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स्मार्टफोन का सोर्स कोड

  • 15 Jan 2026
  • 21 min read

स्रोत: द हिंदू 

केंद्र सरकार और MAIT (मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) (जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और ICT हार्डवेयर सेक्टर का शीर्ष संगठन है) ने उन रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि स्मार्टफोन निर्माताओं से उनका सोर्स कोड साझा करने की मांग की जाएगी और स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई मांग विचाराधीन नहीं है।

  • सोर्स कोड: यह प्रोग्राम किये गए मौलिक निर्देशों का समूह है, जो स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम, हार्डवेयर फंक्शन और एप्लिकेशन को नियंत्रित करता है, जिससे डिवाइस का संचालन सुरक्षित और कुशलता के साथ होता है।
    • हालाँकि एंड्रॉयड के कुछ भाग ओपन‑सोर्स हैं, लेकिन निर्माता इसमें प्रोप्रायटरी संबंधी बदलाव और हार्डवेयर संबंधी विशिष्ट अनुकूलन को जोड़ते हैं।
    • फिर भी, सोर्स कोड को गोपनीय रखा जाता है, क्योंकि यह कॉमर्शियल सीक्रेट को प्रोटेक्ट करता है और एक महत्त्वपूर्ण सिक्योरिटी बैरियर के रूप में कार्य करता है, जो दुरुपयोग और शोषण को रोकता है।
  • सोर्स कोड के डिस्क्लोज़ की सीमाएँ: फुल सोर्स कोड को डिस्क्लोज़ करना वैश्विक स्तर पर दुर्लभ है, यह आमतौर पर केवल सीमित रक्षा संदर्भों में ही होता है।
    • इंटरनल कोड को डिस्क्लोज़ करने से साइबर हमलों और डेटा चोरी की संवेदनशीलता बढ़ने की संभावना होती है।
    • एप्पल जैसी वैश्विक कंपनियाँ भी सरकारों के साथ फुल सोर्स कोड साझा नहीं करतीं।
  • सोर्स कोड का विनियमन: भारत में कोई कानून निजी कंपनियों द्वारा सोर्स कोड के पब्लिक डिस्क्लोज़ को अनिवार्य नहीं बनाता।
    • टेलीकॉम‑संबंधी पूर्व मानकों में, जिनमें दूरसंचार विभाग (DoT) के अंतर्गत राष्ट्रीय संचार सुरक्षा केंद्र (NCSS) द्वारा जारी भारतीय दूरसंचार सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताएँ (Indian Telecom Security Assurance Requirements- ITSAR), 2023 शामिल हैं, सोर्स कोड को डिस्क्लोज़ करने का उल्लेख है, इसमें वर्ष 2025 में संशोधन कर ऐसे प्रावधानों को हटा दिया गया।
    • पूर्व में स्मार्टफोन भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) नियम, 2017 के अनिवार्य परीक्षण और प्रमाणन का दूरसंचार उपकरण (MTCTE) फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते थे।
      • हालाँकि, दूरसंचार अधिनियम, 2023 के बाद, दूरसंचार विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने स्मार्टफोनों को MTCTE से बाहर कर दिया, क्योंकि उनका पहले से ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित मानकों के तहत प्रमाणन होता है।
    • नीतिगत निगरानी अब परामर्श‑आधारित, गैर‑हस्तक्षेप के दृष्टिकोण का पालन करती है; किसी भी सुरक्षा समीक्षा के लिये अब केवल आंतरिक परीक्षण रिपोर्ट की आवश्यकता होती है, जिसमें बौद्धिक संपदा (IP) को शामिल नहीं किया जाता।
    • यह फ्रेमवर्क साइबर सुरक्षा, व्यापार सुगमता और बौद्धिक संपदा संरक्षण के बीच संतुलन बनाता है, जो वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप हैं।

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