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थान्या नाथन केरल की पहली दृष्टिहीन महिला न्यायाधीश बनेंगी

  • 23 Feb 2026
  • 10 min read

चर्चा में क्यों?

थान्या नाथन इतिहास रचने जा रही हैं, क्योंकि वे केरल की पहली दृष्टिबाधित (पूर्णतः दृष्टिहीन) महिला न्यायाधीश बनने वाली हैं।

मुख्य बिंदु:

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: थान्या नाथन केरल की न्यायपालिका में न्यायाधीश नियुक्त होने वाली पहली पूर्णतः दृष्टिहीन महिला होंगी।
  • सफलता: उन्होंने केरल न्यायिक सेवा में प्रवेश हेतु आयोजित सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रतियोगी परीक्षा में बेंचमार्क दिव्यांग श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
    • दृष्टिबाधा के बावजूद उन्होंने सुलभ शिक्षण उपकरणों और डिजिटल सहायता प्रणालियों के सहयोग से विधि शिक्षा पूरी की।
  • न्यायिक समावेशन: उनकी उपलब्धि वर्ष 2025 के सर्वोच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक निर्णय के बाद संभव हुई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को न्यायिक सेवा की पात्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।
    • उनकी नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के अंतर्गत समता तथा भेदभाव-निषेध के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है, जो लोक सेवाओं में समान अवसर सुनिश्चित करते हैं।
  • महत्त्व: थान्या की सफलता न केवल दिव्यांग व्यक्तियों के लिये प्रेरणास्रोत है, बल्कि भारत के विधि पेशे को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने के सतत प्रयासों को भी सशक्त बनाती है।

और पढ़ें: सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय संविधान, दिव्यांगजन

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