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01 Aug 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
केस स्टडीज़
दिवस 41-
आप भारत के पूर्वी क्षेत्र के एक अर्द्ध-शहरी ज़िले के ज़िला कलेक्टर हैं। छह महीने पूर्व एक नदी पर बने एक प्रमुख सड़क पुल का बड़े धूमधाम से उद्घाटन किया गया था। यह पुल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत बनाया गया था, जिसमें राज्य सरकार ने भी सह-वित्तपोषण किया था। इसे ग्रामीण संपर्क और विकास का प्रतीक बताया गया था।
कल भारी वर्षा के कारण यह पुल ढह गया, जिससे 17 लोगों की मृत्यु हो गई, जिनमें स्कूल बस में सवार बच्चे और साप्ताहिक बाज़ार की ओर जा रहे किसान शामिल थे। प्रारंभिक जाँच में पाया गया कि निर्माण में निम्न गुणवत्ता सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, चुनाव से पहले निर्माण कार्य जल्दबाज़ी में किया गया था और सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी की गई थी। यह ठेका एक राजनीतिक रूप से जुड़े ठेकेदार को दिया गया था, जिसने ज़िले में कई अन्य बुनियादी अवसंरचना परियोजनाओं का निर्माण किया है।
ज़िला प्रशासन के प्रमुख के रूप में, आपने लोक निर्माण विभाग (PWD) और तृतीय-पक्ष गुणवत्ता ऑडिट द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों के आधार पर, निर्माण कार्य पूरा होने की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किये थे। नागरिक समाज संगठन और मीडिया अब एक असुरक्षित अवसंरचना को मंज़ूरी देने में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। पीड़ितों के परिवार जवाबदेही और मुआवज़े की माँग कर रहे हैं। राज्य सरकार ने न्यायिक जाँच की घोषणा की है।
अब आप न केवल प्रशासनिक निरीक्षण के लिये उत्तरदायी लोक सेवक के रूप में बल्कि न्याय, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वास सुनिश्चित करने वाले राज्य के प्रतिनिधि के रूप में कड़े सार्वजनिक जाँच के घेरे में हैं।
- इस प्रकरण में कौन-कौन से नैतिक मुद्दे अंतर्निहित हैं?
- आप तत्काल इस संकट की स्थिति में किस प्रकार प्रतिक्रिया देंगे?
- संस्थागत संकट के इस दौर में कौन-कौन से संवैधानिक मूल्य और पेशेवर आचार संहिता आपके निर्णयों का मार्गदर्शन करेंगे?
- भविष्य में बुनियादी अवसंरचना के विकास में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिये आप कौन-से सुधार सुझाएँगे? (250 शब्द)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- संदर्भ स्थापित करने के लिये स्थिति का संक्षेप में परिचय दीजिये।
- इसमें शामिल नैतिक दुविधाओं का अभिनिर्धारण कीजिये।
- अपनी तात्कालिक कार्ययोजना का उल्लेख कीजिये।
- मार्गदर्शक संवैधानिक मूल्यों और व्यावसायिक आचार संहिताओं पर चर्चा कीजिये।
- भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिये सुधारों का सुझाव दीजिये।
- किसी नैतिक विचारक या नैतिक सिद्धांत के उद्धरण के साथ उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
हाल ही में उद्घाटित पुल के ढहने और 17 लोगों की दुखद मृत्यु से गंभीर नैतिक, प्रशासनिक और संवैधानिक प्रश्न उठते हैं। ज़िला कलेक्टर के रूप में दायित्व केवल प्रक्रियात्मक स्वीकृति तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होता है कि विकास कार्य जनकल्याण को समर्पित हों और उनमें निष्ठा तथा न्याय के उच्चतम मानकों का पालन हो।
मुख्य भाग:
A. शामिल नैतिक मुद्दे
- लापरवाही और कर्त्तव्य की उपेक्षा: विनिर्माण में निम्नस्तरीय सामग्री को प्रशासन द्वारा स्वीकृति देना यह दर्शाता है कि आवश्यक जाँच-पड़ताल और निगरानी में गंभीर कमी रही है।
- हितों का टकराव: एक राजनीतिक रूप से जुड़े ठेकेदार की संलिप्तता यह संकेत देती है कि ठेका प्रक्रिया में नैतिकता से समझौता हुआ है।
- प्रत्यायोजित ज़िम्मेदारी बनाम नैतिक ज़िम्मेदारी: विभागीय और तृतीय-पक्ष रिपोर्टों के आधार पर हस्ताक्षर करना उच्च अधिकारियों की नैतिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
- जन विश्वास की हानि: संस्थागत विश्वसनीयता से समझौता होता है, जिससे शासन में नागरिकों का विश्वास कम होता है।
- विलंबित न्याय और पीड़ित मुआवज़ा: नैतिक अनिवार्यता प्रभावित परिवारों के प्रति शीघ्र और संवेदनशील प्रतिक्रिया है।
B. तत्काल संकट प्रतिक्रिया
ज़िला कलेक्टर के रूप में, मुझे:
- आपातकालीन राहत की शुरूआत: प्रभावित लोगों की जान बचाने, चिकित्सा सहायता प्रदान करने और पीड़ितों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिये आपदा प्रतिक्रिया इकाइयों को सक्रिय करना चाहिये।
- पीड़ित परिवारों का समर्थन: शोक संतप्त परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहिये, संवेदना व्यक्त करना चाहिये, अनुग्रह राशि की व्यवस्था करनी चाहिये और दीर्घकालिक सहायता का आश्वासन देना चाहिये।
- प्रशासनिक उपाय:
- लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निलंबित करना चाहिये और ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट में डालना चाहिये।
- राज्य सरकार से तत्काल, स्वतंत्र तकनीकी जाँच का अनुरोध करना चाहिये।
- न्यायिक जाँच में पूर्ण सहयोग करना चाहिये और सभी दस्तावेज़ों का खुलासा करना चाहिये।
- पारदर्शिता सुनिश्चित करना: प्रशासनिक चूक को स्वीकार करते हुए एक प्रेस वार्ता आयोजित करना चाहिये और किये जा रहे सुधारात्मक उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करनी चाहिये।
C. संवैधानिक मूल्यों और व्यावसायिक नैतिकता का मार्गदर्शन
- जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21): यह घटना इस जीवन के अधिकार के मूल अधिकार का उल्लंघन करती है; इसलिये, मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिये।
- विधि के समक्ष समता (अनुच्छेद 14): कोई भी व्यक्ति या ठेकेदार जाँच से परे नहीं होना चाहिये।
- सत्यनिष्ठा और जवाबदेही (अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम): नैतिक उत्तरदायित्व स्वीकार करना नैतिक शासन का अभिन्न अंग है।
- सहानुभूति और करुणा: प्रभावित परिवारों के दुःख को कम करने में आवश्यक है।
- पारदर्शिता: संस्थागत विश्वास पुनः स्थापित करने के लिये महत्त्वपूर्ण है।
D. भविष्य की त्रासदियों को रोकने के लिये प्रणालीगत सुधार
- निविदा तंत्र में सुधार: ई-निविदा, स्वतंत्र जाँच और गैर-राजनीतिक खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिये।
- लेखा परीक्षा तंत्र को सुदृढ़ करना: गुणवत्तापूर्ण रिपोर्टों के सार्वजनिक प्रकटीकरण के लिये विश्वसनीय तृतीय-पक्ष एजेंसियों को शामिल करना चाहिये।
- वास्तविक समय निगरानी: प्रगति और गुणवत्ता पर नज़र रखने के लिये ड्रोन, जियो-टैगिंग और रिमोट सेंसिंग का उपयोग करना चाहिये।
- मुखबिर संरक्षण: व्यवस्था के भीतर नैतिक असहमति के लिये सुरक्षित माध्यम बनाना चाहिये।
- नैतिकता प्रशिक्षण और सतर्कता: सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी पर इंजीनियरों, ठेकेदारों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिये नियमित कार्यशालाएँ आयोजित की जानी चाहिये।
निष्कर्ष:
पुल का ढहना केवल एक संरचनात्मक विफलता नहीं, बल्कि एक नैतिक विफलता भी है, जो निगरानी, जवाबदेही और नैतिक शासन में कमियों को दर्शाता है। जनता के विश्वास के संरक्षक के रूप में, लोक सेवकों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि विकास परियोजनाओं में राजनीतिक स्वार्थ के बजाय मानव सुरक्षा, पारदर्शिता एवं न्याय को प्राथमिकता दी जाए।
जैसा कि जॉन रॉल्स ने कहा था, “न्याय सामाजिक संस्थाओं का पहला गुण है।” इस सिद्धांत को बनाए रखने से यह सुनिश्चित होता है कि शासन निष्पक्षता और प्रत्येक नागरिक की गरिमा की सुरक्षा पर आधारित रहे।