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Mains Marathon

  • 30 Jul 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    दिवस 39: "नैतिक नेतृत्व की शुरुआत नैतिक चरित्र से होती है।" ऐसे पाँच नैतिक गुण बताइये जो एक नैतिक रूप से दृढ़ सिविल सेवक को केवल एक कुशल सिविल सेवक से अलग बनाते हैं। (150 शब्द)

    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • नैतिक नेतृत्व और नैतिक चरित्र को परिभाषित करते हुए उत्तर लेखन की शुरुआत कीजिये।
    • लोक सेवाओं में मात्र कार्यकुशलता और नैतिक दृढ़ता के बीच का अंतर स्पष्ट कीजिये तथा प्रमुख नैतिक गुणों का अभिनिर्धारण कीजिये।
    • उपयुक्त निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    लोक सेवाओं में नैतिक नेतृत्व केवल नियम-आधारित दक्षता तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह नैतिक चरित्र पर आधारित होता है। एक नैतिक रूप से सशक्त लोक सेवक न केवल परिणाम देता है, बल्कि न्याय, करुणा एवं सत्यनिष्ठा जैसे मूल्यों का भी पालन करता है। ऐसे चरित्र लक्षण जनहित और संवैधानिक नैतिकता पर आधारित शासन को सक्षम बनाते हैं, जिससे वह यांत्रिक या स्वार्थपूर्ण दक्षता से भिन्न हो जाता है।

    मुख्य भाग:

    • सत्यनिष्ठा: इसका तात्पर्य नैतिक मूल्यों और पेशेवर कार्यों के बीच, पर्यवेक्षण के अभाव में भी, एकरूपता से है।
      • उदाहरण: ‘मेट्रो मैन’ के रूप में विख्यात ई. श्रीधरन ने दिल्ली मेट्रो में अनुचित राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध करके सत्यनिष्ठा को कायम रखा।
    • सहानुभूति और करुणा: नैतिक रूप से दृढ़ नेता जनता की कठिनाइयों को समझते हैं तथा मानवीय एवं समावेशी शासन दृष्टिकोण के साथ प्रतिक्रिया देते हैं।
      • उदाहरण: IAS अधिकारी आर्मस्ट्रांग पाम ने लोगों की पीड़ा को समझते हुए, सामुदायिक सहयोग से मणिपुर में एक सड़क का निर्माण किया।
    • दृढ़ विश्वास का साहस: यह अधिकारियों को राजनीतिक या संस्थागत शक्तियों के दबाव या खतरे के बावजूद नैतिक रूप से कार्य करने में सक्षम बनाता है।
      • उदाहरण: अशोक खेमका, जिन्हें अवैध भूमि सौदों का विरोध करने के लिये जाना जाता है, ने बड़ी व्यक्तिगत हानि सहते हुए नैतिक साहस का उदाहरण प्रस्तुत किया।
    • जवाबदेही और उत्तरदायित्व: नैतिक लोक सेवक पारदर्शी होते हैं, ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हैं और किसी दूसरे पर दोषारोपण किये बिना असफलताओं से सीख लेते हैं।
      • सूचना का अधिकार (RTI), नागरिक चार्टर और संपत्ति का स्वैच्छिक प्रकटीकरण जैसे साधन सार्वजनिक जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।
    • निष्पक्षता और न्याय: बिना किसी पूर्वाग्रह या भेदभाव के न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित करता है, जिससे राज्य के नैतिक अधिकार में विश्वास बढ़ता है।
      • उदाहरण: , CAG के रूप में टी.एन. चतुर्वेदी ने अपने लेखापरीक्षा के दौरान अनियमितताओं को उजागर करके राजकोषीय न्याय को कायम रखने में योगदान दिया है।

    निष्कर्ष:

    यद्यपि दक्षता परिणाम देती है, लेकिन नैतिक चरित्र ही जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक वैधता को बनाए रखता है। सत्यनिष्ठा, सहानुभूति, साहस, निष्पक्षता एवं जवाबदेही जैसे नैतिक गुणों वाले लोक सेवक न केवल नीतियों को लागू करते हैं, बल्कि संविधान की भावना को मूर्त रूप देते हुए शासन के मानकों को भी उच्च बनाते हैं।

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