबर, 2022 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सचिवालय में बिहार इन्वेस्टर्स मीट-2022 (Bihar Investors Meet-2022) का उद्घाटन किया। बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद पहली बार इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया है।

प्रमुख बिंदु 

  • उद्योग विभाग की ओर से मुख्यमंत्री सचिवालय में हो रहे इस आयोजन में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और उद्योग मंत्री समीर कुमार समेत कई उद्योगपति शामिल रहे।
  • इस आयोजन में उद्योगों में निवेश के लिये सरकार की ओर से की जा रही पहल की जानकारी उद्योगपतियों को दी गई।
  • कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये सभी सुविधाएँ दी जाएंगी। बिहार में आधारभूत संरचनाओं को ठीक किया गया है। सभी चीजों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जा रही है। उद्योगों की स्थापना में आने वाली समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाएगा।
  • गौरतलब है कि इसके पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार में उद्योग मंत्री के रूप में शाहनवाज हुसैन ने हैदराबाद व दिल्ली में इन्वेस्टर्स मीट के आयोजन किये थे। कुछ महीने पहले दिल्ली के होटल ताज मानसिंह में आयोजित बिहार इन्वेस्टर्स मीट में 30 बड़ी कंपनियों सहित देशभर की 170 कंपनियाँ शामिल हुईं थीं। अन्य राज्यों में भी ऐसे आयोजन करने का फैसला किया गया था।
  • उल्लेखनीय है कि बिहार तेजी से इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। देश-विदेश के उद्योगपति यहाँ निवेश की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। बिहार सरकार नीतिगत सुधारों के साथ निवेश करने वालों को आकर्षक इन्सेंटिव्स भी दे रही है।  

राजस्थान Switch to English

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के ऑनलाइन पोर्टल का उद्घाटन

चर्चा में क्यों?

29 सितंबर, 2022 को राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के ऑनलाइन पोर्टल का उद्घाटन किया।

प्रमुख बिंदु

  • टीकाराम जूली ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति मोबाइल एप्लीकेशन तथा मुख्यमंत्री अनुप्रती कोचिंग योजना, पालनहार योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के ऑनलाइन पोर्टल के नवीन स्वरूप का उद्घाटन किया और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किये।
  • जूली की अध्यक्षता में पालनहार योजना एवं अन्य विभागीय योजनाओं के सुदृढ़ीकरण व प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एकदिवसीय आमुखीकरण व प्रशिक्षण कार्यक्रम जयपुर स्थित हरीश चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान में आयोजित किया गया।
  • यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री ने कहा कि आज सूचना तकनीक का युग है और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता आएगी तथा कार्य में प्रगति होगी।
  • उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन मे ज़िलाधिकारियों को आ रही समस्याओं का समाधान करना है।
  • शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने कहा कि विभाग की अधिकारियों और कर्मचारियों की अटेंडेंस मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करने, भ्रष्टाचार करने और अनुशासनहीनता के मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति है।
  • कार्यशाला मे पालनहार योजना के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन, उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति, छात्रावास, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, सिलिकोसिस योजना, लंबित ऑडिट पैरा के निस्तारण, आवासीय विद्यालय, विद्या संबल योजना, कोर्ट प्रकरणों एवं अवमानना प्रकरण तथा ज़िला स्तर पर लंबित बजट घोषणाओं की समीक्षा की गई और ज़िलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गए।

मध्य प्रदेश Switch to English

मुख्यमंत्री ने किया ‘मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना’ का शुभारंभ

चर्चा में क्यों?

29 सितंबर, 2022 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर ज़िले के बुधनी विकासखंड की ग्राम पंचायत तालपुरा में मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान के शिविर में ‘मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना’का शुभारंभ किया।

प्रमुख बिंदु 

  • उल्लेखनीय है कि डेयरी व्यवसाय से प्रदेश के किसानों की आय में वृद्धि करने और वे पशुपालन कर अधिक-से-अधिक आय अर्जित कर सकें, इसके लिये मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का शुभारंभ किया गया है। पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर योजना प्रदेश के तीन ज़िलों-सीहोर, विदिशा और रायसेन में शुरू की गई है।
  • पहले से ही पशुपालन का कार्य कर रहे पशुपालकों को मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना में दो मुर्रा भैंसे उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता 10 लीटर प्रतिदिन की होती है। मुर्रा भैंसों की लागत दो लाख 50 हज़ार रुपए होगी।
  • योजना में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के पशुपालकों को राज्य सरकार द्वारा 75 प्रतिशत अनुदान एवं पिछड़ा वर्ग और सामान्य श्रेणी के पशुपालकों को 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा।
  • इस प्रकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के पशुपालकों को अंशदान के रूप में 62 हज़ार 500 रुपए तथा पिछड़ा वर्ग और सामान्य श्रेणी वालों को एक लाख 50 हज़ार रुपए जमा करने होंगे। इसमें पशुपालकों के आने-जाने का व्यय एवं बीमा आदि की राशि भी शामिल है।

मध्य प्रदेश Switch to English

किसान क्रेडिट कार्ड होंगे डिजिटल

चर्चा में क्यों?

29 सितंबर, 2022 को मध्य प्रदेश के राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि राजस्व विभाग की सहायता से किसानों को ऋण प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए किसान क्रेडिट कार्ड के एंड-टू-एंड कंप्यूटरीकरण की पद्धति लागू की गई है। पद्धति के कंप्यूटरीकरण से केसीसी ऋण देने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा, जो अधिक सुगम और किसानों के अनुकूल होगी।

प्रमुख बिंदु 

  • मंत्री गोविंद सिंह ने बताया कि हरदा ज़िले को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया था। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों और अनुभव के आधार पर इसे प्रदेश के अन्य ज़िलों में भी लागू किये जाने पर विचार किया जा रहा है।
  • उन्होंने बताया कि इस पद्धति के लागू होने से किसान को क्रेडिट कार्ड पर ऋण लेने के लिये बैंक शाखा में जाने एवं किसी प्रकार के दस्तावेज को जमा करने की ज़रूरत नहीं होगी।
  • आवेदन ऑनलाइन ऐप से किये जा सकेंगे। साथ ही, कृषि भूमि का सत्यापन भी ऑनलाइन हो जाता है। प्रकरण का अनुमोदन और संवितरण प्रक्रिया कुछ ही घंटों में पूरी होने से किसान त्वरित लोन प्राप्त कर सकते हैं।

हरियाणा Switch to English

गुरुग्राम और नूंह में स्थापित होगा विश्व का सबसे बड़ा सफारी पार्क

चर्चा में क्यों?

29 सितंबर, 2022 को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि राज्य के गुरुग्राम और नूंह ज़िलों की अरावली पर्वत श्रृंखला में पड़ने वाले लगभग 10 हज़ार एकड़ क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा सफारी पार्क स्थापित किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु

  • यह परियोजना दुनिया में इस तरह की सबसे बड़ी परियोजना होगी। वर्तमान में अफ्रीका के बाहर सबसे बड़ा क्यूरेटेड सफारी पार्क शारजाह में है, जो फरवरी 2022 में खोला गया था, जिसका क्षेत्रफल करीब दो हज़ार एकड़ है।
  • प्रस्तावित अरावली पार्क आकार का 5 गुना होगा और इसमें एक बड़ा हर्पेटेरियम, एवियरी/बर्ड पार्क, बिग कैट्स के चार ज़ोन, शाकाहारी जानवरों के लिये एक बड़ा क्षेत्र, विदेशी पशु-पक्षियों के लिये एक क्षेत्र, एक अंडरवाटर वर्ल्ड, नेचर ट्रेल्स/विजिटर/टूरिज्म ज़ोन, बॉटेनिकल गार्डन/बायोमेस, इक्वाटोरियल/ट्रॉपिकल/कोस्टल/डेजर्ट इत्यादि होंगे।
  • मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा-एनसीआर क्षेत्र में जंगल सफारी की अपार संभावनाएँ हैं। जंगल सफारी योजना के साकार होने के बाद एनसीआर में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिये रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।
  • हरियाणा की जंगल सफारी परियोजना पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार और हरियाणा सरकार की एक संयुक्त परियोजना होगी। एक योजना के तहत केंद्र सरकार भी हरियाणा को इस परियोजना के लिये फंड मुहैया कराएगी।
  • परियोजना के लिये एक अंतर्राष्ट्रीय ईओआई मंगाई गई थी और ऐसी सुविधाओं की डिज़ाइन व संचालन में अंतर्राष्ट्रीय अनुभव वाली दो कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। वे अब पार्क की डिज़ाइन, निर्माण की निगरानी और संचालन के लिये एक अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन प्रतियोगिता में भाग लेंगी। वहीं एक अरावली फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी, जो परियोजना का प्रबंधन करेगा।
  • सीएम ने कहा कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने इसके लिये क्षेत्र का मूल्यांकन अध्ययन किया और इस तरह के पार्क की स्थापना की तकनीकी व्यवहार्यता से सहमत हो गया है।
  • मुख्यमंत्री ने बताया कि जंगल सफारी विकसित होने से एक ओर जहाँ इस पर्वत श्रृंखला को संरक्षित करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों से यहाँ काफी संख्या में लोग पर्यटन के लिये आएंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिये रोज़गार के अवसर उपलब्ध होंगे। आसपास के गाँवों में ग्रामीणों को होम स्टे पॉलिसी के तहत लाभ होगा।
  • गौरतलब है कि अरावली पर्वत श्रृंखला एक सांस्कृतिक धरोहर है, जहाँ पर पक्षियों, वन्य प्राणियों, तितलियों आदि की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। कुछ वर्षों पहले करवाए गए सर्वे के अनुसार अरावली पर्वत श्रृंखला में पक्षियों की 180 प्रजातियाँ, मैमल्स, अर्थात् स्तनधारी वन्य जीवों की 15 प्रजातियाँ, रेप्टाइल्स अर्थात् ज़मीन पर रेंगने वाले और पानी में रहने वाले प्राणियों की 29 प्रजातियाँ तथा तितलियों की 57 प्रजातियाँ विद्यमान हैं।

हरियाणा Switch to English

हरियाणा राज्य में पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट एवं कोल्डचेन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना हेतु बर्मिंघम विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ

चर्चा में क्यों?

29 सितंबर,2022 को बर्मिंघम (यूके) में हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जे. पी. दलाल की उपस्थिति में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा सरकार की ओर से बर्मिंघम विश्वविद्यालय के साथ हरियाणा राज्य में पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट एवं कोल्डचेन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये।

प्रमुख बिंदु

  • ज्ञातव्य है कि कृषि मंत्री और अन्य अधिकारी 29 व 30 सितंबर को बर्मिंघम विश्वविद्यालय में चल रही कोल्ड चेन समिट में भाग लेने बर्मिंघम गए हैं तथा हरियाणा में स्थापित होने वाले उत्कृष्टता केंद्र से जुड़े वहाँ के संस्थानों का दौरा भी करेंगे।
  • मंत्री जय प्रकाश दलाल ने कहा कि यह उत्कृष्टता केंद्र फसल तुड़ाई उपरांत होने वाले नुकसान को कम करने, किसानों व अन्य हितधारकों का ज्ञानवर्धन करने, पर्यावरण व किसानों के अनुकूल तकनीकों के इस्तेमाल तथा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इसके फलस्वरूप राज्य में बागवानी की ओर विविधीकरण में बहुत ज़्यादा वृद्धि होगी।
  • कोल्डचेन समिट में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि हरियाणा ने वर्तमान में कुल फसली क्षेत्र का लगभग 7 प्रतिशत क्षेत्र बागवानी फसलों के अंतर्गत है। राज्य में 393 बागवानी क्लस्टर, 13 एकीकृत पैकहाउस बनाए जा चुके हैं व 50 अन्य पैक हाउस निर्माणाधीन हैं। आने वाले पाँच सालों में 500 और एकीकृत पैक हाउस स्थापित किये जाएंगे।
  • उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य ताजा फलों एवं सब्जियों की व्यवस्थित सप्लाई चेन व किसानों को सीधा कृषि बाज़ार से जोड़ने में एक अग्राणी राज्य होगा। राज्य में अब तक कृषि क्षेत्र की कंपनियों के साथ विभिन्न किसान समूह संगठनों द्वारा 59 समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं।
  • उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन को मज़बूत करने के लिये एकीकृत पैकहाउस स्थापित करने, प्री-शिपमेंट ट्रीटमेंट सुविधाएँ, जैसे- ई-रेडिऐशन, वाष्प हीट ट्रीटमेंट (वी.एच.टी), हॉट वाटर डिप ट्रीटमेंट (एच.डब्ल्यू.डी.टी) आदि सृजित करने की आवश्यकता है।
  • डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्वच्छ हरित ऊर्जा तथा कोल्ड चेन सिस्टम को बढ़ावा देने के लिये एक अनुकूल प्रणाली विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने की बात की, ताकि फसलों की तुड़ाई से लेकर खुदरा ब्रिकी तक होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
  • उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर किसानों के हित में कल्याणकारी योजनाएँ चला रही है। हरियाणा ने एक नई पहल शुरू करते हुए बागवानी किसानों को जोखिममुक्त करने के लिये भी मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना चलाई है।
  • इसके अलावा, राज्य सरकार निरंतर बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिये फसल विविधीकरण को अपनाने हेतु किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। 

छत्तीसगढ़ Switch to English

छत्तीसगढ़ भू-जल (प्रबंधक और विनिमयन) विधेयक, 2022

चर्चा में क्यों?

29 सितंबर, 2022 को छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके ने छत्तीसगढ़ भू-जल (प्रबंधक और विनिमयन) विधेयक, 2022 पर हस्ताक्षर किये। यह विधेयक छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा 25 जुलाई, 2022 को पारित किया गया था।

प्रमुख बिंदु 

  • उल्लेखनीय है कि राज्य में विशेषरूप से संकटग्रस्त ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में, परिमाणात्मक एवं गुणात्मक, दोनों रूप में, भूजल का प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु भू-जल की सुरक्षा, संरक्षा, नियंत्रण आदि विषयों के संबंध में ये विधेयक पारित किया गया है।
  • इस विधेयक में राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य भू-जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण गठित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा इस प्राधिकरण में 16 सदस्य भी होंगे। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य में भू-जल प्रबंधन का दीर्घकालिक कार्य करने का अनुभव रखने वाले तीन विषय-विशेषज्ञों एवं सार्वजनिक/गैर-सरकारी संगठन/सामाजिक क्षेत्र के एक प्रख्यात व्यक्ति को भी सदस्य के रूप में नामित करने का प्रावधान किया गया है।
  • गैर-अधिसूचित/अधिसूचित क्षेत्रों में औद्योगिक/वाणिज्यिक/खनन के लिये भू-जल निष्कर्षण हेतु अनुमति देने का कार्य यह प्राधिकरण करेगा।
  • ज़िला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में भू-जल प्रबंधन परिषद गठित करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, कलेक्टर ज़िला भू-जल शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में भी कार्य करेगा। इसके अलावा विकासखंड स्तर पर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित विकासखंड में भू-जल उपयोगकर्त्ता पंजीकरण समिति गठित करने का भी प्रावधान किया गया है।
  • विधेयक के तहत समुचित निकाय में रजिस्ट्रीकरण के बिना भू-जल निकालना अपराध होगा। इस विधेयक में बनाए गए नियमों का उल्लंघन करने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।

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