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वर्ष 2035 तक आंध्र प्रदेश को क्लीन एनर्जी हब बनाएगा नीति आयोग
- 09 Feb 2026
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चर्चा में क्यों?
नीति आयोग ने आंध्र प्रदेश को वर्ष 2035 तक भारत के शीर्ष तीन नवीकरणीय ऊर्जा हब में बदलने के उद्देश्य से एक रूपरेखा (ड्राफ्ट ब्लूप्रिंट) का अनावरण किया। इस रणनीति को ASSET (एक्सेलरेटिंग सस्टेनेबल स्टेट एनर्जी ट्रांजिशन) प्लेटफॉर्म के तहत नीति आयोग के CEO बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने राज्य के मुख्य सचिव को प्रस्तुत किया।
मुख्य बिंदु:
- स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: इस रूपरेखा का लक्ष्य वर्ष 2035 तक आंध्र प्रदेश को एक प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक और निर्यातक बनाना है।
- यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन न्यूनीकरण, आर्थिक विकास और जलवायु कार्रवाई की व्यापक पहल के साथ मेल खाती है और वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करती है।
- ऊर्जा सुलभता और दक्षता: नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, पावर खरीद लागत ₹3.90–4 प्रति यूनिट तक घट सकती है, जबकि कुल आपूर्ति लागत ₹6 प्रति यूनिट से नीचे रखी जाएगी।
- संप्रेषण आधुनिकीकरण: ट्रांसमिशन उन्नयन के लिये ₹65,000–70,000 करोड़ का निवेश निर्धारित किया गया है, जिसमें ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, GIS सबस्टेशन और HVDC लाइनें शामिल हैं।
- ऊर्जा वार रूम: इन पहलों की प्रगति पर निगरानी के लिये एक समर्पित मॉनिटरिंग सेल स्थापित किया जाएगा।
- समयसीमा: इस रूपरेखा को मार्च 2026 की शुरुआत तक अंतिम रूप देने की उम्मीद है, जबकि इसका कार्यान्वयन उसी माह के मध्य से शुरू होने की संभावना है।
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