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भारतीय अर्थव्यवस्था

इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन

  • 17 Sep 2019
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

16 सितंबर, 2019 को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन (Certificates of Origin-CoO) जारी करने के लिये एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया।

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार निदेशालय (Directorate General of Foreign Trade-DGFT) और RMTR (Regional & Multilateral Trade Relations) ने कॉमन डिजिटल प्लेटफॉर्म को डिज़ाइन किया है और इसे विकसित किया है।

विशेषताएँ

  • सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया जाएगा।
  • यदि सहयोगी देश सहमत होते हैं तो इसके लिये पेपरलेस रूप अपनाया जाएगा।
  • सहयोगी देश वेबसाइट पर प्रमाण-पत्रों की प्रमाणिकता का सत्यापन कर सकते हैं।
  • निर्यातक इस प्लेटफॉर्म पर पंजीयन कर सकते हैं और सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन के लिये आवेदन कर सकते हैं।
  • इस प्लेटफॉर्म को चरणबद्ध तरीके से FTA के लिये लाइव बनाया जाएगा।
  • भारत–चिली अधिमान्य व्यापार समझौते (Preferential Trade Agreement-PTA) के साथ इसकी शुरुआत होगी।
  • यदि सहयोगी देश इलेक्ट्रॉनिक डेटा आदान-प्रदान के लिये सहमत होता है तो सहयोगी देश के कस्टम विभाग के पास सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेज दिया जाएगा।

प्लेटफॉर्म के लाभ:

नया प्लेटफॉर्म वर्तमान प्रक्रिया
जारी करने की प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक, पेपरलेस और पारदर्शी होगी। वर्तमान प्रक्रिया के तहत निर्यातक को प्रत्येक प्रमाण-पत्र के लिये तीन बार कार्यालय आना पड़ता है।
उत्पाद के स्तर पर, देश के स्तर पर FTA उपयोग की वास्तविक समय पर निगरानी। वास्तविक समय पर निगरानी संभव नहीं क्योंकि डेटा विभिन्न एजेंसियों के बीच बटा रहता है।
सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन को इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी किया जाता है। सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन को दस्तावेज़ के रूप में जारी किया जाता है।
सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन का सदस्य देशों के साथ आदान-प्रदान संभव। सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन का सदस्य देशों के साथ आदान-प्रदान संभव नहीं।
निर्यातकों के लिये लागत और समय की बचत। वर्तमान प्रक्रिया में लागत और समय अधिक लगता है।

प्रमुख बिंदु

  • भारत का 15 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) और अधिमान्य व्यापार समझौता (PTA) है। इनके लिये लगभग सात लाख प्रमाण-पत्र जारी किये जाते हैं।
  • इससे यह साबित होता है कि निर्यात की गई वस्तुओं का निर्माण भारत में हुआ है।
  • इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से निर्यातकों, FTAs/PTAs तथा सभी संबंधित एजेंसियों को एक ही स्थान पर सुविधाएँ मिलेंगी।

सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन (CoO) जारी करने वाली एजेंसियाँ

  • सर्टिफिकेट ऑफ ऑरिजिन जारी करने वाली कुछ एजेंसियाँ हैं–
    • निर्यात निरीक्षण परिषद (Export Inspection Council-EIC)
    • विदेश व्यापार निदेशालय (Directorate General of Foreign Trade-DGFT)
    • समुद्री उत्पाद निर्यात प्राधिकरण (Marine Products Export Development Authority-MPEDA)
    • वस्त्र समिति और तंबाकू बोर्ड (Textile Committee and Tobacco Board)

निर्यात निरीक्षण परिषद

  • यह भारत का आधिकारिक निर्यात-प्रमाणन निकाय है जो भारत से निर्यातित उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • भारत सरकार द्वारा निर्यात (गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण) अधिनियम, 1963 की धारा 3 के तहत EIC की स्थापना की गई।
  • इसका मुख्य यह यह सुनिश्चित करना है कि निर्यात (गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण) अधिनियम 1963 के तहत अधिसूचित उत्पाद गुणवत्ता और सुरक्षा के संबंध में आयातित देशों की आवश्यकताओं को पूरा करें।
  • निर्यात निरीक्षण परिषद दिल्ली में स्थित है।
  • EIC विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे- मछली और मत्स्य उत्पादों, डेयरी उत्पाद, शहद, मांस, जिलेटिन (Gelatine), ओस्सीन (Ossein) तथा अन्य खाद्य पदार्थों के लिये अनिवार्य प्रमाणन प्रदान करता है जबकि अन्य खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों को स्वैच्छिक आधार पर प्रमाणित किया जाता है।
  • निर्यात निरीक्षण एजेंसियाँ मुंबई, कोलकाता, कोच्चि, दिल्ली और चेन्नई में स्थित हैं।

विदेश व्‍यापार महानिदेशालय

  • यह वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय का एक संबद्ध कार्यालय है तथा विदेश व्‍यापार महानिदेशक (Director General of Foreign Trade) इसका अध्‍यक्ष होता है।
  • वर्ष 1991 में इसकी शुरूआत की गई, तब से यह संगठन विनियमन के माध्‍यम से विदेश व्‍यापार को विनियमित करने एवं बढ़ावा देने के कार्य में संलग्नित है।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्‍ली में है।
  • यह भारत के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य के साथ विदेश व्‍यापार नीति के कार्यान्‍वयन के लिये उत्तरदायी है।
  • यह निर्यातकों को लाइसेंस जारी करता है तथा 36 क्षेत्रीय कार्यालयों तथा इंदौर में एक विस्‍तार काउंटर के नेटवर्क के माध्‍यम से उनकी तदनुरूपी बाध्‍यताओं की निगरानी भी करता है।

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण

  • इसकी स्थापना MPEDA (Marine Products Export Development Authority) अधिनियम, 1972 की धारा (4) के तहत की गई थी, यह 20 अप्रैल, 1972 से कार्य कर रहा है।
  • यह वाणिज्य विभाग के तहत एक सांविधिक निकाय (statutory body) है।
  • MPEDA समुद्री उत्पाद उद्योग के विकास, विशेष रूप से निर्यात के संदर्भ में, के लिये उत्तरदायी है।
  • इसका मुख्यालय कोच्चि में है और इसके कई क्षेत्रीय एवं उप-क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं।

स्रोत: PIB

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