ध्यान दें:



Mains Marathon

  • 29 Jul 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    दिवस 38: “लोक सेवा का उद्देश्य जनमानस पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि उन्हें साझा लक्ष्यों की ओर प्रेरणा और सहभागिता से अग्रसर करना होता है।” नैतिक रूप से लोक सेवक सार्वजनिक नीतिगत उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सामाजिक प्रभाव का उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं? (150 शब्द)

    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • लोक सेवा के वास्तविक उद्देश्यों का संक्षिप्त परिचय दीजिये।
    • लोक नीति के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सामाजिक प्रभाव के नैतिक उपयोग पर चर्चा कीजिये।
    • एक विवेकपूर्ण टिप्पणी के साथ उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    लोकतंत्र में, लोक सेवक सत्ता के प्रवर्तक नहीं, बल्कि सामूहिक प्रगति के सूत्रधार होते हैं। वास्तविक लोक सेवा में निर्णय थोपने के बजाय लोगों को साझा लक्ष्यों में भाग लेने के लिये प्रेरित करना शामिल है। सामाजिक प्रभाव, जब नैतिक रूप से उपयोग किया जाता है, तो नागरिक व्यवहार को राष्ट्रीय हितों के साथ जोड़कर लोक नीति के उद्देश्यों को बढ़ावा देने का एक प्रमुख साधन बन जाता है।

    मुख्य भाग:

    सामाजिक प्रभाव का नैतिक उपयोग

    • उदाहरण द्वारा नेतृत्व (आचरण का अनुकरण):
      • लोक सेवक अपने आचरण के माध्यम से परिवर्तन को प्रेरित कर सकते हैं।
      • उदाहरण: IAS अधिकारी आर्मस्ट्रांग पाम ने मणिपुर में बिना सरकारी धन के 100 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई, जिससे सामूहिक सामुदायिक कार्रवाई को प्रेरणा मिली।
    • व्यवहारिक संकेत:
      • बिना किसी दबाव के सकारात्मक व्यवहार को प्रभावित करने के लिये सूक्ष्म संकेतों का उपयोग।
      • उदाहरण: "गिव इट अप" अभियान ने नैतिक अपील के माध्यम से LPG सब्सिडी छोड़ने के लिये प्रोत्साहित किया, जिसके परिणामस्वरूप 1 करोड़ से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से अपनी सब्सिडी छोड़ दी।
    • सहभागी शासन
      • योजना और कार्यान्वयन में नागरिकों को शामिल करने से अधिकार एवं विश्वास को बढ़ावा मिलता है।
      • उदाहरण: केरल केने स्था ‘जन योजना अभियान’ नीय भागीदारी के साथ विकेंद्रीकृत योजना को सक्षम बनाया।
    • सहानुभूतिपूर्ण संचार
      • प्रेरक, सम्मानजनक और प्रासंगिक संदेशों का उपयोग।
      • उदाहरण: कोविड-19 के दौरान, सरकारी कर्मचारियों ने टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिये जनजातीय बहुल क्षेत्रों में लोकगीतों और स्थानीय नेताओं की सहायता ली।
    • साझा मूल्यों का आग्रह 
      • नीतियों को सांस्कृतिक, राष्ट्रीय या नैतिक मूल्यों के साथ संरेखित करना।
      • उदाहरण: स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता को एक सामूहिक नैतिक उत्तरदायित्व के रूप में बढ़ावा देने के लिये महात्मा गांधी के आदर्शों का आह्वान किया।

    नैतिक सीमाओं की सुनिश्चितता 

    • सामाजिक प्रभाव को बनाए रखना चाहिये:
      • नागरिकों की स्वैच्छिकता और स्वायत्तता
      • हेरफेर, गलत सूचना या भावनात्मक दबाव से बचना
      • विविधता और गरिमा का सम्मान, विशेष रूप से कमज़ोर समूहों के बीच।

    निष्कर्ष:

    नैतिक सिद्धांतों जैसे कि कांट का नैतिक आज्ञा (Categorical Imperative) यह मांग करती है कि लोगों को केवल किसी प्रशासनिक लक्ष्य को पाने का साधन न समझा जाये, बल्कि उन्हें अपने आप में एक उद्देश्य के रूप में देखा जाये। इसी भावना के अनुरूप, लोक सेवकों को सामाजिक प्रभाव का उपयोग सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता तथा व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करते हुए करना चाहिये। जब राज्य के उद्देश्यों को नागरिकों की आकांक्षाओं के साथ नैतिक रूप से जोड़ा जाता है, तो यह विश्वास-आधारित शासन को बढ़ावा देता है और धारणीय, जन-केंद्रित नीतिगत परिणामों को संभव बनाता है।

close
Share Page
images-2
images-2