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28 Jul 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
सैद्धांतिक प्रश्न
दिवस 37: "एक नेता अपनी शक्ति के कारण महान नहीं बनता, बल्कि दूसरों को सशक्त बनाने की अपनी क्षमता के कारण होता है।" – जॉन मैक्सवेल
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस उद्धरण का आपके लिये क्या अर्थ है? (150 शब्द)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- वर्तमान शासन और नेतृत्व के संदर्भ में इस उद्धरण की व्याख्या कीजिये।
- उदाहरणों सहित समझाइये कि वास्तविक नेतृत्व दूसरों को कार्य सौंपने, प्रेरित करने और उनका पोषण करने में किस प्रकार निहित है।
- उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
जॉन मैक्सवेल का यह उद्धरण नेतृत्व की महानता को केवल अधिकार के प्रयोग के रूप में नहीं, बल्कि दूसरों के उत्थान की क्षमता के रूप में परिभाषित करता है। आज के समय में, जब नेतृत्व का मूल्यांकन प्रभाव और समावेशन के आधार पर होता है, तो दूसरों को सशक्त बनाना सतत् परिवर्तन एवं नैतिक लोक सेवा के लिये अनिवार्य बन जाता है।
मुख्य भाग:
- सशक्तीकरण पर आधारित नेतृत्व, व्यक्तिगत करिश्मा या अधिकार से परे संस्थागत समुत्थानशक्ति को विकसित करता है।
- डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम ने युवा वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन किया और युवाओं में दूरदर्शिता-आधारित नेतृत्व को बढ़ावा दिया।
- सच्चे नेता सत्ता का विकेंद्रीकरण करते हैं, जिससे दूसरों को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सार्थक योगदान करने में सक्षम बनाया जाता है।
- महात्मा गांधी ने नैतिक अधिकार के माध्यम से नेतृत्व किया और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जन भागीदारी को प्रोत्साहित किया।
- क्षेत्रीय अधिकारियों को सशक्त बनाने वाले लोक प्रशासक उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन सुनिश्चित करते हैं।
- स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्रामीण स्वच्छता में स्वयं सहायता समूहों को शामिल करने वाले ज़िला मजिस्ट्रेट सहयोगात्मक नेतृत्व का प्रदर्शन करते हैं।
- सशक्त नेतृत्व टीमों और संस्थानों में विश्वास, नवाचार और स्वामित्व को बढ़ावा देता है।
- ISRO की टीम संस्कृति, जहाँ वैज्ञानिकों पर भरोसा किया जाता है और उन्हें श्रेय दिया जाता है, ने अंतरिक्ष अभियानों में वैश्विक उत्कृष्टता हासिल की है।
- हितधारकों, विशेष रूप से सीमांत समूहों का समावेश, समता पर आधारित नैतिक नेतृत्व को दर्शाता है।
- IAS अधिकारी आर्मस्ट्रांग पाम ने राज्य के धन के बिना सुदूर मणिपुर में सड़कें बनाने के लिये स्थानीय समुदायों को संगठित किया।
- कर्मचारियों को सशक्त बनाने वाले कॉर्पोरेट नेता नैतिक, सतत् और समावेशी व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देते हैं।
- इंफोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने स्वायत्तता, पारदर्शिता और मूल्य-आधारित कार्य संस्कृति के साथ पेशेवरों को सशक्त बनाया।
- दूसरों को सशक्त बनाने से समाज में गुणात्मक प्रभाव उत्पन्न होते हैं, जिससे लोकतांत्रिक और सहभागी मूल्यों को बल मिलता है।
- शिक्षकों और स्वयंसेवकों के नेतृत्व में चुनावी और डिजिटल साक्षरता अभियानों ने जागरूक नागरिक भागीदारी का विस्तार किया है।
- नैतिक नेतृत्वकर्त्ता आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं ताकि उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति न होने पर भी मूल्य संस्थागत रूप से बने रहें।
- किरण बेदी ने तिहाड़ जेल में कैदियों का मार्गदर्शन किया तथा शिक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से उनमें बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई।
निष्कर्ष:
आज के जटिल शासन और तेज़ी से बदलते दौर में किसी नेता की महानता आदेश देने में नहीं, बल्कि दूसरों को सक्षम बनाने में है। ऐसा नेतृत्व संस्थागत नैतिकता, सामाजिक विश्वास को बढ़ाता है और निःस्वार्थ सेवा व नैतिक सशक्तीकरण की संस्कृति को प्रेरित करता है।