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29 Jul 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
सैद्धांतिक प्रश्न
दिवस 38: “हमारे विचार हमारे दृष्टिकोण को आकार देते हैं और हमारे दृष्टिकोण हमारे कार्यों को आकार देते हैं।” दृष्टिकोण, विचार और व्यवहार के बीच संबंध के संदर्भ में विवेचना कीजिये। (150 शब्द)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- मुख्य भाग में दृष्टिकोण, विचार और व्यवहार का संक्षिप्त परिचय दीजिये।
- चर्चा कीजिये कि ये तीनों किसी व्यक्ति के नैतिक और सामाजिक आचरण को आकार देने में किस प्रकार परस्पर जुड़े हुए हैं।
- प्रासंगिक उदाहरणों के साथ व्याख्या कीजिये।
- एक उपयुक्त टिप्पणी के साथ उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
मानव व्यवहार जटिल आंतरिक प्रक्रियाओं का परिणाम है, जिनमें दृष्टिकोण, विचार और व्यवहार गहनता से परस्पर संबद्ध हैं। संसार की संज्ञानात्मक व्याख्याओं के रूप में हमारे विचार, हमारे दृष्टिकोणों का निर्माण करते हैं और ये दृष्टिकोण बदले में हमारे व्यवहार का मार्गदर्शन करते हैं। यह शृंखला न केवल व्यक्तिगत आचरण, बल्कि व्यक्ति के नैतिक और पेशेवर निर्णयों को भी निर्धारित करती है।
मुख्य भाग:
विचारों, दृष्टिकोणों और व्यवहार के बीच संबंध
- विचार दृष्टिकोण को आकार देते हैं: विचार विश्वास, मूल्य और मानसिक व्याख्याएँ हैं। समय के साथ, सुसंगत विचार दृष्टिकोणों— लोगों, मुद्दों या स्थितियों के संदर्भ में अपेक्षाकृत स्थिर मानसिक स्थितियों में समेकित हो जाते हैं।
- उदाहरण: एक लोक सेवक जो निरंतर समानता के महत्त्व पर चिंतन करता है, उसके समावेशन-समर्थक दृष्टिकोण विकसित होने की संभावना है।
- दृष्टिकोण व्यवहार को प्रभावित करते हैं: एक बार जब कोई दृष्टिकोण बन जाता है, तो वह एक आंतरिक कसौटी बन जाती है जिसके माध्यम से कार्यों का मूल्यांकन किया जाता है। सकारात्मक दृष्टिकोण रचनात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करते हैं, जबकि नकारात्मक दृष्टिकोण पूर्वाग्रही कार्यों को जन्म दे सकते हैं।
- उदाहरण: पारदर्शिता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाला एक सरकारी अधिकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सक्रिय रूप से जानकारी का खुलासा कर सकता है।
- दृष्टिकोण का ABC मॉडल: यह मॉडल दर्शाता है कि हमारे विचार (ज्ञान) किस प्रकार दृष्टिकोण के माध्यम से कार्यों को जन्म देते हैं।
- Affective– भावात्मक (भावना): भावनात्मक प्रतिक्रिया
- Behavioural– व्यवहारिक (क्रिया): कार्य करने की प्रवृत्ति
- Cognitive– संज्ञानात्मक (विचार): विश्वास और विचार
- वास्तविक संसार के उदाहरण:
- महात्मा गांधी अहिंसा में विश्वास करते थे। इस विचार ने उनके दृष्टिकोण को आकार दिया और उपनिवेशवाद के खिलाफ उनके अहिंसक संघर्ष में अभिव्यक्त हुआ।
- सत्येंद्र दुबे जैसे मुखबिरों ने सार्वजनिक जवाबदेही में दृढ़ विश्वास के कारण नैतिक रूप से कार्य किया।
- लोक प्रशासन में निहितार्थ: लोक सेवकों के लिये नैतिक विचार, सकारात्मक दृष्टिकोण और सही व्यवहार का समन्वय सत्यनिष्ठा, जवाबदेही के साथ ही नागरिक-केंद्रित शासन सुनिश्चित करता है। किसी भी तरह का अलगाव अनैतिक आचरण या नीतिगत उदासीनता का कारण बन सकता है।
निष्कर्ष:
इस प्रकार, हमारे विचार आधार तैयार करते हैं, दृष्टिकोण सेतु का काम करते हैं, और व्यवहार अंतिम अभिव्यक्ति है। जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था, "हम वही हैं जो हमारे विचारों ने हमें बनाया है।" सही विचारों का विकास सार्वजनिक और निजी जीवन, दोनों में नैतिक दृष्टिकोण एवं ज़िम्मेदार कार्यों के निर्माण की कुंजी है।