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प्रीलिम्स फैक्ट्स: 19 अप्रैल, 2019

  • 19 Apr 2019
  • 5 min read

वसंतोत्सवम

आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में वार्षिक 'वसंतोत्सवम' का आयोजन किया जा रहा है।

  • प्रतिवर्ष चैत्र (मार्च/अप्रैल) के महीने में 3 दिनों त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णमी तक वसंतोत्सवम मनाया जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि 1460 में राजा अच्युतराय ने वसंत ऋतु के आगमन को चिह्नित करने के लिये इस उत्सव की शुरुआत की थी।
  • वसंतोत्सवम 2 शब्दों ‘वसंत’ (संस्कृत में वसंत का मौसम) और ‘उत्सवम’ (संस्कृत में त्योहार) से मिलकर बना है।

नेपालीसैट-1

हाल ही में नेपाल ने अमेरिका से अपना पहला उपग्रह 'नेपालीसैट-1' सफलतापूर्वक लॉन्च किया है।

  • नेपाल एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Nepal Academy of Science and Technology-NAST) के मुताबिक, नेपाल के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किये गए इस उपग्रह को अमेरिका के वर्जीनिया से प्रक्षेपित किया गया।
  • नेपालीसैट -1 उपग्रह को दो नेपाली वैज्ञानिकों, आभास मास्की और हरिराम श्रेष्ठ ने जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की BIRDS परियोजना के तहत विकसित किया है।

♦ NAST ने जापानी क्यूशू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की BIRDS परियोजना के तहत देश के अपने उपग्रह के प्रक्षेपण की शुरुआत की।
♦ BIRDS परियोजना को संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से डिज़ाइन किया गया है जिसका उद्देश्य किसी देश को अपने पहले उपग्रह को लॉन्च करने में मदद करना है।

  • नेपालीसैट -1 को पृथ्वी की निचली कक्षा में (पृथ्वी की सतह से 400 किलोमीटर की दूरी पर) स्थापित किया जाएगा।
  • नेपाल की भौगोलिक जानकारी एकत्र करने के लिये यह उपग्रह नियमित आधार पर तस्वीरें लेगा।

220 मिलियन वर्ष पुराना डायनासोर का जीवाश्म

हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने पश्चिमी अर्जेंटीना में करीब एक दर्जन डायनासोरों के जीवाश्म (अवशेषों) का पता लगाया।

  • ये जीवाश्म (अवशेष) लगभग 220 मिलियन साल पुराने हैं।
  • इनकी खोज पिछले साल सितंबर में ब्यूनस आयर्स के पश्चिम में लगभग 1,100 किलोमीटर (680 मील) दूर सैन जुआन प्रांत में हुई थी।
  • अर्जेंटीना वर्षों से ट्रायसिक, जुरासिक और क्रेटेशियस युगों के जीवाश्मों का एक समृद्ध स्रोत रहा है।

दास्तानगोई

दास्तानगोई उर्दू कहानी कहने की एक परंपरा है। इसमें दास्तानगो या कहानीकार केंद्र में होते हैं जिनकी आवाज़ मुख्य कलात्मक उपकरण होती है।

  • इस कला की उत्पत्ति फारस में हुई थी, किंतु इस्लाम के प्रसार के साथ-साथ यह दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में भी प्रचलित हो गई।
  • यह कला 1857 के सिपाही विद्रोह के दौरान अपने शिखर पर थी जब कई दास्तानगो या कहानीकारों ने लखनऊ पहुँचकर कला के इस रूप को लोकप्रिय बना दिया था।
  • वर्ष 1928 में मीर बकर अली के निधन के साथ ही कुछ समय के लिये यह कला गायब सी हो गई थी जिसे वर्ष 2005 में पुनः मुख्यधारा में लाने के प्रयास किये गए थे।

सिंबाकुबवा कुतोकाफ्रिका (Simbakubwa Kutokaafrika)

हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने एक विशाल मांसाहारी जीव के जीवाश्मों की खोज की है, जो 22 मिलियन वर्ष पहले केन्या में पाया जाता था।

  • एक ‘विशाल शेर’ के समान दिखने वाले इस जीव का नाम सिंबाकुबवा कुतोकाफ्रिका रखा गया है। इसका वज़न लगभग एक टन और लंबाई 8 फीट होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
  • सिंबाकुबवा दिखने में न तो भालू जैसा है और न ही ‘बिग कैट’ फैमिली से मेल खाता है।
  • यह विशाल स्तनपायी एक हाइनोडन था, जो वर्तमान में मांसाहारी प्रजाति का एक विलुप्त वंश है। यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि हाइनोडन आधुनिक हाइना (लकड़बग्घा) प्रजाति से संबंधित नहीं है, हालाँकि इनका दंतोद्भवन (किसी विशेष प्रजाति में दांतों की व्यवस्था या स्थिति) लगभग एक-सा है।
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