-
07 Aug 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
केस स्टडीज़
दिवस 46: आप रज़िया हैं, जो एक IAS अधिकारी के रूप में किसी ज़िले की उप-आयुक्त (Deputy Commissioner) पद पर तैनात हैं। आपके ज़िले में नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया (जैसे NRC) का अंतिम चरण चल रहा है। इस अंतिम सूची से हज़ारों लोगों को अपवर्जित कर दिया गया है, जिनमें से अधिकांश दिहाड़ी मज़दूर, सीमांत किसान और गरीबी, अशिक्षा या बाढ़ के दौरान विस्थापन के कारण अधूरे दस्तावेज़ों वाली महिलाएँ हैं।
जिन लोगों के नाम बाहर रखे गए हैं उनमें वे परिवार भी शामिल हैं जो दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। अब ज़िले में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ रहा है। कुछ समूह प्रशासन पर पक्षपात और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि अन्य समूह ‘स्थानीय पहचान’ की रक्षा के लिये कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
राज्य सरकार को भेजी जाने वाली आपकी रिपोर्ट पूरी तरह से निष्पक्ष होने की उम्मीद है, लेकिन आप व्यक्तिगत रूप से जानती हैं कि बाहर रखे गए कई परिवार संभवतः वास्तविक नागरिक हैं। आपके कनिष्ठ अधिकारी ‘स्पष्ट त्रुटियों में सुधार’ करने के लिये कुछ आँकड़ों में हेरफेर करने का सुझाव देते हैं, लेकिन यह कानूनी प्रोटोकॉल का उल्लंघन होगा।
- इस स्थिति में रज़िया किन नैतिक द्वन्दों का सामना कर रही हैं?
- निम्नलिखित कार्रवाइयों के तात्कालिक और दीर्घकालिक परिणामों का मूल्यांकन कीजिये:
(a) जो लोग वास्तविक नागरिक हैं, उन्हें शामिल करने के लिये रिकॉर्ड में हेरफेर करना
(b) मानवीय पक्षों की अनदेखी करते हुए दस्तावेज़ आधारित नियमों का कठोरता से पालन करना
(c) नये सिरे से क्षेत्र सत्यापन (Field verification) की अनुशंसा करना
C. रज़िया को क्या निर्णय लेना चाहिये? नैतिक सिद्धांतों और पेशेवर आचरण के आधार पर अपने उत्तर के माध्यम से उचित निष्कर्ष दीजिये। (250 शब्द)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- संदर्भ स्थापित करने के लिये संक्षेप में स्थिति का परिचय दीजिये।
- वर्तमान स्थिति में रज़िया के सामने आने वाले नैतिक संघर्षों की पहचान कीजिये।
- दिए गए कार्यों के अल्पकालिक और दीर्घकालिक परिणामों का मूल्यांकन कीजिये।
- उपयुक्त कार्यवाही की सिफारिश कीजिये।
- नैतिक तर्क के साथ इसका औचित्य सिद्ध कीजिये।
- आगे बढ़ने के उपर्युक्त तरीके के साथ निष्कर्ष दिजिये।
परिचय:
डिप्टी कमिश्नर के तौर पर रज़िया को गरीबी और विस्थापन से जूझ रहे ज़िले में एक संवेदनशील नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया के अंतिम चरण की देखरेख का कार्य सौंपा गया है। अधूरे दस्तावेज़ों के कारण हज़ारों लोगों को नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है, जिससे विरोध प्रदर्शन और सांप्रदायिक तनाव भड़क उठे हैं। उन्हें डेटा में हेरफेर के दबाव के बीच कानूनी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए निष्पक्षता सुनिश्चित करने की चुनौती का सामना करना होगा।.
मुख्य भाग:
A. रज़िया द्वारा सामना किए गए नैतिक संघर्ष
- सत्य बनाम करुणा: कानूनी अनुपालन बनाम कमज़ोर लोगों के लिये मानवीय चिंता।
- ईमानदारी बनाम व्यावहारिकता: दबाव के बावजूद अभिलेखों में हेरफेर करने से इनकार करना।
- वस्तुनिष्ठता बनाम वकालत: तथ्यों की रिपोर्टिंग बनाम सामाजिक अन्याय को स्वीकार करना।
- न्याय बनाम सामाजिक सद्भाव: निष्पक्ष नागरिकता निर्णय बनाम सांप्रदायिक तनाव का प्रबंधन।
- विधि का शासन बनाम अनुकूलन: कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना बनाम कमज़ोर समूहों के लिये अनुकूलन करना।
B. विकल्प और परिणाम
(a) रिकॉर्ड में हेरफेर कर बाहर किये गए लोगों को शामिल करना
- अल्पकालिक: वास्तविक नागरिकों की रक्षा करता है; विरोध प्रदर्शनों को कम करता है।
- दीर्घकालिक: कानूनी पवित्रता को कमज़ोर करता है; प्रशासनिक प्रतिक्रिया का जोखिम; जनविश्वास को नुकसान।
(b) दस्तावेज़ी नियमों का कड़ाई से पालन करना
- अल्पकालिक: प्रशासनिक व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया को बनाए रखता है।
- दीर्घकालिक: अन्याय का कारण बनता है; सामाजिक अशांति बढ़ाता है; कमजोर समुदायों को नुकसान पहुँचाता है।
(c) नए सिरे से फील्ड सत्यापन की सिफारिश करना
- अल्पकालिक: अंतिम निर्णय में देरी; तनाव कम कर सकता है।
- दीर्घकालिक: सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है; विश्वसनीयता को मज़बूत करता है; महंगा लेकिन नैतिक रूप से सही।
C. सिफारिश किया गया कार्यपथ:
- कानूनी पवित्रता और मानवीय सरोकार के बीच संतुलन बनाने के लिये नए सिरे से फील्ड सत्यापन अभ्यास का समर्थन करना।
- डेटा में हेरफेर से बचना, लेकिन एक समावेशी और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना।
- तनाव कम करने के लिये समुदाय के नेताओं, नागरिक समाज और प्रभावित परिवारों से संवाद करना।
- सहानुभूति दिखाते हुए पेशेवर आचरण बनाए रखना।
- डेटा में हेरफेर के लिये किए गए सभी दबावों या प्रयासों का दस्तावेज़ीकरण करना।
- यदि हस्तक्षेप जारी रहता है, तो उच्च अधिकारियों या सतर्कता निकायों तक मामला पहुँचाएँ।
नैतिक औचित्य
- कर्त्तव्य-नैतिकता: सत्य, निष्पक्षता और कानूनी अनुपालन को बनाए रखने का दायित्व।
- न्याय: हाशिए पर पड़े और कमज़ोर लोगों के अधिकारों की रक्षा करना।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: एक खुली, विश्वसनीय प्रक्रिया सुनिश्चित करना।
- करुणा: दस्तावेज़ों से परे मानवीय गरिमा का सम्मान करना।
- विधि का शासन: कानूनी प्रोटोकॉल का लगातार पालन करना।
निष्कर्ष:
महात्मा गांधी के सत्य (Satya) और अहिंसा (Ahimsa) के सिद्धांतों से प्रेरित होकर, रज़िया को अपनी रिपोर्टिंग और निर्णय लेने में सत्यनिष्ठा बनाए रखनी चाहिये तथा डेटा में हेरफेर करने के किसी भी प्रलोभन का विरोध करना चाहिये। उसे बाहर किये गए व्यक्तियों के प्रति करुणा के साथ व्यवहार करना चाहिये, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनकी गरिमा का सम्मान हो, लेकिन नैतिक मानकों से समझौता न हो। दबाव के विरुद्ध इस नैतिक साहस और अहिंसक प्रतिरोध का मार्ग न्याय और सामाजिक सद्भाव दोनों को बनाए रखता है।