मध्य प्रदेश
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ती संख्या के बीच शामिल किये 9 और चीते
- 03 Mar 2026
- 16 min read
चर्चा में क्यों?
भारत ने बोत्सवाना से नौ और चीते प्राप्त किये हैं, जिससे कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चल रहे चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम को और सुदृढ़ किया है। यह वर्ष 1952 में विलुप्ति के बाद भारत में चीता आबादी की पुनर्बहाली की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- भारत का चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम: भारत ने वर्ष 1952 में चीते को विलुप्त घोषित किया था, जिससे वह दर्ज इतिहास में इस प्रजाति को खोने वाला एकमात्र देश बन गया।
- इस पारिस्थितिक क्षति की भरपाई के लिये सरकार ने वर्ष 2022 में प्रोजेक्ट चीता प्रारंभ किया।
- प्रारंभिक चरण: सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 चीतों का पहला जत्था भारत लाया गया था।
- वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से दूसरा जत्था मंगाया गया।
- अब बोत्सवाना से 9 और चीतों का स्थानांतरण किया गया है।
- कार्यान्वयन एजेंसी: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)।
- चीतों का समूह: इस समूह में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं।
- यात्रा का विवरण: चीतों को बोत्सवाना के गैबोरोन से ग्वालियर तक भारतीय वायु सेना के C-17 ग्लोबमास्टर III विमान से लगभग 7,600 किलोमीटर दूर लाया गया। इसके बाद उन्हें वायु सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा कूनो (Kuno) पहुँचाया गया।
- वर्तमान स्थिति: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने चीतों को क्वारंटीन बाड़ों (quarantine enclosures) में छोड़ा।
- स्वास्थ्य परीक्षण और अनुकूलन के लिये उन्हें लगभग 30 दिनों तक वहीं रखा जाएगा, तत्पश्चात उन्हें बड़े सॉफ्ट-रिलीज़ क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा।
- प्रजनन सफलता: कूनो में उल्लेखनीय प्रजनन सफलता देखी गई है। वर्ष 2023 से अब तक 39 शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 27 जीवित हैं। हाल ही में, फरवरी 2026 में आशा और गामिनी ने कुल 9 शावकों (दो अलग-अलग समूहों में) को जन्म दिया।
- भौगोलिक वितरण: जहाँ 45 चीते कूनो में रह रहे हैं, वहीं 3 वयस्क चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया है, ताकि एक ही आवास में उनकी अत्यधिक सघनता को रोका जा सके।
| और पढ़ें: प्रोजेक्ट चीता, कुनो राष्ट्रीय उद्यान |