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29 Jul 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
सैद्धांतिक प्रश्न
दिवस 38: “बच्चे मूल्यों को निर्देश से नहीं, बल्कि अवलोकन से सीखते हैं।” माता-पिता, शिक्षकों तथा समाजिक आदर्श-व्यक्तित्वों के अनुकरण द्वारा युवाओं के नैतिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण कीजिये। (250 शब्द)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- इस विचार का संक्षिप्त स्पष्टीकरण दीजिये कि बच्चों की नैतिक शिक्षा अवलोकन पर आधारित होती है।
- युवाओं पर रोल मॉडल के रूप में माता-पिता, शिक्षकों और समाजिक आदर्श-व्यक्तित्वों के प्रभाव का विश्लेषण कीजिये।
- प्रासंगिक उदाहरणों के साथ व्याख्या कीजिये।
- आगे की राह बताते हुए उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
बच्चे नैतिक शिक्षा के केवल निष्क्रिय ग्रहणकर्त्ता नहीं होते, बल्कि वे अपने आसपास के व्यवहार को देखकर सक्रिय रूप से मूल्यों को आत्मसात करते हैं। यह विचार अल्बर्ट बंडुरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार व्यक्ति, विशेषकर बच्चे, दूसरों को देखकर सीखते हैं। नैतिक विकास के संदर्भ में माता-पिता, शिक्षक तथा सामाजिक आदर्श-व्यक्तित्व मूल्य संचरण के प्रभावशाली माध्यम बन जाते हैं।
मुख्य भाग:
माता-पिता की भूमिका: प्रथम नैतिक आधार
- परिवार वह प्राथमिक परिवेश होता है जहाँ बच्चे पहली बार मानवीय व्यवहारों को देखना और समझना शुरू करते हैं।
- जब माता-पिता आपसी संवाद में सम्मान, सद्भाव, सत्यनिष्ठा तथा संघर्षों के समाधान जैसे गुणों का प्रदर्शन करते हैं, तो ये विशेषताएँ बच्चों में स्वतः विकसित होती हैं।
- UNICEF के अनुसार, 7 वर्ष की आयु से पहले बच्चों के नैतिक अभिविन्यास का 60% से अधिक हिस्सा प्रारंभिक पारिवारिक प्रभाव से निर्मित होता है।
- उदाहरण: एक माता-पिता जो घरेलू कामगारों का शिष्टतापूर्वक स्वागत करते हैं और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करते हैं, वे अपने बच्चों को यह मूल्य सिखाते हैं कि सभी के साथ सामाजिक स्थिति की परवाह किये बिना समानता और सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिये।
शिक्षक: शिक्षा में नैतिक वास्तुकार
- शिक्षक एक संरचित वातावरण में नैतिक अधिकार रखते हैं।
- समावेशीता, अनुशासन और निष्पक्षता के प्रति उनका दृष्टिकोण छात्रों की उचित एवं अनुचित की धारणा को आकार देता है।
- उदाहरण: यदि कोई शिक्षक सभी पृष्ठभूमियों के छात्रों को समान रूप से ध्यान देता है, तो वह निष्पक्षता एवं सामाजिक न्याय का व्यवहारिक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सामाजिक आदर्श-व्यक्तित्व: सार्वजनिक आचरण का व्यापक प्रभाव
- सार्वजनिक हस्तियाँ—राजनेता, मशहूर हस्तियाँ और लोक सेवक मीडिया, सोशल मीडिया एवं सार्वजनिक संवाद के माध्यम से व्यापक प्रभाव डालते हैं।
- सकारात्मक आदर्श:
- सुधा मूर्ति अपनी विनम्रता और परोपकार के माध्यम से नैतिक सेवा को प्रेरित करती हैं।
- रतन टाटा ने मुनाफे पर मूल्यों को प्राथमिकता देकर निगमित नैतिकता में मानक स्थापित किये हैं।
- नकारात्मक प्रभाव:
- जब युवा नेता या प्रसिद्ध व्यक्तियों से भ्रष्टाचार, हेट स्पीच या स्त्रीविरोधी व्यवहार देखते हैं, तो यह नैतिक मूल्यों को कमज़ोर करता है और असामाजिक व्यवहार को सामान्य बना सकता है।
निष्कर्ष:
जैसा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था— "यदि कोई देश भ्रष्टाचारमुक्त होना चाहता है और सुंदर विचारों वाले नागरिकों का राष्ट्र बनना चाहता है, तो मेरा दृढ़ विश्वास है कि समाज के तीन प्रमुख घटक ऐसा परिवर्तन ला सकते हैं: पिता, माता और शिक्षक।"
इसलिये, इन तीनों स्तंभों को सशक्त बनाना आवश्यक है ताकि भावी पीढ़ी में नैतिक चेतना विकसित की जा सके।