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प्रीलिम्स फैक्ट्स: 06 फरवरी, 2020

  • 06 Feb 2020
  • 14 min read

श्री बृहदेश्वर मंदिर

Sri Brihadeeswarar Temple

तमिलनाडु राज्य के तंजावुर में हज़ारों लोग श्री बृहदेश्वर मंदिर (Sri Brihadeeswarar Temple) में कुम्भाभिषेगम (जलाभिषेक) समारोह के गवाह बने।

  • गौरतलब है कि यह समारोह 23 वर्षों बाद आयोजित किया गया है क्यों कि मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने एक पुराने मामले (जो तमिलनाडु राज्य में संस्कृत भाषा और तमिल परंपराओं के बीच वर्चस्व को लेकर था) में 31 जनवरी को निर्णय दिया था।

Sri-Brihadeeswarar-Temple

श्री बृहदेश्वर मंदिर:

  • श्री बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु राज्य के तंजावुर में स्थित कई प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इसे पेरुवुदैयार कोयिल (Peruvudaiyar Koyil) के नाम से भी जाता है।
  • यह विश्व के सबसे बड़े एवं भव्य मंदिरों में से एक है, इस मंदिर का निर्माण चोल सम्राट राजाराज प्रथम द्वारा 1003 ईस्वी से 1010 ईस्वी के मध्य कराया गया था। उनके नाम पर ही इसे राजराजेश्वर मंदिर नाम भी दिया गया है।
  • यह मंदिर ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है और इसमें अधिकांशत: बड़े शिला-खण्डों का इस्‍तेमाल किया गया है।
  • इस मंदिर की निर्माण कला की एक विशेषता यह है कि इसके गुंबद की परछाई पृथ्वी पर नहीं पड़ती।
  • इसके शिखर पर एक स्वर्णकलश स्थित है और जिस पत्थर पर यह कलश स्थित है, उसका वज़न अनुमानत: 80 टन है।
  • इस मंदिर की उत्कृष्टता के कारण ही यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। वर्ष 2010 में श्री बृहदेश्वर मंदिर का 1000वाँ स्थापना वर्ष मनाया गया था।

कुम्भाभिषेगम समारोह:

  • इस समारोह में पवित्र जल को यज्ञ सलाई (Yaga Salai) से लाकर स्वर्ण कलश में डाला जाता है, जो पवित्र गर्भगृह के 216 फुट ऊपर विमानम में है। मंदिर की अन्य मूर्तियों का भी पवित्र जल से जलाभिषेक किया जाता है।
    • यज्ञ सलाई (Yaga Salai) श्री बृहदेश्वर मंदिर परिसर में स्थित एक जलकुंड है।
  • अंतिम बार वर्ष 1997 में कुम्भाभिषेगम समारोह का आयोजन किया गया था जिसमें आग की घटना के कारण मची भगदड़ में कई लोगों की मौत हो गई थी।

विवाद:

  • कुम्भाभिषेगम समारोह में श्लोकों का उच्चारण किस भाषा में किया जाना चाहिये?
    • थंजै पेरिया कोइल उरीमाई मीतपु कुझु (Thanjai Periya Koil Urimai Meetpu Kuzhu) नामक संगठन जिसका उद्देश्य श्री बृहदेश्वर मंदिर में तमिल परंपराओं को बहाल करना है, ने मांग की थी कि कुम्भाभिषेगम समारोह केवल तमिल भाषा में आयोजित किया जाए।
  • इस विवाद में मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के हलफनामे पर सहमति जताई जिसमें कहा गया है कि समारोह संस्कृत और तमिल दोनों भाषाओं में होना चाहिये।

वधावन बंदरगाह

Vadhavan Port

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र के दहानु (Dahanu) के पास वधावन बंदरगाह (Vadhavan Port) स्थापित करने के लिये सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है।

Vadhavan-Port

मुख्य बिंदु:

  • वधावन बंदरगाह को ‘लैंडलॉर्ड पोर्ट मॉडल’ (LandLord Port Model) के तहत विकसित किया जाएगा।
    • लैंडलॉर्ड पोर्ट मॉडल में बंदरगाह प्राधिकरण एक नियामक निकाय तथा ज़मीन के मुखिया के रूप में कार्य करता है, जबकि निजी कंपनियाँ बंदरगाह के संचालन (मुख्य रूप से कार्गो-हैंडलिंग गतिविधियाँ) का काम करती हैं।
  • इस पोर्ट के विकास के लिये जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) के साथ एक स्पेशल पर्पज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा जो परियोजना में 50% या उससे अधिक के बराबर इक्विटी भागीदार होगा।
  • स्पेशल पर्पज़ व्हीकल (SPV), बंदरगाह अवसंरचना का विकास करेगा बाकी सभी व्यावसायिक गतिविधियाँ निजी डेवलपर्स द्वारा पीपीपी माॅडल के तहत की जाएंगी।

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT)

  • नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट को पूर्व में न्हावा शेवा बंदरगाह के नाम से जाना जाता था। इसकी शुरुआत 26 मई, 1989 को हुई थी।
  • महाराष्ट्र में स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट भारत में सबसे बड़ा तथा विश्व का 28वाँ सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट है जिसमें 5.1 मिलियन टीईयू (Twenty-Foot Equivalent Units-TEUs) ट्रैफिक वहन करने की क्षमता है।
  • जवाहरलाल नेहरू पोर्ट के चौथे टर्मिनल के पूरा होने के बाद तथा वर्ष 2023 तक 10 मिलियन टीईयू तक की क्षमता में वृद्धि के साथ यह विश्व में 17वाँ सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट बन जाएगा।
  • जवाहरलाल नेहरू पोर्ट का विस्तार: जवाहरलाल नेहरू पोर्ट महाराष्ट्र, उत्तरी कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, राजधानी क्षेत्र दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश को विश्व से जोड़ने की सुविधा प्रदान करता है।
  • जवाहरलाल नेहरू पोर्ट और मुंद्रा, भारत के दो सबसे बड़े कंटेनर हैंडलिंग पोर्ट (केवल मध्य आकार के कंटेनर जहाज़ों के लिये) हैं जिनकी गहराई क्रमशः 15 मीटर और 16 मीटर है, जबकि विश्व के सबसे बड़े कंटेनर में आधुनिक डीप पोर्ट का संचालन करने के लिये 18-20 मीटर की गहराई की आवश्यकता होती है।
  • गौरतलब है कि मुख्य (Major) पोर्टस का विकास केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि छोटे बंदरगाह राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

लाभ:

  • वधावन बंदरगाह के विकास के चलते 16000-25000 टीईयू क्षमता के कंटेनर जहाज़ों का परिचालन आसान हो जाएगा जिससे परिवहन लागत में कमी आएगी।
  • वाधवन बंदरगाह के विकास के साथ भारत विश्व के शीर्ष 10 कंटेनर बंदरगाहों वाले देशों में शामिल हो जाएगा।
  • लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने, मेक इन इंडिया पहल को निर्यातोन्मुखी बनाने तथा भारत में सोर्सिंग के निर्माण से संबंधित योजनाओं के बाद कंटेनर ट्रैफिक की मांग में और तेजी आएगी।

इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो

India International Seafood Show

इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो (India International Seafood Show-IISS) के 22वें संस्करण का आयोजन कोच्चि (केरल) में किया जा रहा है।

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मुख्य बिंदु:

  • इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो- 2020 का आयोजन समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Marine Products Export Development Authority- MPEDA) द्वारा किया जा रहा है जो समुद्री खाद्य निर्यातक संघ (Seafood Exporters Association of India- SEAI) के साथ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के अंतर्गत आता है।
  • थीम: इस वर्ष के सीफूड शो की थीम ‘नीली क्रांति- मूल्यवर्द्धन से परे उत्पादन’ (Blue Revolution- Beyond Production to Value Addition) है।
  • यह भारतीय निर्यातकों और भारतीय समुद्री उत्पादों के विदेशी आयातकों के मध्य सहभागिता के लिये एक मंच प्रदान करता है।
  • यह द्विवार्षिक शो है, इस बार कोच्चि में इसका आयोजन 12 वर्षों बाद किया जा रहा है, इसका 21वाँ संस्करण जनवरी 2018 में गोवा में आयोजित किया गया था।
  • इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो विश्व के सबसे पुराने और सबसे बड़े सीफूड शो में से एक है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य देशों के प्रमुख बाज़ारों के समुद्री उत्पाद के व्यापारियों को आकर्षित करता है।

समुद्री खाद्य निर्यातक संघ

(Seafood Exporters Association of India- SEAI)

  • इसकी स्थापना वर्ष 1973 में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ एक्ट, 1956 के तहत पंजीकृत संगठन के रूप की गई थी।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य समुद्री खाद्य उद्योग के हितों की रक्षा करना एवं उनको बढ़ावा देना तथा भारत के समुद्री खाद्य का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विकसित करना है।

भारत द्वारा समुद्री उत्पादों का निर्यात:

  • वर्ष 2018-19 के दौरान भारत ने 14,37,000 टन से अधिक समुद्री उत्पादों का निर्यात किया जो अंतिम आँकड़ों के अनुसार 6.70 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का है।
  • लक्ष्य: बहु-आयामी रणनीति के तहत समुद्री उत्पादों के निर्यात से अगले पाँच वर्षों में 15 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

औद्योगिक पार्क

Industrial Parks

हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) द्वारा भारत में स्थापित कुल औद्योगिक पार्कों की संख्या के बारे में जानकारी साझा की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • वर्ष 2014 के बाद देश में बनाए गए औद्योगिक पार्कों की संख्या राज्य / संघ राज्य क्षेत्रों के स्तर पर सही ढंग से व्यवस्थित नहीं है।
  • हालाँकि उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade- DPIIT) द्वारा औद्योगिक पार्कों की सूचना से संबंधित एक केंद्रीकृत सिस्टम विकसित किया गया है जो औद्योगिक सूचना प्रणाली (Industrial Information System- IIS) पर उपलब्ध है और इस विवरण को संबंधित राज्यों द्वारा नियमित अंतराल पर अपडेट किया जाता है।
  • संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्‍चित करने और विनिर्माण क्षेत्र की दक्षता बढ़ाने के लिये DIPP ने मई 2017 में औद्योगिक सूचना प्रणाली (Industrial Information System- IIS) लॉन्च की थी, जो देश भर में फैले औद्योगिक क्षेत्रों और क्‍लस्‍टरों के लिये GIS आधारित डेटाबेस है।
    • यह पोर्टल कच्‍चे माल यथा- कृषि, बागवानी, खनिजों एवं प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्‍धता, महत्त्वपूर्ण लॉजिस्‍टिक्स केंद्रों से दूरी, भू-भाग की परतों और शहरी बुनियादी अवसंरचना सहित समस्‍त औद्योगिक सूचनाओं की नि:शुल्‍क एवं आसान पहुँच प्रदान करने वाला एकल स्‍थल केंद्र है।

औद्योगिक पार्क योजना-2002

(Industrial Park Scheme-2002):

  • यह योजना ऐसे किसी भी उपक्रम पर लागू होती है जिसने 1 अप्रैल, 1997 से 31 मार्च, 2006 की अवधि तक औद्योगिक पार्क का विकास, संचालन तथा रखरखाव किया।
    • कुछ अन्य मामलों में जहाँ एक उपक्रम 1 अप्रैल, 1999 को या उसके बाद एक औद्योगिक पार्क विकसित करता है और ऐसे औद्योगिक पार्क के संचालन एवं रखरखाव को किसी अन्य उपक्रम को स्थानांतरित कर देता है, इस तरह के स्थानांतरित उपक्रम को लगातार दस वर्षों तक शेष अवधि के लिये लाभ लेने की अनुमति दी जाएगी जबकि ऑपरेशन और रखरखाव का काम स्थानांतरित उपक्रम को नहीं दिया गया था।
  • भारत में कुछ प्रमुख औद्योगिक पार्क: महाराष्ट्र (447), कर्नाटक (370), राजस्थान (364), गुजरात (351), उत्तर प्रदेश (342), आंध्र प्रदेश (330)
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