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भारत में निर्मित ओरल पोलियो वैक्सीन (nOPV2) को WHO की पूर्व-अर्हता प्राप्त

  • 16 Feb 2026
  • 14 min read

चर्चा में क्यों?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नए प्रकार के ओरल पोलियो वैक्सीन (nOPV2) को पूर्व-अर्हता (Pre-qualification) प्रदान की है, जिसे वैश्विक स्तर पर टीकों की बेहतर आपूर्ति के माध्यम से पोलियो प्रकोप को अधिक स्थायी रूप से नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • विनिर्माण: यह उपलब्धि भारत के लिये विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इस टीके का निर्माण हैदराबाद स्थित कंपनी बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड (BioE) द्वारा किया जा रहा है।
  • स्वास्थ्य सुरक्षा को प्रोत्साहन: यह स्वीकृति राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा तथा वैश्विक पोलियो उन्मूलन अभियान में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करती है।
  • nOPV2 एक ‘गेम-चेंजर’ के रूप में: वर्तमान पोलियो उन्मूलन में प्राथमिक चुनौती सर्कुलेटिंग वैक्सीन-डेरिव्ड पोलियोवायरस (cVDPV2) है - ऐसे प्रकोप जो तब होते हैं जब पारंपरिक ओरल वैक्सीन में कमज़ोर वायरस कम प्रतिरक्षित समुदायों में उत्परिवर्तन के कारण एक घातक रूप में वापस आ जाता है। 
  •  आनुवंशिक स्थिरता: nOPV2 को आनुवंशिक रूप से अधिक स्थिर बनाया गया है, जिससे पारंपरिक टीकों की तुलना में पक्षाघातकारी रूप में परिवर्तित होने का जोखिम लगभग 80% तक कम हो जाता है।
  • विशाल उत्पादन क्षमताबायोलॉजिकल ई. लिमिटेड से प्रति वर्ष 600 मिलियन खुराक का उत्पादन होने की संभावना है, जिससे इंडोनेशिया स्थित मूल निर्माता पर निर्भरता घटेगी और वैश्विक आपूर्ति में विविधता आएगी।
  • लॉजिस्टिक्स: इस वैक्सीन की सेल्फ लाइफ 24 महीने है तथा इसे मानक तापमान पर छह माह तक संगृहीत किया जा सकता है, जिससे इसे दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुँचाना सुगम होगा।
  • विश्व पोलियो दिवस: यह दिवस प्रतिवर्ष 24 अक्तूबर को मनाया जाता है, ताकि देशों को पोलियो के विरुद्ध संघर्ष में निरंतर सतर्कता बनाए रखने के लिये प्रेरित किया जा सके।

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