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Mains Marathon

  • 08 Aug 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़

    दिवस 47: आप एक ऐसे शहर के ज़िला मजिस्ट्रेट हैं जिसका सांप्रदायिक संवेदनशीलता का इतिहास रहा है। हाल ही में, एक धार्मिक जुलूस के दौरान, एक विवादित क्षेत्र से गुज़रने वाले रास्ते को लेकर दो समुदायों के सदस्यों के बीच कहासुनी हो गई। यह घटना तेज़ी से बढ़ गई और दोनों पक्षों की ओर से पथराव की खबरें आईं, जिससे कई लोग घायल हुए हैं तथा संपत्ति को नुकसान पहुँचा है। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो गए हैं, जिनमें से कई फर्ज़ी या बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए हैं, जिससे भावनाएँ आहत हुई हैं तथा दंगे भड़क रहे हैं।

    स्थानीय बाज़ार बंद हो गए हैं और निवासियों में भय व्याप्त है। कई राजनीतिक नेता अपने-अपने वोट बैंक को सुदृढ़ करने के लिये भड़काऊ बयान दे रहे हैं। खुफिया रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर स्थिति पर काबू नहीं पाया गया, तो पड़ोसी ज़िलों में भी अशांति फैल सकती है। दोनों पक्षों के धार्मिक नेताओं ने प्रशासन पर अविश्वास जताया है और शुरुआती झड़प से निपटने में पक्षपात का आरोप लगाया है।
    पुलिस ने धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है, लेकिन आर्थिक व्यवधान से बचने के लिये उच्च अधिकारियों का दबाव है कि वे जल्द से जल्द सामान्य स्थिति स्थापित करें। इस बीच, मानवाधिकार कार्यकर्त्ता अत्यधिक बल प्रयोग के प्रति आगाह कर रहे हैं और मीडिया इन घटनाओं को आक्रामक तरीके से कवर कर रहा है, प्रायः सबसे सनसनीखेज़ पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    इस तनावपूर्ण माहौल में, आपको यह तय करना होगा कि तात्कालिक संकट से किस प्रकार निपटा जाए और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि दीर्घकालिक रूप से सांप्रदायिक सद्भाव पुनः स्थापित हो। कोई भी चूक या तो निष्क्रियता के आरोपों या फी सख्ती के आरोपों का कारण बन सकती है।

    A. इस मामले में नैतिक मुद्दों और प्रशासनिक चुनौतियों का अभिनिर्धारण कीजिये।
    B. आप नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किये बिना किस-प्रकार कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे?
    C. गलत सूचनाओं का मुकाबला करने और समुदायों के बीच विश्वास पुनः स्थापित करने के लिये आप क्या उपाय करेंगे?
    D. इस संवेदनशील स्थिति में निष्पक्ष और प्रभावी निर्णय लेने में लोक सेवा के कौन-से मूल्य एवं सिद्धांत आपका मार्गदर्शन करेंगे? (250 शब्द)

    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण

    • तथ्यों, हितधारकों, नैतिक मुद्दों और शासन संबंधी चुनौतियों का अभिनिर्धारण कीजिये।
    • तत्काल नियंत्रण और दीर्घकालिक शांति स्थापना के लिये संतुलित, वैध एवं नैतिक उपायों का सुझाव दीजिये।
    • समाधानों को संवैधानिक सिद्धांतों और लोक प्रशासन के मूल्यों से जोड़ते हुए उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    ज़िले के ज़िलाधिकारी के रूप में, जहाँ पहले से सांप्रदायिक संवेदनशीलता का इतिहास रहा है, हाल ही में एक धार्मिक जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच हुई झड़प से तनाव बढ़ गया है। यह स्थिति अब पड़ोसी ज़िलों तक फैलने की आशंका उत्पन्न कर रही है। ऐसे में, विधि-व्यवस्था को प्रभावी ढंग से बनाए रखना, नागरिक अधिकारों का सम्मान करना तथा समुदायों के बीच विश्वास को पुनः स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है।

    हितधारक

    हितधारक

    भूमिका/प्रभाव

    शहर के निवासी

    सांप्रदायिक तनाव, भय और व्यवधान से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित।

    सम्मिलित समुदाय

    विवाद में सम्मिलित दोनों समुदाय, जिन्हें प्रशासन पर भरोसा होगा या नहीं, यह स्थिति पर निर्भर है।

    राजनीतिक नेता

    अपने बयानों से स्थिति को शांत कर सकते हैं या तनाव बढ़ा सकते हैं।

    धार्मिक नेता

    उनके विचार सामुदायिक भावनाओं को प्रभावित करते हैं और विश्वास पुनः स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    पुलिस

    विधि-व्यवस्था लागू करने और साथ ही सख्ती से बचने का दायित्व।

    मानवाधिकार कार्यकर्त्ता

    यह सुनिश्चित करने के लिये चिंतित हैं कि नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन न हो, विशेषकर अशांति से निपटने में।

    मीडिया

    जनता की धारणा को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे प्रायः तनाव बढ़ता है।

    उच्च अधिकारी

    आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए शीघ्र समाधान के लिये दबाव डालते हैं।

    A. नैतिक मुद्दे और प्रशासनिक चुनौतियाँ

    • नैतिक मुद्दे:
      • निष्पक्षता: प्राथमिक नैतिक मुद्दा स्थिति से निपटने में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है, क्योंकि दोनों समुदायों और उनके नेताओं को लगता है कि प्रशासन पक्षपातपूर्ण हो सकता है।
      • नागरिक स्वतंत्रता का संरक्षण: विधि-व्यवस्था लागू करते समय, प्रशासन को नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने से बचना चाहिये, विशेषकर धारा 144 लागू होने पर।
      • बल का अत्यधिक प्रयोग: मानवाधिकार कार्यकर्त्ता बल के अत्यधिक प्रयोग के खिलाफ चेतावनी देते हैं, क्योंकि इससे और उल्लंघन हो सकते हैं तथा प्रशासन में विश्वास कम हो सकता है।
      • राजनीतिक प्रभाव: राजनीतिक नेताओं के भड़काऊ बयान प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों को जटिल बना सकते हैं।
    • प्रशासनिक चुनौतियाँ:
      • विधि और व्यवस्था प्रबंधन: बढ़ती हिंसा को नियंत्रित करना, गलत सूचनाओं पर नियंत्रण करना तथा स्थिति को और बिगाड़े बिना सामान्य स्थिति बहाल करना।
      • सार्वजनिक धारणा और विश्वास: समुदायों और प्रशासन के बीच विश्वास का पुनर्निर्माण करना, जो कथित पूर्वाग्रह के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है।
      • मीडिया सनसनीखेज़: स्थिति के मीडिया चित्रण को नियंत्रित करना, जो तनाव को बढ़ा सकता है तथा तथ्यों को दिशा दे सकता है।

    B. नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किये बिना विधि और व्यवस्था का प्रबंधन

    • सक्रिय संचार: धारा 144 लागू करने, उसके उद्देश्य और उसके पीछे के तर्क के बारे में जनता के साथ स्पष्ट एवं पारदर्शी संचार सुनिश्चित किया जाना चाहिये। इससे संदेह कम होगा और सुरक्षा की भावना उत्पन्न होगी।
    • तनाव कम करने की रणनीतियाँ: तनाव को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिये पुलिस बलों को गैर-टकरावपूर्ण तरीके से तैनात किया जाना चाहिये। प्रभावित समुदायों के बीच मध्यस्थता और शांति स्थापित करने के लिये धार्मिक हस्तियों सहित सामुदायिक नेताओं की सहायता ली जानी चाहिये।
    • बल का न्यूनतम प्रयोग: बल प्रयोग में संयम बरतना चाहिये, केवल अत्यधिक उकसावे की स्थिति में ही बल का प्रयोग करना चाहिये और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि बल प्रयोग खतरे के अनुपात में हो।
    • सार्वजनिक सेवाओं को बनाए रखना: सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि बाज़ार, परिवहन और संचार माध्यम जैसी आवश्यक सेवाएँ खुली तथा सुलभ रहें, ताकि आगे कोई व्यवधान न हो।

    C. गलत सूचना का मुकाबला करने और विश्वास पुनःस्थापित करने के उपाय

    • तथ्य-आधारित संचार: स्थिति पर सटीक और समय पर अपडेट प्रदान करने के लिये, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित, गलत सूचनाओं को दूर करने के लिये आधिकारिक माध्यमों का उपयोग करना चाहिये।
    • मीडिया से जुड़ाव: प्रशासन के कार्यों को स्पष्ट करने, अतिरंजित या झूठे बयानों को सही करने और ज़िम्मेदार रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिये मीडिया के साथ नियमित ब्रीफिंग आयोजित की जानी चाहिये।
    • सामुदायिक संवाद: विश्वास पुनः स्थापित करने और आगे ध्रुवीकरण को रोकने के लिये, धार्मिक नेताओं तथा नागरिक समाज संगठनों जैसे तटस्थ तृतीय पक्षों को शामिल करते हुए, दोनों समुदायों के नेताओं के बीच संवाद को सुगम बनाया जाना चाहिये।
    • मीडिया निगरानी: सोशल मीडिया और पारंपरिक मीडिया आउटलेट्स पर भड़काऊ कंटेंट की निगरानी और उसे चिह्नित करने के लिये एक समर्पित टीम का गठन किया जाना, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि झूठी सूचनाओं का शीघ्रता से समाधान किया जाए।

    D. लोक सेवा के मूल्य और सिद्धांत

    • निष्पक्षता: लिये गए निर्णय तटस्थ और गैर-पक्षपाती होने चाहिये, यह सुनिश्चित करते हुए कि किसी भी समुदाय को तरजीह न दी जाए।
    • पारदर्शिता: स्पष्ट संचार और कार्यों में पारदर्शिता प्रशासन में विश्वास उत्पन्न करेगी तथा गलत सूचना की संभावना को कम करेगी।
    • जवाबदेही: प्रशासन को अपने कार्यों के लिये जवाबदेह रहना चाहिये, विशेष रूप से कानून प्रवर्तन और सूचना प्रबंधन के संबंध में।
    • सहानुभूति: प्रशासन को प्रभावित समुदायों की वास्तविक चिंताओं का समाधान करके तथा उनकी सुरक्षा एवं सम्मान की रक्षा के लिये कार्य करके सहानुभूति दिखानी चाहिये।
    • न्याय: सामाजिक सद्भाव और शांति को बढ़ावा देते हुए, सभी संबंधित समुदायों के लिये निष्पक्षता एवं न्याय सुनिश्चित किये जाने चाहिये।

    निष्कर्ष

    ऐसी संवेदनशील स्थिति में, महात्मा गांधी के शब्दों को याद रखना अत्यंत आवश्यक है: “आँख के बदले आँख लेने से अंततः पूरा संसार अंधा हो जायेगा।” 

    ऐसे समय में सबसे अच्छा रास्ता है सामंजस्य एवं निष्पक्षता अपनाना, जहाँ प्रशासन एक एकीकृत शक्ति के रूप में कार्य करे, शांति, समझ और न्याय को बढ़ावा दे, साथ ही सभी नागरिकों के अधिकारों एवं स्वतंत्रता की रक्षा करे।

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