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छत्तीसगढ़

‘गोधन न्याय योजना’ और ‘राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना’ के हितग्राहियों को राशि वितरण'

  • 08 Jul 2022
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

7 जुलाई, 2022 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में ‘गोधन न्याय योजना’ के हितग्राहियों को राशि वितरण और ‘राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना’ के तहत हितग्राहियों को अनुदान राशि का वितरण किया।

प्रमुख बिंदु

  • मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत गोबर बेचने वाले पशुपालकों, ग्रामीणों, गोठानों से जुड़े महिला समूहों और गोठान समितियों को 10 करोड़ 84 लाख रुपए की राशि ऑनलाइन जारी की।
  • इस राशि में से 15 जून से 30 जून तक राज्य के गोठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय किये गए गोबर की एवज में 69 करोड़ रुपए का भुगतान और गोठान समितियों को 4.31 करोड़ रुपए तथा महिला समूहों को 2.84 करोड़ रुपए की लाभांश राशि का भुगतान किया गया।
  • इसी तरह उन्होंने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत 25 हितग्राहियों को 63 लाख रुपए की अनुदान राशि का भुगतान हितग्राहियों के खाते में किया।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना की सफलता से प्रदेश में गोठानों की संख्या में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। योजना के तहत अब तक 75 लाख 38 हज़ार रुपए क्विंटल गोबर की खरीदी हुई है तथा गोठानों में गोबर बेचने वाले ग्रामीणों और पशुपालकों को अब तक गोबर की एवज में 75 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
  • गोठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 19 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। गोधन न्याय योजना से 2 लाख 11 हज़ार रुपए से अधिक ग्रामीण, पशुपालक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। गोबर बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने वालों में 45.97 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है।
  • इस योजना से 1 लाख 33 हज़ार रुपए से अधिक भूमिहीन परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। गोठानों की आजीविका गतिविधियों के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों ने अब तक 72 करोड़ 19 लाख रुपए की आय प्राप्त की है।
  • मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को गाँवों के आँगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन के सहयोग से बच्चों को उबालकर दूध उपलब्ध कराने की व्यवस्था के लिये कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिये।
  • इससे पशुपालकों को दूध का वाजिब मूल्य मिलेगा। ग्रामीण दूधारू पशुपालन के लिये प्रोत्साहित होंगे, गो-माता की सेवा होगी तथा ग्रामीण अंचल में दूध की उपलब्धता बढ़ने से पोषण स्तर बेहतर होगा।
  • मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि अलग-अलग गाँवों में दूध का अलग-अलग रेट हितग्राहियों को मिल रहा है। आँगनबाड़ी और स्कूलों में दूध वितरण की व्यवस्था से दूध के रेट में एकरूपता आएगी।
  • उन्होंने कहा कि गोठानों में डेयरी व्यवसाय कर रहे हितग्राहियों को छह माह बाद एक अतिरिक्त गाय अन्य योजना से दी जाएगी।
  • कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि प्रदेश के 3089 गोठान स्वावलंबी हो चुके हैं। गोठानों में अब तक 16 लाख 43 हज़ार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन किया गया है, इसमें से 13 लाख 69 हज़ार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का वितरण किसानों और विभिन्न विभागों को किया जा चुका है। 89 लाख क्विंटल वर्मी कंपोस्ट गोठानों में उपलब्ध है।
  • गोठानों में वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन रासायनिक खादों की कमी से निपटने में काफी हद तक मदद करेगा। लगभग 2 लाख 94 हज़ार किसानों ने वर्मी कंपोस्ट लिया है।
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