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बिल्स और एक्ट्स: सूचना प्रौद्योगिकी नियम में संशोधन

  • 05 Dec 2022
  • 12 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (IT Rules, 2021) में संशोधनों को अधिसूचित किया है।

  • भारत ने वर्ष 2021 में सोशल मीडिया मध्यस्थों (SMI) को विनियमित करने के मुद्दे को बनाए रखने के लिये SMI पर अपने एक दशक पुराने नियमों को IT नियम, 2021 से बदल दिया, जिसका मुख्य उद्देश्य एक खुला, सुरक्षित और विश्वसनीय इंटरनेट सुनिश्चित करने के लिये SMI को उत्तरदायी बनाना था।

नए संशोधन क्या हैं?

  • सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिये नए दिशा-निर्देश:
    • वर्तमान में मध्यस्थों के लिये केवल हानिकारक/गैरकानूनी सामग्री की कुछ श्रेणियों को अपलोड नहीं करने के बारे में उपयोगकर्त्ताओं को सूचित करना आवश्यक है। ये संशोधन उपयोगकर्त्ताओं को ऐसी सामग्री अपलोड करने से रोकने हेतु उचित प्रयास करने के लिये मध्यस्थों पर कानूनी दायित्व डालते हैं। नया प्रावधान यह सुनिश्चित करेगा कि मध्यस्थ का दायित्व केवल औपचारिकता भर नहीं है।
    • संशोधन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मध्यस्थों को उपयोगकर्त्ताओं के गोपनीयता और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए गारंटीकृत अधिकारों का सम्मान करने की आवश्यकता है।
    • संशोधन यह भी अनिवार्य करती हैं कि प्लेटफॉर्म के "नियम और विनियम, गोपनीयता नीति और उपयोगकर्ता समझौता" को संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी भाषाओं में उपलब्ध कराया जाना चाहिये।
  • नियम 3 में संशोधन:
    • नियम 3 के उपखंड 1 (नियम 3(1)(बी)(ii)) के आधार को 'मानहानिकारक' और 'अपमानजनक' शब्दों को हटाकर युक्तिसंगत बनाया गया है।
    • कोई भी सामग्री मानहानिकारक है या अपमानजनक, इसका निर्धारण न्यायिक समीक्षा के माध्यम से किया जाएगा।
    • नियम 3 (नियम 3(1)(बी)) के उपखंड 1 में कुछ सामग्री श्रेणियों को विशेष रूप से गलत सूचना और विभिन्न धार्मिक/जाति समूहों के बीच हिंसा भड़काने वाली सामग्री से निपटने के लिये फिर से परिभाषित किया गया है।
  • प्रतिबंधित सामग्री को शीघ्रता से हटाना:
    • SMI अब शिकायत उत्पन्न होने पर सामग्री की छह निषिद्ध श्रेणियों के संबंध में जानकारी या संचार लिंक को हटाने के लिये बाध्य हैं। शिकायत किये जाने के 72 घंटे के भीतर उन्हें ऐसी जानकारी को हटाना होगा। सामग्री के प्रसार को देखते हुए सामग्री के प्रसार को रोकने के लिये यह एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
  • शिकायत अपीलीय समिति (समितियों) की स्थापना:
    • उपयोगकर्त्ता द्वारा की जाने वाली शिकायतों पर मध्यस्थों की निष्क्रियता या उनके द्वारा लिये गए निर्णयों के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने के लिये शिकायत अपील समिति (समितियों) की स्थापना की जाएगी।
    • हालाँकि उपयोगकर्त्ताओं को हमेशा किसी भी उपाय के लिये अदालतों से संपर्क करने का अधिकार होगा।
    • इसके अलावा आईटी नियम, 2021 जीएसी को अपने आदेशों को लागू करने के लिये कोई स्पष्ट शक्ति प्रदान नहीं करते हैं। अंत में यदि उपयोगकर्त्ता अदालतों और जीएसी दोनों को समानांतर रूप से संपर्क कर सकते हैं तो यह परस्पर विरोधी निर्णयों को जन्म दे सकता है जो अक्सर एक संस्थान या दूसरे की निष्पक्षता और योग्यता को कम करते हैं।

प्रमुख आईटी नियम, 2021 क्या हैं?

  • सोशल मीडिया हेतु अधिक परिश्रम करने को अनिवार्य करता है:
    • मोटे तौर पर आईटी नियम (वर्ष 2021) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपने प्लेटफॉर्म पर सामग्री के संबंध में अधिक परिश्रम करने के लिये बाध्य करते हैं।
  • एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति:
    • उन्हें एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर गैरकानूनी और अनुपयुक्त सामग्री को हटाने की आवश्यकता है।
    • प्लेटफॉर्म के निवारण तंत्र का शिकायत अधिकारी उपयोगकर्त्ताओं की शिकायतों को प्राप्त करने और उनका समाधान करने के लिये ज़िम्मेदार है।
  • ऑनलाइन सुरक्षा और उपयोगकर्त्ताओं की गरिमा सुनिश्चित करना:
    • मध्यस्थ प्लेटफॉर्म को व्यक्तियों के निजी जानकारी उजागर करने वाली सामग्री को शिकायतों की प्राप्ति के 24 घंटों के भीतर हटाना होगा या उस तक लोगों की पहुँच रोकनी होगी। ऐसी निजी सामग्री में व्यक्तियों को पूर्ण या आंशिक नग्नता या यौन क्रिया में संलग्न, छेड़छाड़ की प्रकृति सहित प्रतिरूपण की प्रकृति में होना शामिल है।
  • उपयोगकर्त्ताओं को गोपनीयता नीतियों के बारे में शिक्षित करना:
    • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की गोपनीयता नीतियों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि उपयोगकर्त्ताओं को कॉपीराइट की गई सामग्री और ऐसी किसी भी चीज को प्रसारित न करने के बारे में शिक्षित किया जाए, जिसे मानहानिकारक, नस्लीय या जातीय रूप से आपत्तिजनक, पीडोफिलिक, भारत की एकता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा या संप्रभुता के लिये खतरा, विदेशी राज्यों के साथ संबंध, या किसी समकालीन कानून का उल्लंघन माना जा सकता है।

नए आईटी कानूनों की आवश्यकता क्यों है?

  • भारत डिजिटल युग में प्रवेश कर रहा है: भारत कुछ वर्षों में एक ट्रिलियन-डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है और बड़ी संख्या में व्यवसाय भारतीय इंटरनेट पर होंगे।
    • इसलिये एक खुला और सुरक्षित इंटरनेट हमारे देश का एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक घटक बन जाता है।
  • स्प्लिंटर्नेट का उदय: जैसा कि हम जानते हैं वैश्विक इंटरनेट आक्रामक राष्ट्रीय नीतियों, व्यापार विवादों, सेंसरशिप और बड़ी तकनीकी कंपनियों के साथ असंतोष के कारण राष्ट्रीय नेटवर्क के छोटे घटकों में बंटने के कगार पर है।
    • इसके दूरगामी परिणाम होंगे जो अंतर्राष्ट्रीय संघों, डेटा उद्यमों और व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को समान रूप से प्रभावित करेंगे।
    • शायद आज स्प्लिंटर्नेट का सबसे परिष्कृत उदाहरण चीन का ग्रेट फायरवॉल होगा।
      • जिन सेवाओं को आवश्यक सेवाओं के रूप में देखा जाता है, जैसे कि गूगल सर्च और मानचित्र, पश्चिमी सोशल मीडिया ये सब वहां पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं और साइबर संप्रभुता के नाम पर वीबो जैसे चीनी विकल्पों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है।
  • भारत में अधिकांश साइबर अपराध जमानती अपराध हैं:
    • एक ऐतिहासिक गलती तब हुई जब आईटी (संशोधन) अधिनियम, 2008 ने केवल कुछ को छोड़कर लगभग सभी साइबर अपराधों को जमानती अपराध बना दिया।
    • नागरिक दायित्व की मात्रा बढ़ाने और सजा की मात्रा को कम करने पर अधिक ध्यान दिया गया था, जो बताता है कि देश में साइबर अपराध की सजा की संख्या एकल अंकों में क्यों है।
  • प्रतिबंधित साइबर सुरक्षा उपाय: मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, भोपाल, बैंगलोर आदि जैसे महानगरीय शहरों में आईटी अधिनियम प्रभावी है लेकिन टियर-टू स्तर के शहरों में यह कमज़ोर है क्योंकि प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कानून के बारे में जागरूकता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
    • आईटी अधिनियम मोबाइल के माध्यम से किये गए अधिकांश अपराधों को कवर नहीं करता है। इसे ठीक करने की जरूरत है।

साइबर सुरक्षा के लिये वर्तमान सरकार की पहलें क्या हैं?

आगे की राह

सरकार डिजिटल स्पेस से संबंधित विभिन्न मुद्दों से निपटने वाली नई नियम बनाने की क्षमताओं के साथ एक नए विधायी ढाँचे के बारे में सोच रही है।  इसमें शामिल होना चाहिये:

  • अधिकांश साइबर अपराधों को गैर-जमानती अपराध बनाने की आवश्यकता है।
  • इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिये कानून में एक व्यापक डेटा संरक्षण व्यवस्था को शामिल करने की आवश्यकता है।
  • साइबर युद्ध को एक अपराध के रूप में आईटी अधिनियम के तहत कवर करने की आवश्यकता है।
  • आईटी अधिनियम की धारा 66A के भाग भारत के संविधान के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंधों से परे हैं। प्रावधानों को कानूनी रूप से टिकाऊ बनाने के लिये इन्हें हटाने की जरूरत है।
  • देशों के बीच बढ़ते द्विपक्षीय या बहुपक्षीय व्यवस्थाओं को इस तरह से विकसित करना होगा कि अन्य देशों से अलग होकर किसी देश, जो आइसोलेटेड है, से कोई अपराध नहीं किया जा सके।

  यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

प्रारंभिक परीक्षा

Q. भारत में निम्नलिखित में से किसके लिये साइबर सुरक्षा घटनाओं पर रिपोर्ट करना कानूनी रूप से अनिवार्य है? (वर्ष 2017)

  1. सेवा प्रदाता
  2. डेटा केंद्र
  3. निगमित निकाय

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3

 उत्तर: (D)

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