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08 Aug 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
केस स्टडीज़
दिवस 47: आप बीस लाख से अधिक की आबादी वाले एक बड़े सरकारी अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। हाल ही में, यह अस्पताल आवश्यक दवाओं की कमी, खराब नैदानिक उपकरणों, लंबी प्रतीक्षा अवधि, अपर्याप्त स्वच्छता और लापरवाही के कारण मरीज़ों की मौत जैसी कई गलत वजहों से सुर्खियों में रहा है।
नौकरी शुरू करने पर, आपको पता चलता है कि कई डॉक्टर और नर्स कम वेतन एवं अधिक काम का बोझ बताकर अनियमित काम करते हैं। कई आपूर्तिकर्त्ताओं के प्रभावशाली स्थानीय राजनेताओं से संबंध हैं, जिसके कारण अधिक मूल्य पर निम्न गुणवत्ता वाली दवाइयाँ मिलती हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण अस्पताल के रखरखाव अनुबंधों का नवीनीकरण लंबित है। ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब पृष्ठभूमि के मरीज़ों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है तथा प्रायः उन्हें भर्ती होने या जाँच के लिये रिश्वत माँगी जाती है। वरिष्ठ कर्मचारी पिछली गड़बड़ियों के उजागर होने के डर से सुधारों का विरोध कर रहे हैं।
हाल ही में एक ऑडिट रिपोर्ट में सुरक्षा प्रोटोकॉल के घोर उल्लंघन की बात कही गई है और सेवाओं में तत्काल सुधार की माँग करते हुए उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने आपको बजट सत्र से पहले निजी तौर पर “बजट सत्र से पहले अधिक हंगामा करने से बचने की सलाह” दी है।
A. इस मामले में नैतिक और प्रशासनिक मुद्दों का अभिनिर्धारण कीजिये।
B. आप राजनीतिक प्रतिक्रिया को भड़काए बिना रोगी देखभाल किस प्रकार सुनिश्चित करेंगे?
C. भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने और कर्मचारियों की जवाबदेही में सुधार के लिये आप क्या कदम उठाएँगे?
D. उन नैतिक मूल्यों का सुझाव दीजिये जो एक लोक स्वास्थ्य प्रशासक का मार्गदर्शन करने चाहिये। (250 शब्द)उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण
- तथ्यों, हितधारकों और मौजूदा नैतिक-प्रशासनिक दुविधाओं का अभिनिर्धारण कीजिये।
- विधिक एवं नैतिक सीमाओं के भीतर प्रतिस्पर्द्धी माँगों— रोगी कल्याण, राजनीतिक वास्तविकताओं, संस्थागत सुधारों का विश्लेषण कीजिये।
- लोक प्रशासन और संवैधानिक नैतिकता के मूल्यों पर आधारित एक संतुलित कार्य योजना का सुझाव दीजिये।
परिचय:
यह मामला एक ऐसी स्थिति प्रस्तुत करता है जहाँ एक सरकारी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को भ्रष्टाचार, अकुशलता, अकुशल रोगी देखभाल और राजनीतिक दबाव जैसी प्रणालीगत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस परिदृश्य में रोगियों की भलाई सुनिश्चित करते हुए तथा व्यवस्था के भीतर भ्रष्टाचार को दूर करते हुए नैतिक एवं प्रशासनिक चुनौतियों का प्रबंधन करना शामिल है।
हितधारक
हितधारक
भूमिका/प्रभाव
रोगी
खराब सेवाओं, लंबे प्रतीक्षा समय और प्रत्यक्ष रूप से कदाचार से प्रभावित।
डॉक्टर और नर्स
उनकी अनियमितता और अधिक कार्यभार रोगी देखभाल एवं अस्पताल की दक्षता को प्रभावित करते हैं।
आपूर्तिकर्त्ता
वे घटिया दवाओं और बढ़े हुए बिलों की खरीद में संलिप्त हैं।
अस्पताल प्रबंधन
कर्मचारी प्रबंधन और समस्याओं के समाधान सहित अस्पताल के कामकाज़ के लिये जिम्मेदार।
वरिष्ठ कर्मचारी
सुधारों के प्रति उनका प्रतिरोध प्रगति और पारदर्शिता में बाधा डालता है।
सरकार
प्रभावशाली व्यक्तियों का राजनीतिक दबाव अस्पताल प्रशासन और सुधारों को प्रभावित करता है।
ऑडिट रिपोर्ट
सुरक्षा उल्लंघनों पर प्रकाश डालती है जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
जनहित याचिका (PIL)
अस्पताल के कामकाज़ में तत्काल सुधार की मांग करती है, जिससे कानूनी दबाव बढ़ता है।
A. नैतिक और प्रशासनिक मुद्दे
- नैतिक मुद्दे:
- लापरवाही और मरीज़ों की मृत्यु: मरीज़ों की मृत्यु का कारण बनने वाली लापरवाही की रिपोर्टें बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में गंभीर नैतिक उल्लंघनों की ओर संकेत करती हैं।
- भेदभाव और भ्रष्टाचार: अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा ग्रामीण और गरीब मरीज़ों से रिश्वत माँगना स्वास्थ्य सेवा में निष्पक्षता, समानता एवं नैतिक मानकों का उल्लंघन है।
- कम कर्मचारी प्रेरणा: कम वेतन और अधिक कार्यभार का हवाला देते हुए डॉक्टर एवं नर्स अपनी गरिमा का सम्मान करने में विफलता का संकेत देते हैं, जिससे मरीज़ों की उचित देखभाल नहीं हो पाती है।
- प्रशासनिक मुद्दे:
- भ्रष्टाचार: आपूर्तिकर्त्ताओं और स्थानीय राजनेताओं के बीच संबंध एवं निम्नस्तरीय दवाओं का उपयोग प्रशासनिक नैतिकता व पारदर्शिता का उल्लंघन करता है।
- अकुशल उपकरण और दवाओं की कमी: अपर्याप्त संसाधन और कुप्रबंधन अस्पताल की परिचालन क्षमता को प्रभावित करते हैं।
- सुधारों का विरोध: वरिष्ठ कर्मचारियों का सुधारों के प्रति विरोध और पिछली गड़बड़ियों के उजागर होने का डर जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।
- राजनीतिक प्रतिक्रिया के बिना रोगी देखभाल सुनिश्चित करना
B. राजनीतिक प्रतिक्रिया से बचते हुए रोगी देखभाल सुनिश्चित करना:
- तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई: तत्काल सुधार के प्रति प्रतिबद्धता दिखाने के लिये आवश्यक दवाओं और कार्यशील नैदानिक उपकरणों की बहाली को प्राथमिकता दी जानी चाहिये।
- पारदर्शिता: रोगियों की शिकायतों, स्वास्थ्य सेवा परिणामों और संसाधन उपयोग के लिये पारदर्शी रिपोर्टिंग तंत्र लागू किये जाने चाहिये, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
- राजनीतिक प्रभाव का विवेकपूर्ण ढंग से समाधान करें: भ्रष्ट गतिविधियों से निपटने में विवेक बनाए रखते हुए, लोक कल्याण के लिये स्वास्थ्य सेवा के महत्त्व पर ज़ोर देने के लिये स्थानीय राजनेताओं के साथ जुड़ना आवश्यक है। दीर्घकालिक सुधारों के लिये राजनीतिक समर्थन प्राप्त जुटाना चाहिये।
D. भ्रष्टाचार उन्मूलन और कर्मचारियों की जवाबदेही में सुधार के लिये कदम
- मुखबिर संरक्षण: प्रतिशोध के डर के बिना भ्रष्टाचार या कदाचार की रिपोर्ट करने हेतु मुखबिर के लिये एक सुरक्षित तंत्र स्थापित किया जाना चाहिये।
- संशोधित खरीद नीतियाँ: आपूर्तिकर्त्ताओं का तत्काल ऑडिट किया जाना चाहिये और राजनीतिक रूप से प्रभावित आपूर्तिकर्त्ताओं को हटाकर एक पारदर्शी खरीद नीति लागू की जानी चाहिये। नियमित निगरानी के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिये।
- कर्मचारी जवाबदेही: सभी कर्मचारियों के लिये नियमित प्रदर्शन मूल्यांकन लागू किया जाना चाहिये, उनके वेतन और प्रोत्साहन को प्रदर्शन एवं रोगी संतुष्टि से जोड़ना आवश्यक है। लापरवाही या भ्रष्टाचार के दोषी पाए जाने वालों के लिये अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिये।
- कर्मचारियों को प्रशिक्षित और प्रेरित करना: कर्मचारियों की व्यावसायिक क्षमता में सुधार के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किया जाना चाहिये, साथ ही कार्य स्थितियों में सुधार के उपाय, जैसे वेतन में वृद्धि की जानी चाहिये तथा कार्यभार कम किया जाना चाहिये।
D. एक लोक स्वास्थ्य प्रशासक का मार्गदर्शन करने वाले नैतिक मूल्य
- निम्नलिखित नैतिक मूल्य एक लोक स्वास्थ्य प्रशासक का मार्गदर्शन कर सकते हैं:
- सत्यनिष्ठा: सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और सच्चाई के साथ कार्य करना, प्रत्येक निर्णय में निष्पक्षता सुनिश्चित करना।
- जवाबदेही: अपने कार्यों के लिये उत्तरदायी होना, जिसमें निर्णयों और उनके परिणामों की ज़िम्मेदारी लेना शामिल है।
- सहानुभूति: रोगियों, विशेष रूप से सीमांत समूहों की आवश्यकताओं को समझना और उनका समाधान करना।
- न्याय: यह सुनिश्चित करना कि सभी रोगियों को, उनकी पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच प्राप्त हो।
- लोक कल्याण: जनता की ज़रूरतों को व्यक्तिगत या राजनीतिक हितों से ऊपर रखना तथा जन स्वास्थ्य कल्याण के लिये प्रयास करना।
निष्कर्ष
जैसा कि फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने कहा है, “अस्पताल की पहली आवश्यकता यह होनी चाहिये कि वह बीमार को कोई हानि न पहुँचाए।” निष्ठा, सहानुभूति तथा न्याय के मार्गदर्शन में किये गये सुधार अस्पताल की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित कर सकते हैं, साथ ही विधिसम्मत राजनीतिक संवेदनशीलताओं से समझौता किये बिना मरीज़ों के जीवन की रक्षा कर सकते हैं तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत बना सकते हैं।