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प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 7 मई, 2020

  • 07 May 2020
  • 12 min read

संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम

Revised National Tuberculosis Control Programme

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) द्वारा प्रकाशित एक पेपर में चिंता व्यक्त की गई है कि COVID​​-19 के मद्देनज़र राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण भारत में नए टीबी के मामलों की साप्ताहिक पहचान में लगभग 75% कमी आई है।

मुख्य बिंदु:   

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रकाशित पेपर का शीर्षक ‘2020 में वैश्विक स्तर पर टीबी से होने वाली मौतों पर COVID-19 महामारी का पूर्वनिर्धारित प्रभाव’ है।
    • इस पेपर में बताया गया है कि 22 मार्च के बाद तीन हफ्ते के दौरान रिपोर्ट किये गए टीबी मामलों की संख्या साप्ताहिक तौर पर औसतन 11,367 थी जबकि लॉकडाउन से पहले दर्ज किये गए मामलों की संख्या औसतन 45,875 साप्ताहिक थी।
    • गौरतलब है कि ये आँकड़े देश भर में ‘केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय’ के ‘संशोधित राष्ट्रीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम’ (Revised National Tuberculosis Control Programme- RNTCP) के अंतर्गत बनाए गए एक पोर्टल निक्षय (NIKSHAY) पर दर्ज किये गए टीबी के मामलों पर आधारित हैं।

संशोधित राष्ट्रीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम (RNTCP):

  • 26 मार्च, 1997 को ‘संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम’ (RNTCP) को डॉट्स प्रणाली के साथ शुरू किया गया।
  • इस कार्यक्रम के तहत प्रतिमाह 1 लाख से भी अधिक रोगियों का इलाज कर, अब तक करीब 15.75 लाख से अधिक लोगों को इस रोग से बचाया जा सका है। 
  • वर्तमान में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सप्ताह में तीन दिन दी जाने वाली खुराक के स्थान पर इसे प्रतिदिन देना निर्धारित किया गया है जिसका लक्ष्य टीबी रोगियों को इथैन ब्यूटॉल की प्रतिदिन एक निश्चित खुराक देकर इस रोग पर नियंत्रण पाना है।

निक्षय (NIKSHAY):

  • निक्षय (Nikshay) एक वेब-आधारित पोर्टल है जिसका उपयोग प्राधिकारी वर्ग RNTCP से जुड़े फंड, उपचार के परिणाम और स्वास्थ्य प्रदाताओं को ट्रैक करने के लिये करते हैं।  
  • यह राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं और देश भर में पंजीकृत निजी स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है।

विश्व अस्थमा दिवस 2020

World Asthma Day 2020

विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day) प्रत्येक वर्ष मई महीने के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस 5 मई, 2020 को मनाया गया। 

ENOUGH-ASTHAMA-DEATH

थीम: 

  • इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस-2020 की थीम ‘Enough Asthma Deaths’ है।

उद्देश्य: 

  • इसका मूल उद्देश्य विश्व भर में अस्थमा की बीमारी एवं देखभाल के बारे में जागरूकता फैलाना है। 

मुख्य बिंदु: 

  • वर्ष 1998 में पहली बार ‘ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा’ (GINA) ने इसका आयोजन बार्सिलोना (स्पेन) में हुई ‘प्रथम विश्व अस्थमा बैठक’ के बाद किया था। हालाँकि COVID-19 के कारण इस वर्ष वैश्विक स्तर पर इसका आयोजन स्थगित कर दिया गया है।    
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व में लगभग 235 मिलियन लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। 

‘ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा’ (GINA):

  • इसे वर्ष 1993 में अस्थमा के लिये वैश्विक पहल के रूप में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ (National Institutes of Health), ‘नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट’ (National Heart, Lung and Blood Institute- NHLBI) के सहयोग से शुरू किया गया था।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ

(National Institutes of Health-NIH):

  • यह बायोमेडिकल एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका की प्राथमिक एजेंसी है। 
  • इसकी स्थापना वर्ष 1887 में हुई थी  
  • इसका मुख्यालय मेरीलैंड (संयुक्त राज्य अमेरिका) में है

नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट

(National Heart, Lung and Blood Institute- NHLBI):

  • यह संयुक्त राज्य अमेरिका के बेथेस्डा (Bethesda) में स्थित ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ (NIH) के तहत तीसरा सबसे बड़ा संस्थान है।
  • इसका गठन वर्ष 1948 में किया गया था।  
  • इसे निम्नलिखित मुद्दों से निपटने के लिये प्रति वर्ष वित्तीय आवंटन करने का कार्य सौंपा गया है:
    • रोग का विकास एवं प्रगति
    • रोग का निदान
    • रोग-चिकित्सा
    • रोग प्रतिरक्षण
    • अमेरिकी जनसंख्या के बीच स्वास्थ्य देखभाल संबंधी विषमताओं में कमी लाना।
    • अमेरिकी चिकित्सा प्रणाली को उन्नत बनाना।
  • यह विश्व भर में फैले हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं को अस्थमा से संबंधित चिकित्सकीय दिशा-निर्देश प्रदान करता है। 

अस्थमा क्या है? 

  • अस्थमा फेफड़ों की एक पुरानी बीमारी है, जिसके कारण रोगी को सांस लेने में समस्या होती है। यह गैर-संचारी रोगों में से एक है। 
  • इस बीमारी के दौरान श्वसनमार्ग में सूजन से सीने में जकड़न, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है।
  • ये लक्षण आवृत्ति एवं गंभीरता (frequency and severity) में भिन्न होते हैं। जब लक्षण नियंत्रण में नहीं होते हैं तो साँस लेना मुश्किल हो सकता है। 
  • वर्तमान में यह बीमारी बच्चों में सबसे अधिक देखने को मिलती है। 
  • अस्थमा को ठीक नहीं किया जा सकता है किंतु अगर सही समय पर सही इलाज के साथ इसका प्रबंधन किया जाए तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

भारत में अस्थमा की स्थिति:

  • भारत में लगभग 6% बच्चे और 2% वयस्क अस्थमा से प्रभावित हैं।

अर्कटिका-एम

Arktika-M 

हाल ही में रूस की ‘लावोस्किन एयरोस्पेस कंपनी’ (Lavochkin Aerospace Company) के जनरल डायरेक्टर ने जानकारी दी है कि रूस इस वर्ष के अंत में आर्कटिक जलवायु एवं पर्यावरण निगरानी के लिये अपना पहला ‘अर्कटिका-एम’ (Arktika-M) नामक उपग्रह लॉन्च करेगा।

मुख्य बिंदु: 

  • पहला अर्कटिका-एम अंतरिक्ष यान जो वर्तमान में रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक परीक्षण से गुजर रहा है, को वर्ष 2020 के अंत तक तथा दूसरा अर्कटिका-एम उपग्रह जो अभी शुरूआती विकास के चरण में है, का प्रक्षेपण वर्ष 2023 में किया जायेगा।
  • इस उपग्रह को फ्रीगैट बूस्टर (Fregat Boooster) के साथ सोयुज-2.1बी (Soyuz-2.1b) रॉकेट का उपयोग करके लॉन्च किया जाएगा।

महत्त्व:

  • रूस का उत्तरी क्षेत्र आर्कटिक महासागर के साथ हजारों किमी. तक विस्तृत है और अपने उत्तरी क्षेत्रों के आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करने की कोशिश करते हुए रूस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • अर्कटिका-एम एक रिमोट-सेंसिंग एवं आपातकालीन संचार उपग्रह है। यह पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों से मौसम संबंधी डेटा एकत्र करने में मदद करेगा।
  • इस डेटा की मदद से मौसम वैज्ञानिकों को मौसम संबंधी पूर्वानुमान की सटीकता तथा वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन का बेहतर अध्ययन करने में मदद मिलेगी।

सुरक्षित दादा-दादी एवं नाना-नानी अभियान 

Surakshit Dada-Dadi & Nana-Nani Abhiyan  

‘पीरामल फाउंडेशन’ (Piramal Foundation) के सहयोग से नीति आयोग (Niti Aayog) ने 5 मई, 2020 को COVID-19 महामारी के दौरान वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये ‘सुरक्षित दादा-दादी एवं नाना-नानी अभियान’ प्रारंभ किया।

उद्देश्य:

  • इस अभियान का उद्देश्य COVID-19 महामारी के मद्देनज़र निवारक उपायों एवं अपेक्षित व्यवहार परिवर्तन सहित वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य एवं जीवन शैली के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूकता पैदा करना है।   

मुख्य बिंदु: 

  • इस अभियान के तहत असम, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के 25 आकाँक्षी ज़िलों में 2.9 मिलियन से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को सम्मिलित किया जायेगा।
  • यह अभियान वरिष्ठ नागरिकों के व्यवहार में परिवर्तन, सेवाओं तक पहुँच, COVID-19 लक्षणों की शुरूआती पहचान एवं ट्रैकिंग पर केंद्रित है।

नोट:

  • ‘पीरामल फाउंडेशन’ (Piramal Foundation), ‘पीरामल समूह’ (Piramal Group) की लोकोपकारी शाखा है। ‘पीरामल समूह’ एक विविध वैश्विक व्यापार समूह है। 
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