राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स
भ्रष्टाचार बोध सूचकांक 2025
- 16 Feb 2026
- 17 min read
चर्चा में क्यों?
भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) 2025, जिसे ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने जारी किया, 182 देशों और क्षेत्रों को 0 (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (अत्यंत स्वच्छ) के पैमाने पर रैंक करता है। यह रैंकिंग 13 स्वतंत्र डेटा स्रोतों से प्राप्त विशेषज्ञ आकलनों और व्यावसायिक धारणा सर्वेक्षणों के आधार पर निर्धारित की गई है।
मुख्य बिंदु
- रैंकिंग: भारत 182 देशों में से 91वें स्थान पर रहा।
- स्कोर: भारत का स्कोर 100 में से 39 रहा, जो पिछले वर्ष के 38 के स्कोर से थोड़ा सुधार दर्शाता है।
- प्रगति: हालाँकि इससे भारत को वर्ष 2024 की 96वीं रैंक से पाँच स्थान ऊपर चढ़ने में मदद मिली, लेकिन यह वैश्विक औसत स्कोर 43 से नीचे बना हुआ है।
- भारत की रैंकिंग में सुधार: इस मामूली सुधार का श्रेय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और ई-गवर्नेंस के विस्तार को दिया जाता है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में बिचौलियों द्वारा भ्रष्टाचार कम हुआ है।
- चिंताएँ: रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवाओं में निम्न स्तर की रिश्वतखोरी में कमी आई है, लेकिन राजनीतिक वित्तपोषण और मुखबिरों तथा पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
- भारत की रैंकिंग में सुधार: इस मामूली सुधार का श्रेय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और ई-गवर्नेंस के विस्तार को दिया जाता है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में बिचौलियों द्वारा भ्रष्टाचार कम हुआ है।
- क्षेत्रीय तुलना: भारत पाकिस्तान (136वें) और बांग्लादेश (150वें) से बेहतर है, लेकिन भूटान (18वें) और चीन (75वें) से पीछे है।
- शीर्ष देश: डेनमार्क (प्रथम, स्कोर 89) सबसे कम भ्रष्ट देश के रूप में अग्रणी, इसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर (तीसरे स्थान पर, एशिया में सर्वोच्च) हैं। न्यूज़ीलैंड और नॉर्वे शीर्ष पाँच में शामिल हैं, जो नॉर्डिक और प्रशांत क्षेत्र के शासन मॉडल की निरंतर पारदर्शिता को दर्शाता है।
- सबसे निचले पायदान: गृहयुद्ध, राज्य विफलता या निरंकुश शासन से जूझ रहे देशों में सोमालिया और दक्षिण सूडान सबसे निचले पायदान पर (स्कोर 9) हैं। इसके पहले वेनेजुएला, यमन और लीबिया हैं, जो सार्वजनिक जवाबदेही और कानून के शासन पर दीर्घकालिक संघर्ष के विनाशकारी प्रभाव को दर्शाते हैं।
- वैश्विक निष्कर्ष: वैश्विक औसत स्कोर घटकर 42 हो गया, जो पिछले दशक में सबसे कम है, यह दर्शाता है कि विश्व में भ्रष्टाचार की धारणा बिगड़ रही है।
- विशेष आँकड़ा: 182 देशों में से 122 देशों ने 50 से कम अंक प्राप्त किये, जो दर्शाता है कि अधिकांश राष्ट्र सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार नियंत्रण में संघर्षरत हैं।
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