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Mains Marathon

  • 30 Jul 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    दिवस 39: “एक सिविल सेवक सत्तारूढ़ दल का नहीं, बल्कि संविधान का सेवक होता है।” लोक सेवा में नैतिक तटस्थता बनाये रखने में गैर-पक्षपातपूर्णता के महत्त्व का परीक्षण कीजिये। (250 शब्द)

    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • गैर-पक्षपात का अर्थ और लोक सेवा में नैतिक तटस्थता के लिये इसकी प्रासंगिकता को समझाते हुए उत्तर लेखन की शुरुआत कीजिये।
    • लोक सेवकों को राजनीतिक हितों के बजाय संविधान के प्रति किस प्रकार जवाबदेह होना चाहिये, प्रासंगिक नैतिक तर्क और उदाहरणों के साथ परीक्षण कीजिये।
    • उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    सिविल सेवकों की निष्ठा किसी सरकार के प्रति नहीं, बल्कि संविधान और जनहित के प्रति होती है। गैर-पक्षपातपूर्णता अर्थात राजनीतिक रूप से तटस्थ बने रहने की प्रतिबद्धता, नैतिक तटस्थता बनाए रखने का मूल आधार है। यह तटस्थता लोक सेवा में निष्पक्षता, न्यायप्रियता और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करती है। साथ ही यह शासन को राजनीतिक विचारधाराओं या पक्षपातपूर्ण दबावों से प्रभावित होने से बचाती है।

    मुख्य भाग:

    • गैर-पक्षपातपूर्णता: गैर-पक्षपातपूर्णता नियम-आधारित शासन सुनिश्चित करती है, लोक सेवकों को सत्तारूढ़ राजनीतिक हितों द्वारा हेरफेर किये जाने से बचाती है।
      • यह प्रशासनिक निर्णयों में राजनीतिक स्वार्थ के बजाय संवैधानिक सर्वोच्चता के सिद्धांत को सुदृढ़ करती है।
      • उदाहरण: मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में टी.एन. शेषन ने राजनीतिक दबाव का विरोध किया और चुनावी तटस्थता को सुदृढ़ किया।
    • नैतिक तटस्थता: यह समाज के विभिन्न वर्गों (विशेषकर भारत जैसे बहुलवादी लोकतंत्रों में) के बीच विश्वास और वैधता को बढ़ावा देती है।
      • नागरिक राजनीतिक संबद्धता, जाति या क्षेत्र की परवाह किये बिना समान व्यवहार की अपेक्षा करते हैं।
      • उदाहरण: आपदा राहत कार्यों के दौरान, लोक सेवकों को राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्रों को वरीयता दिये बिना सहायता प्रदान करनी चाहिये।
    • पक्षपातपूर्णता: यह संस्थागत शुचिता को नष्ट करती है, जिससे पक्षपातपूर्ण स्थानांतरण, राजनीतिक जाँच और जनहित से समझौता होता है।
      • यह निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों को कमज़ोर करती है, सिविल सेवाओं में मनोबल एवं स्वतंत्रता को कमज़ोर करती है।
      • उदाहरण: सत्ता परिवर्तन के बाद बड़े पैमाने पर स्थानांतरण के मामले प्रायः प्रशासनिक तंत्र के राजनीतिकरण को उजागर करते हैं।
    • गैर-पक्षपातपूर्णता: यह दीर्घकालिक नीति निरंतरता का समर्थन करती है, राजनीतिक प्रेरणाओं से प्रेरित आकस्मिक उलट-फेर को रोकती है।
      • यह सुनिश्चित करती है कि सुधार और कल्याणकारी योजनाएँ विकासात्मक लक्ष्यों की पूर्ति करें, न कि चुनावी एजेंडे की।
      • उदाहरण: IAS अधिकारी एस.आर. शंकरन ने अविभाजित आंध्र प्रदेश में विभिन्न सरकारों में सामाजिक न्याय नीतियों को लगातार लागू किया।
    • संवैधानिक मूल्य: लोक सेवकों को किसी राजनीतिक विचारधारा के प्रति नहीं, बल्कि 'संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता' प्रदर्शित करनी चाहिये।
      • अनुच्छेद 311 और 309, अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के साथ, तटस्थता एवं निष्पक्षता की माँग करते हैं।
      • तटस्थता का उल्लंघन संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन करता है और सेवा-नैतिकता को विकृत करता है।
    • कर्त्तव्य नैतिकता: कांट के कर्त्तव्य नैतिकता जैसे नैतिक सिद्धांत, परिणामों या संबद्धताओं पर नहीं, बल्कि कर्त्तव्य के आधार पर कार्य करने पर बल देते हैं।
      • लोक सेवकों को राजनीतिक निर्देशों से स्वतंत्र, संविधान को एक नैतिक दायित्व के रूप में बनाए रखना चाहिये।
    • प्रशिक्षण: LBSNAA जैसे प्रशिक्षण संस्थान नैतिक शासन में एक आधारभूत मूल्य के रूप में गैर-पक्षपात पर ज़ोर देते हैं।
      • प्रशासन में मूल्यों पर मॉड्यूल, सिविल सेवा पहचान के केंद्र के रूप में नैतिक तटस्थता को सुदृढ़ करते हैं।
    • नैतिक असहमति रखने वाले लोग और मुखबिर आमतौर पर निष्पक्ष व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं।
      • उदाहरण: IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने राजनीतिक प्रतिरोध के बावजूद AIIMS में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया।
    • लोक शिकायत: सामाजिक अंकेक्षण, सूचना का अधिकार (RTI) और लोक शिकायत प्रणालियाँ तभी प्रभावी ढंग से काम करती हैं जब प्रशासकों को राजनीतिक रूप से तटस्थ माना जाता है।
      • ये तंत्र बिना किसी पूर्वाग्रह या विलंब के न्याय प्रदान करने के लिये अधिकारियों की निष्पक्षता पर निर्भर करते हैं।

    निष्कर्ष:

    गैर-पक्षपातपूर्णता वह नैतिक मार्गदर्शक है जो लोक सेवकों को संविधान के उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए सेवा करने के लिये प्रेरित करती है, न कि राजनीतिक शासन की।  यह शासन व्यवस्था में वस्तुनिष्ठता, निष्पक्षता तथा न्याय के मूल्यों की रक्षा करती है। गैर-पक्षपातपूर्णता को बनाए रखना यह सुनिश्चित करता है कि लोक सेवा क्षणिक राजनीतिक हितों से परे, लोकतांत्रिक जवाबदेही और नैतिक वैधता का एक स्तंभ बनी रहे।

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