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रेलटेक नीति और e-RCT डिजिटलीकरण

  • 27 Feb 2026
  • 42 min read

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों?

रेल मंत्रालय ने अपनी ‘52 सप्ताह में 52 सुधार’ पहल के अंतर्गत दो प्रमुख सुधार रेलटेक नीति (RailTech Policy) और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (e-RCT) का डिजिटलीकरण प्रस्तुत किये हैं, जिनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना तथा न्याय तक पहुँच को अधिक सुगम बनाना है।

रेलटेक नीति और e-RCT डिजिटलीकरण क्या है?

रेलटेक नीति

  • परिचय: यह एक समर्पित, उच्च-प्रौद्योगिकी, 24×7 डिजिटल सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म है, जो प्रस्तावों के एंड-टू-एंड डिजिटल सबमिशन और प्रोसेसिंग को सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से नवप्रवर्तक सरल एक-चरणीय प्रक्रिया में विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे पुराने बहु-चरणीय विक्रेता चयन तंत्र की जगह अधिक कुशल व्यवस्था स्थापित होती है।
  • रेलटेक पोर्टल: रेलवे में नवाचार को बढ़ावा देने हेतु नवप्रवर्तकों, स्टार्ट-अप्स, उद्योग और संस्थानों के लिये एक समर्पित रेलटेक पोर्टल स्थापित किया जाएगा।
  • वित्तीय प्रोत्साहन: नीति के अंतर्गत स्केल-अप अनुदान को तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया है तथा प्रोटोटाइप विकास और परीक्षण के लिये अधिकतम अनुदान को दोगुना किया गया है। रेलवे व्यवहार्य समाधानों के विकास के लिये कुल विकास लागत का 50% तक वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।
  • प्रमुख नवाचार क्षेत्र: यह नीति प्रमुख परिचालन चुनौतियों के समाधान हेतु निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित है:
    • AI-आधारित हाथी घुसपैठ पहचान प्रणाली (EIDS)
    • कोचों में AI-आधारित अग्नि पहचान प्रणाली
    • ड्रोन आधारित टूटी हुई रेल की पटरियों की पहचान
    • कोहरे की स्थिति में अवरोध पहचान प्रणाली
    • AI-आधारित कोच सफाई निगरानी प्रणाली
    • पार्सल वैन पर सेंसर आधारित भार गणना प्रणाली
  • स्केलेबिलिटी: सफल नवाचारों को दीर्घकालिक बड़े ऑर्डर के माध्यम से समर्थन दिया जाएगा, ताकि इन समाधानों का विस्तार पूरे रेलवे नेटवर्क में किया जा सके।

रेलवे दावा अधिकरण (e-RCT) का डिजिटलीकरण

  • e-RCT डिजिटलीकरण: यह रेलवे दावा अधिकरण (RCT) के संपूर्ण कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण की शुरुआत करता है, जिससे दावा दाखिल करना, प्रक्रिया और निर्णय तेज़ और पारदर्शी हो जाता है।
  • e-RCT के मुख्य मॉड्यूल: यह प्लेटफॉर्म तीन प्रमुख घटकों पर आधारित है:
    • e-फाइलिंग: SMS और ई-मेल के माध्यम से त्वरित पावती के साथ 24x7 ऑनलाइन फाइलिंग।
    • केस इनफॉर्मेशन सिस्टम (CIS): फाइलिंग से लेकर अंतिम निपटान तक रियल टाइम केस ट्रैकिंग के लिये केंद्रीकृत डेटाबेस।
    • दस्तावेज़ प्रबंधन प्रणाली (DMS): डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित अभिलेखों के साथ अभिवचन, आदेश और निर्णयों का डिजिटल भंडारण।
  • e-RCT का कानूनी आधार: रेलवे दावा अधिकरण एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय है जिसका गठन रेलवे दावा अधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत दुर्घटनाओं में मृत्यु/चोट, अप्रिय घटनाओं, माल की हानि और किराए की वापसी से संबंधित दावों का निर्णय करने के लिये किया गया है। संपूर्ण भारत में इसकी 23 पीठें हैं (मुख्य पीठ दिल्ली में)।
  • समय-सीमा और विस्तार: आगामी 12 महीनों में संपूर्ण भारत में सभी 23 RCT पीठों को पूरी तरह से डिजिटल बनाने का लक्ष्य है। सफल होने पर इस मॉडल को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण जैसे अन्य अधिकरणों तक बढ़ाया जा सकता है।
  • नागरिक-केंद्रित लाभ: नई व्यवस्था पीड़ित यात्रियों को देश में कहीं से भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से दावा दाखिल करने की अनुमति देती है, जिससे विशेष रूप से अंतर-राज्यीय यात्रा घटनाओं में, क्षेत्राधिकार वाली पीठों को लेकर भ्रम समाप्त हो जाता है।
    • यह तेज़ी से मामलों के निपटान, कम स्थगन, वास्तविक समय स्थिति का अपडेट, आदेशों तक ऑनलाइन पहुँच, मुद्रण और कूरियर संबंधी खर्चों को कम करके वादियों के लिये महत्त्वपूर्ण लागत बचत सुनिश्चित करता है।

52 सप्ताह 52 सुधार संकल्प

  • परिचय: वर्ष 2026 के प्रारंभ में शुरू किया गया यह कार्यक्रम एक महत्त्वाकांक्षी और समयबद्ध कार्यक्रम है। यह पहल भारतीय रेलवे को संपूर्ण कैलेंडर वर्ष 2026 के दौरान प्रति सप्ताह एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार (Structural Reform) लागू करने के लिये प्रतिबद्ध करती है। इसका प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय परिवहन जीवन-रेखा का एक व्यापक, पारदर्शी और भविष्योन्मुखी रूपांतरण करना है।
  • विज़न का संरेखण: यह पहल भारतीय रेलवे की व्यापक ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ विज़न के साथ संरेखित है। यह कार्यक्रम पिछले दशक में रेलवे क्षेत्र में किये गए बुनियादी सुधारों पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. ‘52 सप्ताह में 52 सुधार’ पहल क्या है?
यह 2026 में रेल मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक समयबद्ध कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत पूरे वर्ष में प्रत्येक सप्ताह एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य रेलवे का व्यापक आधुनिकीकरण करना है।

2. रेलटेक नीति (RailTech Policy) क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह एक डिजिटल सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म (सुधार संख्या तीन) है, जिसका उद्देश्य नवाचारकर्त्ताओं और स्टार्टअप्स को जोड़ना, प्रस्ताव प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सरल बनाना तथा रेलवे में तकनीकी समाधानों के लिये बेहतर वित्तपोषण उपलब्ध कराना है।

3. e-RCT प्रणाली के तीन प्रमुख मॉड्यूल कौन-से हैं?
ई-फाइलिंग (E-Filing), केस सूचना प्रणाली (CIS), दस्तावेज़ प्रबंधन प्रणाली (DMS) ये तीनों मिलकर एंड-टू-एंड डिजिटल केस प्रबंधन को सक्षम बनाते हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारतीय रेलवे द्वारा उपयोग किये जाने वाले जैव-शौचालय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2015)

  1. जैव-शौचालय में मानव अपशिष्ट का अपघटन एक कवक इनोकुलम द्वारा शुरू किया जाता है।
  2.  इस अपघटन में अमोनिया और जलवाष्प एकमात्र अंतिम उत्पाद हैं, जो वायुमंडल में निर्मुक्त होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (d)

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