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Mains Marathon

  • 01 Aug 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़

    दिवस 41- 

    आप राज्य शहरी विकास विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में लोक सूचना अधिकारी (PIO) के पद पर कार्यरत हैं। एक दिन, आपको एक पत्रकार से एक RTI आवेदन प्राप्त होता है जिसमें पिछले तीन वर्षों में एक हाई-प्रोफाइल स्मार्ट सिटी परियोजना के लिये किये गए टेंडरों और वित्तीय आवंटन का विवरण मांगा गया है। मांगे गए दस्तावेज़ों में आंतरिक फाइल नोटिंग, अनुमोदन ज्ञापन, निजी ठेकेदारों के साथ पत्राचार और बैठकों के विवरण शामिल हैं।

    जब आप दस्तावेज़ों का परीक्षण करते हैं, तो पाते हैं कि कुछ फाइलों से प्रक्रियागत चूक, लागत में बढ़ोतरी तथा अधिकारियों और मंत्रियों के बीच आंतरिक असहमति उजागर हो सकती है। विशेष रूप से एक फाइल में आपने स्वयं विक्रेता चयन को लेकर नैतिक आपत्तियाँ दर्ज की थीं, किंतु परियोजना को तब भी स्वीकृति दे दी गई थी। इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक करने से ये अनियमितताएँ सामने आ सकती हैं और वरिष्ठ अधिकारियों एवं निर्वाचित प्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा को आघात पहुँच सकता है।

    इसी बीच, एक वरिष्ठ प्रशासक आपसे अनौपचारिक रूप से संपर्क करता है और आपको ‘व्यापक प्रशासनिक स्थिरता’ और प्रतिष्ठा के जोखिम का हवाला देते हुए जवाब देने में विलंब करने या कुछ संवेदनशील फाइलें ‘हटा देने’ की सलाह देता है। आप स्वयं भी इस बात को लेकर आशंकित हैं कि अगर आप अलिखित अपेक्षाओं के विरुद्ध काम करते हैं तो आपका स्थानांतरण हो सकता है या आपके कॅरियर  में ठहराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस बीच, पत्रकार नियमित रूप से मामले की जाँच कर रहा है और एक ऐसी खबर प्रकाशित करने की योजना बना रहा है जिससे जनता में आक्रोश फैल सकता है।

    1. इस प्रकरण में कौन-कौन से नैतिक द्वंद्व मौजूद हैं?
    2. इस स्थिति में आपके पास कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?
    3. प्रत्येक विकल्प का मूल्यांकन कीजिये तथा बताइये कि आप कौन-सा विकल्प अपनायेंगे और क्यों? (250 शब्द)
    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • संदर्भ स्थापित करने के लिये स्थिति का संक्षिप्त परिचय दीजिये।
    • इसमें शामिल नैतिक दुविधाओं का अभिनिर्धारण कीजिये।
    • इस स्थिति में उपलब्ध विकल्पों का उल्लेख कीजिये।
    • इन विकल्पों में से प्रत्येक का मूल्यांकन कीजिये तथा वह विकल्प चुनिये जिसे आप अपनाना चाहेंगे।
    • अपने चयन के औचित्य प्रदान कीजिये।
    • किसी नैतिक विचारक या नैतिक सिद्धांत के उद्धरण के साथ उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय: 

    शहरी विकास विभाग में एक जन सूचना अधिकारी (PIO) के रूप में, मुझे सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जनहित में जानकारी प्रदान करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। एक पत्रकार ने स्मार्ट सिटी परियोजना से संबंधित दस्तावेज़ों की मांग करते हुए एक RTI दायर की है। इस अनुरोध से प्रक्रिया संबंधी अनियमितताओं और नैतिक चिंताओं का खुलासा होता है, जिनमें एक ऐसी फाइल भी शामिल है जिसमें ठेकेदार के चयन पर मेरी स्वयं की आपत्तियाँ दर्ज हैं। हालाँकि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अनौपचारिक रूप से मुझ पर दबाव बना रहे हैं कि मैं संवेदनशील फाइलों को जारी करने में विलंब करूँ या उन्हें हटा दूँ।

    यह स्थिति विधिक कर्त्तव्यों, पेशेवर जोखिमों और व्यक्तिगत विवेक से जुड़ी एक विशिष्ट नैतिक दुविधा प्रस्तुत करती है।

    मुख्य भाग:

    A. सम्मिलित नैतिक दुविधाएँ

    • पारदर्शिता बनाम संस्थागत दबाव:
      • पारदर्शिता बनाए रखना सूचना का अधिकार अधिनियम और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होगा।
      • जबकि संस्थागत सलाह के आगे झुकना विधिक और नैतिक मानकों से समझौता करना होगा।
    • जनहित बनाम प्रशासनिक स्थिरता:
      • सूचना का पूर्ण प्रकटन सुधारों और जवाबदेही को बढ़ावा दे सकता है।
      • हालाँकि, इससे विभाग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच सकता है और संभवतः शासन व्यवस्था बाधित हो सकती है।
    • सत्यनिष्ठा बनाम कॅरियर सुरक्षा:
      • नैतिक रूप से कार्य करने से स्थानांतरण या ठहराव का जोखिम हो सकता है।
      • इसके विपरीत, अनौपचारिक निर्देशों का पालन करने से कॅरियर में सहजता बनी रहती है, लेकिन सत्यनिष्ठा से समझौता होता है।
    • अंतरात्मा या नैतिक बोध:
      • मैंने पहले ही अनैतिक प्रथाओं की ओर ध्यान दिलाया था। इन दस्तावेज़ों को दबाना मेरे नैतिक रुख से विश्वासघात होगा।

    B. उपलब्ध विकल्प

    विकल्प 1: सलाह के अनुसार फाइलों को विलंबित करना या ‘हटा देना’

    • पक्ष: 
      • राजनीतिक या प्रशासनिक प्रतिघात से स्वयं की रक्षा करता है; संस्थागत स्तर पर सतही तौर पर शांति बनी रहती है।
    • विपक्ष:
      • RTI अधिनियम की धारा 6 और 7 का उल्लंघन करता है।
      • शासन में जनता के विश्वास को ठेस पहुँचाता है।
      • नैतिक आचरण और कानूनी ज़िम्मेदारी का उल्लंघन करता है।
      • संस्थागत मानदंडों के गैर-अनुपालन और क्षरण के लिये एक मिसाल कायम करता है।

    विकल्प 2: आंशिक रूप से जानकारी का खुलासा

    • पक्ष: 
      • वरिष्ठों को शर्मिंदगी से बचाते हुए सूचना प्रकटीकरण में संतुलन बनाता है।
    • विपक्ष:
      • चयनात्मक रूप से सूचना का प्रकटीकरण भ्रामक होता है और यह जवाबदेही को कमज़ोर करता है।  
      • इसे कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है।
      • यह न केवल सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना के विरुद्ध है, बल्कि मेरी नैतिक ज़िम्मेदारी का भी उल्लंघन है।

    विकल्प 3: RTI मानदंडों के अनुसार सूचना का पूर्ण प्रकटीकरण

    • पक्ष:
      • संवैधानिक मूल्यों और जनहित को बनाए रखता है।
      • पारदर्शिता के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाता है।
      • व्यक्तिगत विवेक और पहले उठाई गई नैतिक आपत्तियों के अनुरूप है।
      • कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करता है और RTI कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई से बचाता है।
    • विपक्ष: 
      • स्थानांतरण या प्रशासनिक बाधाओं जैसे व्यक्तिगत जोखिम उत्पन्न कर सकता है।

    C. चयनित कार्यवाही: पूर्ण और सत्यनिष्ठ जानकारी देना

    • मुझे विकल्प 3 का चयन करना चाहिये: सभी प्रासंगिक दस्तावेज़ों का पूर्ण प्रकटीकरण, सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 के तहत दी गई छूट के अधीन।
    • औचित्य:
      • विधिक अधिदेश: सूचना का अधिकार अधिनियम, केवल उन्हीं जानकारियों को रोके जाने या छिपाने की अनुमति देता है जो अपवाद के अंतर्गत आती हैं। एक सार्वजनिक सूचना अधिकारी (PIO) के रूप में मेरा कर्त्तव्य है कि मैं मौखिक निर्देशों के बजाय विधि के अनुसार कार्य करूँ।
      • नैतिक कर्त्तव्य: विवेक और सत्यनिष्ठा सत्यनिष्ठा की माँग करते हैं, विशेषकर जब सार्वजनिक संसाधन शामिल हों।
      • जनहित: नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि विकास परियोजनाएँ किस प्रकार क्रियान्वित की जाती हैं और क्या जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
      • मुखबिर की ज़िम्मेदारी: पहले से ही नैतिक चिंताएँ उठाकर, मैंने कार्रवाई करने का नैतिक दायित्व स्वीकार कर लिया है।
    • यदि मुझे धमकी दी जाती है, तो मुझे उठाए गए हर कदम का दस्तावेज़ीकरण करना चाहिये, उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से सूचित करना चाहिये और यदि आवश्यक हो, तो सूचना आयोग से भी संपर्क करना चाहिये।

    निष्कर्ष:

    शासन में लिये जाने वाले निर्णयों का उद्देश्य अधिकतम लोगों के अधिकतम हित को सुनिश्चित करना होना चाहिये, साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिये। जैसा कि जॉन स्टुअर्ट मिल ने कहा है — "जिस व्यक्ति के पास ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिये वह लड़ने को तैयार हो और जो अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा से अधिक किसी अन्य बात की परवाह नहीं करता, वह एक निंदनीय प्राणी है।" 

    नैतिक आचरण प्रायः सार्वजनिक हित में व्यक्तिगत जोखिम उठाने की माँग करता है।

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