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विश्व आर्थिक मंच ने ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026 जारी की

  • 16 Jan 2026
  • 19 min read

चर्चा में क्यों?

विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026 जारी की है, जो वैश्विक जोखिम धारणाओं और संभावित खतरों के उसके वार्षिक मूल्यांकन का 21वाँ संस्करण है।

मुख्य बिंदु:

  • प्रतिस्पर्द्धा का युग: रिपोर्ट 2026 में वैश्विक जोखिम परिदृश्य की प्रमुख विशेषता के रूप में ‘अनिश्चितता’ को रेखांकित करती है और इस तर्क पर प्रकाश डालती है कि विश्व ‘प्रतिस्पर्द्धा के युग’ में प्रवेश कर रहा है, जहाँ भू-राजनीतिक और आर्थिक टकराव सहयोग को पीछे छोड़ रहे हैं तथा पारंपरिक बहुपक्षीय प्रणालियाँ दबाव में हैं।
  • शीर्ष अल्पकालिक खतरा: तात्कालिक परिदृश्य (2028 तक) में आर्थिक और भू-राजनीतिक तनावों ने पर्यावरणीय चिंताओं को तात्कालिकता के मामले में पीछे छोड़ दिया है।
    • भूराजनीतिक-आर्थिक टकराव: वर्ष 2025 में तीसरे स्थान से यह अब पहले स्थान पर आ गया है। इसमें शुल्क, प्रतिबंध और निवेश सीमाओं के माध्यम से व्यापार का ‘हथियारीकरण’ शामिल है।
    • गलत सूचना और दुष्प्रचार: AI द्वारा बनाए गए डीपफेक्स के बढ़ते प्रसार के कारण, विशेषकर चुनावी अवधियों में सामाजिक स्थिरता पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।
    • सामाजिक ध्रुवीकरण: लोकतांत्रिक प्रणालियों और सार्वजनिक विश्वास पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
    • अत्यधिक मौसमी घटनाएँ: कम समय की अहमियत के मामले में वे दूसरे से चौथे स्थान पर आ गए हैं। हालाँकि वे दीर्घकालिक समय के लिये सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं।
  • दीर्घकालिक जोखिम (10-वर्षीय परिदृश्य): पर्यावरणीय खतरे आगामी दशक के परिदृश्य में प्रमुख बने हुए हैं, जिनमें अत्यधिक मौसमी घटनाएँ और जैव-विविधता ह्रास को सबसे गंभीर जोखिम के रूप में रैंक किया गया है।
    • विशेष रूप से, AI तकनीकों के प्रतिकूल परिणाम गंभीरता के मामले में सबसे बड़ी बढ़त दर्ज करते हुए अल्पकालिक सूची में 30वें स्थान से बढ़कर 10-वर्षीय परिदृश्य में 5वें स्थान पर पहुँच गए।
  • भारत के लिये प्रमुख निष्कर्ष: रिपोर्ट ने अगले दो वर्षों में भारत को प्रभावित करने की सबसे अधिक संभावना वाले विशिष्ट ‘हॉट स्पॉट’ जोखिमों की पहचान की है—
    • साइबर असुरक्षा: भारत में डिजिटल भुगतान और डिजिटल अवसंरचना की तीव्र वृद्धि के कारण इसे शीर्ष जोखिम के रूप में रैंक किया गया है।
    • संपत्ति और आय असमानता: आंतरिक सामाजिक अस्थिरता का प्रमुख कारक है।
    • महत्त्वपूर्ण अवसंरचना और संसाधन सुरक्षा: ‘जल सुरक्षा’ को एक बड़े विवाद बिंदु के रूप में रेखांकित किया गया है, विशेषकर सिंधु नदी बेसिन के संदर्भ में।
    • आर्थिक बाह्य आघात: वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों और अंतर्राष्ट्रीय शुल्कों के प्रति संवेदनशीलता।
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