रैपिड फायर
लोन रिकवरी एजेंट के आचरण पर सख्त नियम
- 14 Feb 2026
- 12 min read
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वाणिज्यिक बैंकों के लिये रिकवरी एजेंट की नियुक्ति और आचरण को विनियमित करने वाले दिशा-निर्देशों का एक मसौदा जारी किया है। इन निर्देशों को ‘भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - रिस्पॉन्सिबल बिज़नेस कंडक्ट) द्वितीय संशोधन निर्देश, 2026’ शीर्षक दिया गया है, जो 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होंगे।
- निषिद्ध प्रथाएँ: एजेंट अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते, उधारकर्त्ताओं को धमकी नहीं दे सकते, अत्यधिक या गुमनाम कॉल नहीं कर सकते, निर्धारित समय के बाहर संपर्क नहीं कर सकते या उधारकर्त्ताओं या गारंटर को सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं कर सकते।
- कठोर वसूली विधियों का पुनर्गठन: उधारकर्त्ताओं, गारंटरों या उनके रिश्तेदारों, मित्रों अथवा सहकर्मियों के प्रति मौखिक, शारीरिक या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाली धमकी या उत्पीड़न को कठोर वसूली पद्धति माना जाएगा। ऋण की वास्तविक राशि या भुगतान न करने के परिणामों के संबंध में झूठे या भ्रामक बयान देना भी प्रतिबंधित है।
- संस्थागत उत्तरदायित्व: सभी बैंकों को ऋण वसूली, वसूली एजेंटों (लोन रिकवरी एजेंट) की नियुक्ति और गिरवी रखी गई संपत्ति पर कब्ज़ा करने के संबंध में एक औपचारिक नीति स्थापित करनी होगी। इस नीति में पात्रता मानदंड, उचित जाँच-पड़ताल के मानक, आचार संहिता, निर्दिष्ट गतिविधियाँ और वसूली एजेंटों के लिये प्रदर्शन मूल्यांकन मानक शामिल होने चाहिये।
- शिकायत निवारण तंत्र: प्रत्येक बैंक को वसूली प्रक्रियाओं से संबंधित शिकायतों के लिये एक समर्पित तंत्र स्थापित करना होगा।
|
और पढ़ें: भारतीय रिज़र्व बैंक |