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Mains Marathon

  • 06 Aug 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    दिवस 45: “कार्य संस्कृति में सुधार भारत की शासन-व्यवस्था में आवश्यक मौन क्रांति है।” दक्षता, पारदर्शिता और नागरिकों के विश्वास के लिये इसकी महत्ता का विश्लेषण कीजिये। (150 शब्द)

    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • कार्य संस्कृति सुधार और यह लोक सेवा रूपांतरण की दृष्टि से सबसे प्रमुख क्यों है, इसकी व्याख्या से उत्तर की शुरुआत कीजिये।
    • मुख्य भाग में, वास्तविक उदाहरणों के साथ, कार्यकुशलता में सुधार, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पुनः नागरिकों का विश्वास हासिल करने में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिये।
    • उपयुक्त निष्कर्ष लिखिये।

    परिचय:

    भारत के शासन में "कार्य संस्कृति सुधार" का तात्पर्य लोक संस्थानों में नीतिपरक आचरण, कार्यस्थल के मानदंडों और वृत्तिक मान में सुधार से है। यह सुधार कार्यकुशलता बढ़ाने, पारदर्शिता को बढ़ावा देने और प्रशासन में नागरिकों का विश्वास फिर से स्थापित करने के लिये आवश्यक है।

    मुख्य भाग:

    • कार्यकुशलता में सुधार: शासन में कार्य संस्कृति में सुधार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और नौकरशाही तंत्र संबंधी बाधाओं को कम करने पर केंद्रित है। एक अधिक कुशल कार्य संस्कृति समय पर निर्णय लेने और सेवा परिदान को बढ़ावा देती है, जिससे बेहतर लोक प्रशासन संभव होता है।
      • उदाहरण: PRAGATI प्लेटफॉर्म प्रधानमंत्री कार्यालय को परियोजनाओं में विलंब की निगरानी करने और अधिकारियों के साथ प्रत्यक्ष रूप से मुद्दों का समाधान करने की सुविधा प्रदान करती है।
    • पारदर्शिता को बढ़ावा: सुधार की गई कार्य संस्कृति में सरकारी कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता पर बल दिया जाता है।
      • यह मुक्त संचार, स्पष्ट नीतियों और सूचना की स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करती है।
      • निर्णयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से भ्रष्टाचार की संभावना कम हो जाती है और सार्वजनिक संसाधनों का उद्धिष्ट उद्देश्य के लिये उपयोग सुनिश्चित है।
      • उदाहरण: सूचना का अधिकार अधिनियम ने नागरिकों को पारदर्शिता की मांग करने का अधिकार दिया है, लेकिन इसके बेहतर रूप से संचालन के लिये, सरकारी कर्मचारियों में नीतिपरक आचरण और जवाबदेही कार्य संस्कृति में सन्निहित होनी चाहिये।
    • नागरिक विश्वास का निर्माण: नागरिकों को सरकार पर विश्वास करने के लिये, उन्हें उसकी संस्थाओं की सत्यनिष्ठा और प्रभावशीलता पर विश्वास करना होगा। कार्य संस्कृति में सुधार एक अधिक नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण के अंगीकरण में सहायक होता है, जहाँ लोक सेवक व्यक्तिगत लाभ के बजाय नागरिकों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
      • उदाहरण: स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत स्वच्छता, अनुशासन और नागरिक भागीदारी की ओर व्यवहारिक बदलाव पर बल दिया गया, जिससे सरकारी पहलों में जनता का विश्वास स्थापित हुआ।
    • सुधार संबंधी चुनौतियाँ: कार्य संस्कृति में रूपांतरण के समक्ष नौकरशाही मानदंड, राजनीतिक प्रभाव और प्रणालीगत जड़ता जैसी चुनौतियाँ हैं। इसके अतिरिक्त, लोक सेवकों की दृढ़ अभिवृत्ति में बदलाव लाना एक दीर्घकालिक चुनौती है।
      • उदाहरण: पुलिस सुधारों और नौकरशाही तंत्र जवाबदेही के समक्ष अधिकारियों द्वारा अधिक निगरानी और उत्तरदायित्व स्वीकार करने की अनिच्छा जैसी समस्याएँ हैं।

    निष्कर्ष:

    भारत की शासन व्यवस्था में दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक विश्वास अभिवृद्धि के लिये कार्य संस्कृति में सुधार करना अत्यंत आवश्यक है। यद्यपि, चुनौतियों का निराकरण करने और शासन व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन लाने के लिये निरंतर प्रयास, नेतृत्व और व्यवस्थित परिवर्तन की आवश्यकता है।

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