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चर्चित स्थान-भारत

  • 26 Sep 2021
  • 87 min read

भूगोलGeography

अटल सुरंग (Atal Tunnel) 

संदर्भ

  • हिमाचल प्रदेश में 3,000 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर स्थित रोहतांग में अटल सुरंग का उद्घाटन किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation- BRO) द्वारा निर्मित 9.02 किमी लंबी यह सुरंग विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है। यह मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ती है।
  • सैन्य लॉजिस्टिक्स के दृष्टिकोण से भी महत्त्वपूर्ण यह सुरंग सशस्त्र बलों को लद्दाख तक पहुँचने के लिये बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

ब्रह्मपुत्र सुरंग (Brahmaputra Tunnel)

संदर्भ

  • केंद्र सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी में एक जलमग्न सुरंग (underwater tunnel) के निर्माण को सैद्धांतिक मंज़ूरी प्रदान की है।

प्रमुख बिंदु

  • यह सुरंग असम राज्य में गोहपुर (NH-54) को नुमालीगढ़ (NH-37) से जोड़ेगी।
  • यह सुरंग सामरिक महत्त्व रखती है क्योंकि यह पूर्वोत्तर राज्यों असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पूरे वर्ष संपर्क की सुविधा प्रदान करेगी।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (National Highways and Infrastructure Development Corporation Limited- NHAIDCL) ने इस सुरंग के निर्माण के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका की लुइस बर्जर (Louis Berger) फर्म को अनुबंधित किया है।

चिनाब नदी (Chenab River) 

संदर्भ

  • जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे सेतु बनाया जा रहा है।

चिनाब के बारे में

  • यह हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति ज़िलों में ऊपरी हिमालय से निकलने वाली दो नदियों—चंद्र और भागा के संगम से बनती है। 
  • त्रिमू (Trimmu) के पास झेलम नदी के इससे आकर मिलने के बाद चिनाब सिंधु नदी की एक सहायक नदी सतलुज में जाकर मिल जाती है।
  • ऋग्वेद में चिनाब नदी को असिक्नी (Asikni) कहा गया था, जो इसके गहरे रंग के जल को संदर्भित करता था।
  • सलाल बाँध 690 मेगावाट की पनबिजली परियोजना है जो जम्मू और कश्मीर राज्य के रियासी के पास चिनाब नदी पर कार्यान्वित है।
  • चिनाब पर रतले पनबिजली संयंत्र (Ratle Hydroelectric Plant) और कीरू पनबिजली संयंत्र (Kiru Hydroelectric Power Project) का निर्माण प्रस्तावित है।

चिरबासा (Chirbasa)

संदर्भ 

  • चिरबासा में ब्लैक कार्बन अनुसंधान परियोजना स्थापित की गई है।

चिरबासा के बारे में

  • यह गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड) में भागीरथी नदी के तट पर स्थित है।
  • यह स्थान गोमुख और तपोवन के प्रसिद्ध ट्रैकिंग मार्ग पर 3500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
  • गंगोत्री ग्लेशियर के मार्ग में चिरबासा और भोजबासा (चिरबासा से कुछ किमी आगे) नामक स्थानों पर स्थापित दो मौसम स्टेशनों के माध्यम से वैज्ञानिक इस क्षेत्र में मौजूद ब्लैक कार्बन विशेष रूप से ग्लेशियरों की निगरानी कर रहे हैं।

कामेंग बाँध (Kameng Dam)

संदर्भ

  • हाल ही में कामेंग जलविद्युत परियोजना (Kameng Hydropower Project) पूरी तरह से चालू हो गई है।
  • कामेंग परियोजना के बारे में
  • अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग ज़िले में स्थापित कामेंग जलविद्युत परियोजना (600 मेगावाट) एक रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है जो बिचोम और तेंगा नदियों (कामेंग नदी की दो सहायक नदियाँ) के जल-प्रवाह का उपयोग करेंगी।
  • कामेंग नदी
    • इसका उद्गम तवांग ज़िले में बर्फ से ढके गोरी चेन पर्वत (Gori Chen mountain) के नीचे स्थित हिमनद झील से होता है।
    • यह अपनी निचले प्रवाह क्षेत्र में गुंफित नदी (Braided River) बन जाती है और ब्रह्मपुत्र नदी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है।
    • कामेंग नदी पूर्वी कामेंग और पश्चिम कामेंग ज़िलों के बीच की सीमा का निर्माण करती है और  इसके साथ ही, इसके पश्चिम में सेसा (Sessa) और ईगलनेस्ट (Eaglenest) अभयारण्यों और पूर्व में पक्के बाघ अभयारण्य (Pakke Tiger Reserve) के बीच की सीमा भी बनाती है। 
  • कामेंग जलविद्युत परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र के सबसे बड़े जलविद्युत संयंत्र का परिचालन करती है।

खोलोंगछु जलविद्युत परियोजना (Kholongchu Hydroelectric Project)

संदर्भ

भारत-भूटान जलविद्युत परियोजनाएँ

  • खोलोंगछू 600 मेगावाट क्षमता की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है जो पूर्वी भूटान के त्राशियांग्त्से (Trashiyangtse) ज़िले में खोलोंगछु नदी के निचले मार्ग पर स्थापित है।
  • वर्तमान में द्विपक्षीय सहयोग की चार जलविद्युत परियोजनाएँ (2,100 मेगावाट से अधिक क्षमता) भूटान में परिचालित हैं। इनमें शामिल हैं:
    • चुखा जलविद्युत परियोजना (Chukha Hydroelectric Project) 
    • कुरिछु जलविद्युत परियोजना (Kurichu Hydroelectric Project) 
    • ताला जलविद्युत परियोजना (Tala Hydroelectric Project)
    • मंगदेछु जलविद्युत परियोजना (Mangdechhu Hydroelectric Project) 
  • इसके अलावा, दोनों देश पुनात्सांगछु परियोजना (Punatsangchhu Project) सहित अन्य चालू परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करने की प्रक्रिया में हैं।

लुहरी जलविद्युत परियोजना (Luhri Hydropower Project)

संदर्भ

लुहरी जलविद्युत परियोजना के बारे में

  • लुहरी परियोजना हिमाचल प्रदेश के शिमला और कुल्लू ज़िलों में स्थित है।
  • इसे सतलज जल विद्युत निगम लिमिटेड (SJVNL) द्वारा बिल्ड-ऑन-ऑपरेट-मेंटेन (BOOM) आधार पर कार्यान्वित किया जा रहा है।

रंगित विद्युत परियोजना (Rangit Power Project)

संदर्भ

  • जल विद्युत निगम लिमिटेड (JPCL) की तनावग्रस्त आस्तियों वाली रंगित-IV जलविद्युत परियोजना को राष्ट्रीय जल विद्युत निगम (National Hydro Power Corporation- NHPC) लिमिटेड को सौंप दिया गया है।

परियोजना के बारे में

  • रंगित बाँध सिक्किम में तीस्ता नदी की एक प्रमुख सहायक नदी रंगित पर कार्यान्वित एक रन-ऑफ-द-रिवर (run-of-the-river) विद्युत परियोजना है।
  • रंगित नदी तालुंग ग्लेशियर (Talung glacier) से निकलती है और यह सिक्किम के ही मेली (Melli) में तीस्ता नदी से मिलती है।

धारचूला से लिपुलेख रोड (Dharchula to Lipulekh Road)

संदर्भ

  • सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation- BRO) ने चीनी सीमा के निकट धारचूला से लिपुलेख तक सड़क निर्माण कार्य पूरा कर लिया है, जो कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग के रूप में प्रसिद्ध है।

सड़क के बारे में

  • यह सड़क चीनी सीमा के निकट धारचूला के घाटीबागर से लिपुलेख तक बनाई गई है।
  • तवाघाट के निकट मंगती शिविर से लेकर व्यास घाटी में स्थित गुंजी तक के दुर्गम हिमालयी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा के निकट स्थित भारतीय सुरक्षा चौकियों तक अब एक कंक्रीट सड़क द्वारा पहुँचना संभव हो गया है।
  • यह सड़क 17,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित लिपुलेख दर्रे पर समाप्त होती है। लिपुलेख दर्रे से कैलाश पर्वत लगभग 97 किमी उत्तर तिब्बत में स्थित है। 
  • भारत-चीन-नेपाल के ट्राई-जंक्शन के निकट स्थित लिपुलेख दर्रा उच्च हिमालय के इस खंड का सबसे निचला बिंदु है।

धौलीगंगा नदी (Dhauli Ganga River)

संदर्भ

  • हाल ही में उत्तराखंड में धौलीगंगा नदी में हिमनद बाढ़ (Glacial floods) याफ्लैश फ्लड’ (Flash Flood) की स्थिति देखी गई। 

धौलीगंगा के बारे में

  • नीती दर्रे (उत्तराखंड) के आसपास के क्षेत्र से उत्पन्न धौलीगंगा विसर्प प्रवाह में बहती हुई नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरती है।
  • धौलीगंगा हिमालय से उतरकर मैदानों में बहने वाली पवित्र नदी गंगा की सहायक नदियों में से एक है जो अलकनंदा में मिल जाती है।
  • धौलीगंगा से ऋषि गंगा नदी रैनी (Raini) नामक स्थान पर मिलती है और यहीं पर बिजली परियोजना बाँध को आपदा का सामना करना पड़ा था।
  • यह नदी एक ‘V’ मोड़ लेते हुए विपरीत दिशा में (उत्तर की ओर) धौलीगंगा के रूप में तपोवन से गुज़रते हुए तब बहती है जब तक कि यह जोशीमठ के पास विष्णुप्रयाग में अलकनंदा नदी से नहीं मिल जाती।
  • धौलीगंगा अलकनंदा की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है; कुछ अन्य प्रमुख सहायक नदियों में नंदाकिनी, पिंडर, मंदाकिनी और भागीरथी शामिल हैं।

घोघा-हज़ीरा रो-रो फेरी (Ghogha-Hazira Ro-Ro Ferry)

संदर्भ

घोघा-हज़ीरा फेरी के बारे में 

  • यह फेरी घोघा (एक मछुआरा बस्ती और पुराना बंदरगाह) और हज़ीरा (वाणिज्यिक ग्रीनफील्ड बंदरगाह) के बीच चलती है। 
  • भावनगर (खाड़ी के पश्चिमी किनारे पर स्थित) और दक्षिण गुजरात (पूर्व में स्थित) के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग प्रदान कर खंभात की खाड़ी को सेतुबद्ध करने के लिये यह सेवा शुरू की गई थी।

होलोंगी (Hollongi)

संदर्भ

होलोंगी के बारे में

  • होलोंगी अरुणाचल प्रदेश में स्थित है। यह राज्य की राजधानी ईटानगर के दक्षिण में स्थित है।
  • परिचालित होने पर यह हवाई अड्डा अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर को सेवाएँ प्रदान करेगा। वर्तमान में राज्य की राजधानी से निकटतम हवाई अड्डा 80 किलोमीटर दूर स्थित असम का लीलाबाड़ी (Lilabari airport) हवाई अड्डा है

जोगीघोपा (Jogighopa)

संदर्भ

जोगीघोपा के बारे में

  • जोगीघोपा ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित एक छोटा शहर है। यहाँ ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित एक संयुक्त सड़क-रेल पुल उपयोग में है, जिसे ‘नरनारायण सेतु’ के नाम से जाना जाता है।
  • शहर में पाँच शैलकृत गुफाओं (Rock-Cut Caves) के अवशेष मौजूद हैं जो सालस्तंभ काल (Salasthambha period) की वास्तुकला के उदाहरण हैं और भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित किये जा रहे हैं।
  • इसकी MMLP परियोजना के तहत कार्यान्वित विकास कार्यों में रेलवे साइडिंग, कंटेनर टर्मिनल, वेयरहाउसिंग, गैर-कार्गो प्रसंस्करण, ट्रक टर्मिनल, सामान्य सुविधाएँ और समर्थनकारी अवसंरचना एवं साधन आदि शामिल होंगे।
  • MMLP के तहत सड़क, रेल, जलमार्ग और हवाई परिवहन सुविधाओं के साथ जोगीघोपा दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ-साथ शेष उत्तर-पूर्व के लिये भारत का प्रवेश द्वार बन जाएगा।
  • जोगीघोपा में निर्मित MMLP सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की भारतमाला परियोजना के अंतर्गत देश का पहला अंतर्राष्ट्रीय मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क होगा।

कोपिली फॉल्ट ज़ोन (Kopili Fault Zone)

संदर्भ

  • असम में ‘हिमालयी फ्रंटल थ्रस्ट (Himalayan Frontal Thrust)  के निकट स्थित कोपिली फॉल्ट ज़ोन में हाल ही में एक शक्तिशाली भूकंप आया।

कोपिली फॉल्ट ज़ोन के बारे में

  • कोपिली फॉल्ट ज़ोन एक 300 किमी लंबी और 50 किमी चौड़ी रेखीय आकृति या रैखिक विशेषता (Lineament) है जो मणिपुर के पश्चिमी भाग से भूटान, अरुणाचल प्रदेश और असम के ट्राई-जंक्शन तक फैली हुई है।
  • यह क्षेत्र भूकंपीय रूप से अत्यंत सक्रिय है और उच्चतम भूकंपीय खतरा क्षेत्र V के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र उस संपार्श्विक विवर्तनिक से संबद्ध है जहाँ भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे स्थित है।
  • सबडक्शन (Subduction) एक भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें एक ‘क्रस्टल प्लेट’ (Crustal Plate) का किनारा दूसरे के नीचे खिसक जाता है।
  • हिमालयन बेल्ट और सुमात्रान बेल्ट के सबडक्शन और टकराव क्षेत्र के बीच दबा हुआ क्षेत्र होने के कारण उत्तर-पूर्व भारत भूकंप की घटनाओं के प्रति अत्यधिक प्रवण है।
  • कोपिली नदी (Kopili river) और उसकी सहायक नदियों के जलोढ़ से भरे एक विवर्तनिक गर्त के रूप में कोपिली फॉल्ट ज़ोन ने अतीत में 1869 के भूकंप (7.8 तीव्रता) और 1943 के भूकंप (7.3 तीव्रता) सहित कई शक्तिशाली भूकंपीय गतिविधियाँ देखी हैं। 

लक्षद्वीप (Lakshadweep)

संदर्भ 

  • भारत की भागीदारी गारंटी प्रणाली (Participatory Guarantee System- PGS) के तहत संपूर्ण लक्षद्वीप को एक जैविक कृषि क्षेत्र घोषित किया गया है।

लक्षद्वीप के बारे में

  • लक्षद्वीप शत प्रतिशत जैविक क्षेत्र बनने वाला देश का पहला केंद्रशासित प्रदेश है, जहाँ सभी प्रकार की खेती सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों आदि के उपयोग के बिना की जाती है। इससे पहले वर्ष 2016 में सिक्किम भारत का पहला 100 प्रतिशत जैविक राज्य बना था।
  • यह अरब सागर में स्थित 36 द्वीपों का एक द्वीपसमूह है, जो मुख्य भूमि के दक्षिण-पश्चिमी में स्थित है।
  • द्वीप के अमीनीदीव (Aminidivi) उपसमूह (मुख्य रूप से अमीनी, किल्तन, चेतलत, कदमत, बितरा और पेरूमल पार) और लक्कादीव (Laccadive) उपसमूह (मुख्य रूप से अन्दरोत, कल्पेनी, कवरत्ती, पित्ती और सुहेली पार) के बीच पित्ती बैंक के माध्यम से जलमग्न संपर्क है। 
  • मिनिकॉय द्वीप (Minicoy Island), जो 200 किलोमीटर चौड़े नाइन डिग्री चैनल के दक्षिणी छोर पर स्थित एकमात्र प्रवाल-द्वीप है, के साथ वे अरब सागर में भारत के कोरल द्वीप का निर्माण करते हैं। 

पोलावरम सिंचाई परियोजना (Polavaram Irrigation Project)

संदर्भ

  • पोलावरम परियोजना आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर निर्माणाधीन बहुउद्देश्यीय सिंचाई परियोजना है। 

पोलावरम के बारे में

  • पोलावरम आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी ज़िले का एक गाँव है। 
  • पापी हिल्स और पोलावरम परियोजना गाँव की प्रमुख पहचान हैं। इस परियोजना को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है।
  • यह क्षेत्र मुसुनुरी नायकों के कम्मा राजाओं के शासन में था। कम्मा राजा मुसुनुरी प्रोलैय्या ने सन् 1330 में पोलावरम गाँव को ब्राह्मणों को दान में दिया था। पोलावरम, पोल या प्रोल (राजा) और वरम (दान) के संयुक्त होने से बना है।
  • पोलावरम परियोजना अपने वित्तपोषण, प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आंध्र प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों, जैसे ओडिशा और तेलंगाना के क्षेत्रों पर प्रभाव जैसे विभिन्न संदर्भों में एक विवादास्पद मुद्दा रहा है।  

रानेबेन्नुर (Ranebennur)

संदर्भ

  • कर्नाटक के रानेबेन्नुर में ऊन प्रसंस्करण के लिये एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है।

रानीबेन्नूर के बारे में

  • रानीबेन्नूर कर्नाटक के हावेरी ज़िले का एक शहर है। यहाँ एक समृद्ध पण्य बाज़ार (Commodity Market) मौजूद है। यहाँ सूती धागे, बिनौला, तिलहन, लाल मिर्च, सुपारी और पान जैसी वस्तुओं का कारोबार होता है।
  • कर्नाटक की सबसे महत्त्वपूर्ण नदियों में से एक तुंगभद्रा रानेबेन्नुर तालुक की दक्षिणी सीमा से होकर बहती है। 
  • एक अन्य नदी कुमाडवती (Kumadvathi), जो मदाघ मसूर झील से निकलती है, रानेबेन्नुर में प्रवेश करती है और फिर तुंगभद्रा नदी में मिल जाती है
  • रानेबेन्नुर कृष्णमृग अभयारण्य, कृष्णमृग (Blackbuck), ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और भेड़िया प्रजातियों का घर है। यहाँ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को अंतिम बार वर्ष 2005 में देखा गया था और संभव है कि वे स्थानीय रूप से विलुप्त हो गए हों।

साबरमती नदी (Sabarmati River)

संदर्भ

  • अहमदाबाद नगर निगम ‘साबरमती रिवरफ्रंट’ के विकास की दिशा में काम कर रहा है।

साबरमती नदी के बारे में

  • साबरमती नदी एक मानसून-आधारित नदी है जो अहमदाबाद में उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है और शहर को उसके पश्चिमी और पूर्वी अर्द्ध हिस्सों में विभाजित करती है
  • यह पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदियों में से एक है जो राजस्थान के उदयपुर ज़िले की अरावली रेंज से निकलती है। यह अरब सागर के खंभात की खाड़ी में गिरती है।
  • यह नदी तीन भू-आकृति क्षेत्रों से गुजरती है: चट्टानी ऊपरी भूमि, मध्य जलोढ़ मैदान और निचला मुहाना क्षेत्र।
  • धरोई बाँध (Dharoi Dam) इसी नदी पर स्थित है।

सेला सुरंग (Sela Tunnel)

संदर्भ

  • सेला सुरंग एक निर्माणाधीन सड़क है जो असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच वर्ष भर संपर्क सुनिश्चित करेगी।

सेला सुरंग के बारे में 

  • यह 13,700 फीट की ऊँचाई पर सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation-  BRO) द्वारा क्रियान्वित की जा रही है।
  • पूरी हो जाने के बाद यह सुरंग तवांग और आगे के सीमांत क्षेत्रों के लिये हर मौसम में संपर्क प्रदान करेगी क्योंकि यह हिमस्खलन प्रवण और बर्फबारी वाले क्षेत्रों से सुरक्षित होगी।
  • यह तेज़पुर से तवांग तक की यात्रा के समय को एक घंटे से अधिक घटा देगी और इस क्षेत्र में पर्यटन और संबंधित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।
  • इसके निर्माण से बोमडिला और तवांग के बीच 171 किलोमीटर की सड़क हर मौसम में आवागमन के लिये सुलभ रहेगी।

तालचेर (Talcher) 

संदर्भ

  • भारत का पहला कोयला गैसीकरण आधारित उर्वरक संयंत्र (Coal Gasification-Based Fertiliser Plant) तालचेर/तलचर/तालचार में स्थापित किया जा रहा है।

तालचेर के बारे में

  • तालचेर (ओडिशा) ब्राह्मणी नदी के तट पर स्थित है ।
  • 14वीं शताब्दी में पंचडीहा चासा, जो मुख्य रूप से कृषक समुदाय थे, इस उपजाऊ क्षेत्र में आए और यहाँ वास करने लगे। तालचेर के राजा पद्मनाभ बीरबार हरिचंदन ने कुलदेवी तालेश्वरी के नाम पर राज्य का नाम बदलकर तालचेर कर दिया। 
  • तालचेर को ‘सिटी ऑफ ब्लैक डायमंड’ या ‘कोल सिटी ऑफ ओडिशा’ भी कहा जाता है और यह भारत का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है।

कला और संस्कृति

Art-Culture

छह विरासत स्थलों को यूनेस्को की अस्थायी सूची में जोड़ा गया

चर्चा में  क्यों?

  • छह भारतीय स्थानों को यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों (World Heritage Sites- WHS) की अस्थायी सूची (Tentative List) में जोड़ा गया है। यूनेस्को के संचालनात्मक दिशा-निर्देश (Operational Guidelines), 2019 के अनुसार किसी भी स्मारक/स्थल को विश्व विरासत स्थल (World Heritage Site) की सूची में अंतिम रूप से शामिल करने से पहले उसे एक वर्ष के लिये इसके अस्थायी सूची में रखना अनिवार्य है।
  • अस्थायी सूची में शामिल छः नए स्थल हैं:
    • वाराणसी के घाट (उत्तर प्रदेश):
    • कांचीपुरम के मंदिर (तमिलनाडु)
    • सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व (मध्य प्रदेश)
    • मराठा सैन्य वास्तुकला (महाराष्ट्र)
    • हायर बेनकल का महापाषाण स्थल (कर्नाटक)
    • नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट-लमेताघाट, जबलपुर (मध्य प्रदेश)

बूंदी की स्थापत्य विरासत

चर्चा में क्यों?

  • पर्यटन मंत्रालय द्वारा हाल ही में 'देखो अपना देश' शीर्षक से एक वेबिनार शृंखला का आयोजन किया गया, जो राजस्थान के बूंदी ज़िले की स्थापत्य विरासत पर केंद्रित है।

बूंदी के बारे में

  • सुख महल, रानी की बावड़ी, तारागढ़ किला, 84 खंभों वाला सेनोटाफ, गढ़ पैलेस, बादल महल, छत्र महल आदि बूंदी की स्थापत्य विरासत के कुछ उल्लेखनीय स्थल हैं।
  • बूंदी पर कभी हाड़ा चौहान का शासन था। कई इतिहासकारों का दावा है कि यह कभी महान हाड़ौती साम्राज्य की राजधानी थी, जो अपनी कला और मूर्तिकला के लिये प्रसिद्ध था।
    • हाड़ौती क्षेत्र का नाम हाड़ा चौहान के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने कोटा और बूंदी के आसपास इस क्षेत्र पर शासन किया था।
  • प्राचीन काल में बूंदी के आसपास का क्षेत्र स्पष्ट रूप से विभिन्न स्थानीय जनजातियों द्वारा बसा हुआ था जिनमें परिहार मीणा और भील मीणा प्रमुख थे।
  • बाद में इस क्षेत्र पर राव देव का शासन था, जिन्होंने वर्ष 1242 में जैता मीणा से इसे प्राप्त करने के बाद बूंदी पर अधिकार कर लिया और आसपास के क्षेत्र का नाम बदलकर हरवती या हाड़ौती कर दिया।
  • अगली दो शताब्दियों तक बूंदी के हाड़ा मेवाड़ के सिसोदिया के जागीरदार रहे और बादशाह अकबर के बाद 1569 तक राव की उपाधि से शासित थे।

धौलावीरा

चर्चा में क्यों?

  • हड़प्पा युग के पुरातात्त्विक स्थल धौलावीरा को हाल ही में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। धौलावीरा, इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने वाला सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation- IVC) का पहला भारतीय स्थल है।

धौलावीरा के बारे में:

  • धौलावीरा का प्राचीन शहर हड़प्पा सभ्यता का दक्षिणी केंद्र, गुजरात राज्य में खादिर के शुष्क द्वीप (Arid Island) पर स्थित है।
  • 3000-1500 ईसा पूर्व के बीच इस पर कब्ज़ा कर लिया गया, यह इस अवधि की दक्षिण-पूर्व एशिया की अच्छी तरह से संरक्षित शहरी बस्तियों में से एक है, जिसमें एक चारदीवारी युक्त शहर (Fortified City) और एक कब्रिस्तान शामिल है।
  • जबकि धौलावीरा, सूची में शामिल गुजरात की चौथी और भारत की 40वीं साइट बन गई है। यह भारत में प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation- IVC) की पहली साइट है जिसे टैग मिला है।
    • गुजरात में इससे पहले तीन विश्व धरोहर स्थल थे- पावागढ़ के पास चंपानेर, पाटन में रानी की वाव और ऐतिहासिक शहर अहमदाबाद।

गोवा

चर्चा में क्यों?  

  • मराठा राजा छत्रपति शिवाजी (Chhatrapati Shivaji) के राज्याभिषेक दिवस (6 जून) की वर्षगाँठ के अवसर पर गोवा सरकार ने एक लघु फिल्म जारी की है जिसमें गोवा के इतिहास और पुर्तगालियों से लड़ने में शिवाजी की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
  • गोवा के बारे में
  • गोवा, भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर कोंकण के रूप में जाना जाने वाले क्षेत्र में स्थित है और भौगोलिक रूप से दक्कन उच्च भूमि से पश्चिमी घाट द्वारा अलग होता है।
  • यह क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे छोटा राज्य है और सभी भारतीय राज्यों में इसकी प्रति व्यक्ति GDP सबसे अधिक है।
  • यहाँ की प्रमुख नदियों में जुआरी, मांडवी, तेरेखोल, चपोरा, गलगिबाग आदि शामिल हैं। 
  • गोवा, दमन और दीव आधिकारिक अधिनियम, 1987 देवनागरी लिपि में कोंकणी को गोवा की एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाता है, लेकिन यह प्रावधान करता है कि मराठी का उपयोग ‘सभी या किसी भी आधिकारिक उद्देश्यों’ के लिये भी किया जा सकता है।

गुरुवायुर, केरल

चर्चा में क्यों?

  • पर्यटन मंत्रालय की प्रसाद योजना (PRASAD Scheme) के अंतर्गत ‘केरल के गुरुवायुर विकास’ परियोजना के तहत एक पर्यटक सुविधा केंद्र का निर्माण किया गया था।

गुरुवायुर के बारे में  

  • यह स्थान भगवान विष्णु के एक रूप भगवान गुरुवायूरप्पन को समर्पित गुरुवायुर मंदिर के लिये प्रसिद्ध है। मंदिर को गुरुवायुर श्री कृष्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
  • मंदिर के प्रसिद्ध त्योहार- गुरुवायुर एकादशी, चेम्बई संगीतहोल्सवम आदि हैं।
  • मंदिर के उत्तर की ओर स्थित मंदिर टैंक (तालाब) को रुद्रतीर्थम कहा जाता है।
  • 14वीं शताब्दी के तमिल साहित्य 'कोकासंदेसम (Kokasandesam)' में गुरुवायुर नामक स्थान का उल्लेख मिलता है।

कडप्पा, आंध्र प्रदेश

संदर्भ

  • आंध्र प्रदेश के कडप्पा (Kadapa) ज़िले में खुदाई के दौरान रेनाटी चोल युग (Renati Chola Era) के एक दुर्लभ शिलालेख (Rare Inscription) की प्राप्ति हुई है।

कडप्पा के बारे में

  • यह शहर तीन तरफ से नल्लामाला और पालकोंडा पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
  • कडप्पा अपने इतिहास में विभिन्न शासकों के अधीन रहा है, जिसमें निजाम, चोल, विजयनगर साम्राज्य और मैसूर साम्राज्य शामिल हैं।
  • खोजा गया शिलालेख पुरातन तेलुगू में लिखा गया था। शिक्षाविद् बताते हैं कि यह शिलालेख सिद्यामायु (Sidyamayu) नामक एक व्यक्ति को उपहार में दी गई छह मार्टटस [Marttus- एक प्रकार की भूमि मापने की इकाई) भूमि के रिकॉर्ड से संबंधित है। सिद्यामायु (Sidyamayu), पिडुकुला गाँव में मंदिर की सेवा करने वाले ब्राह्मणों में से एक था।

काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर

चर्चा में क्यों?

  • तेलंगाना में काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर, जिसे रामप्पा मंदिर भी कहा जाता है, को हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया गया है।

रामप्पा मंदिर के बारे में

  • 40 वर्षों तक मंदिर निर्माण करने वाले एक मूर्तिकार के नाम पर इसे रामप्पा मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। इसका निर्माण 1213 ईस्वी में काकतीय राजवंश (Kakatiya Dynasty) के शासन काल में कराया गया था।
  • मंदिर का निर्माण काकतीय राजवंश के शासन काल में काकतीय राजा गणपति देव के एक सेनापति रेचारला रुद्र ने कराया था। 
  • विश्व धरोहर स्थल की सूची में जगह बनाने वाला यह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का पहला और एकमात्र स्मारक है।
  • मंदिर को जो चीज़ वास्तव में अलग करती है, वह हैं इसकी 'हल्की ईंटें' जिनका उपयोग मंदिर की 'शिकारा' छत के निर्माण के लिये किया गया था।
    • ईंटें इतनी हल्की हैं कि वे पानी पर तैर सकती हैं।
    • ईंट का घनत्व 0.85 से 0.9 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर के बीच है, जबकि पानी का घनत्व 1 ग्राम/सीसी होता है।
    • किसी भी सामान्य ईंट का घनत्व लगभग 2.2 g/cc होता है।

कोटड़ा भादली

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में मिट्टी के बर्तनों पर आधारित एक अध्ययन से पता चला है कि हड़प्पा निवासियों द्वारा डेयरी उत्पादों का प्रयोग किया जाता था।

खोज के बारे में

  • कोटड़ा भादली लगभग 3.11 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एक छोटा सा गाँव है और यह दो नदियों के संगम पर स्थित है।
  • इस अध्ययन का परिणाम कोटड़ा भादली (गुजरात) के एक पुरातात्त्विक स्थल पर पाए गए बर्तनों के टुकड़ों से प्राप्त भोज्य पदार्थों के अणुओं (जैसे- वसा और प्रोटीन) के आणविक रासायनिक विश्लेषण पर आधारित है। 
  • इस खोज से यह रहस्योद्घाटन होता है कि इस उपमहाद्वीप में पनीर बनाया और उपयोग किया जाता था, इसे परिपक्व हड़प्पा काल के रूप में जाना जाता है।
    • यह पनीर बनाने का इस क्षेत्र में सबसे प्रथम साक्ष्य होगा।
  • वर्ष 2018 के एक अध्ययन में 5200 ईसा पूर्व में भूमध्य सागर में डेयरी प्रसंस्करण की प्रथा को स्थापित करने के लिये क्रोएशिया के डालमेटियन तट से मिट्टी के बर्तनों में लिपिड अवशेषों की कार्बन डेटिंग का प्रयोग किया गया।

लोथल 

चर्चा में क्यों?

  • भारत की समुद्री विरासत और इतिहास को प्रदर्शित करने के लिये गुजरात के लोथल क्षेत्र में एक राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) विकसित किया जाएगा। NMHC में राष्ट्रीय समुद्री विरासत संग्रहालय, हेरिटेज थीम पार्क और लाइटहाउस संग्रहालय जैसी विभिन्न अनूठी संरचनाएँ शामिल होंगी।

लोथल के बारे में

  • लोथल गुजरात में स्थित प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे दक्षिणी शहरों में से एक था। इसकी खोज 1955-1960 के दौरान एस.आर. राव ने की थी।
  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, लोथल में दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात डॉक था, जो लोथल शहर को सिंध के हड़प्पा शहरों और सौराष्ट्र प्रायद्वीप के बीच व्यापार मार्ग पर साबरमती नदी के एक प्राचीन मार्ग से जोड़ता था।
  • प्राचीन काल में लोथल एक महत्त्वपूर्ण एवं संपन्न व्यापार केंद्र था, जिसके मोतियों, रत्नों और बहुमूल्य गहनों का व्यापार पश्चिम एशिया और अफ्रीका के सुदूर क्षेत्रों तक विस्तृत था।
  • मृतकों को दफनाने का सबसे अनूठा तरीका लोथल में पाया गया जैसे- जुड़वाँ दफन, यानी दो व्यक्तियों को एक साथ दफनाना।

बसवकल्याण में न्यू अनुभव मंडप

चर्चा में क्यों?

  • बसवकल्याण में 'न्यू अनुभव मंडप' की आधारशिला रखी गई। इसका निर्माण वास्‍तुकला की कल्‍याण चालुक्‍य शैली में किया जाएगा।

बसवकल्याण के बारे में

  • बसवकल्याण पर पश्चिमी चालुक्य, कल्याणी के कलचुरी, देवगिरि के यादव, काकतीय, दिल्ली सल्तनत, बहमनी सल्तनत (बीदर, गुलबर्गा), बीदर सल्तनत, बीजापुर सल्तनत, मुगल और हैदराबाद के निजाम का शासन था।
  • यह 1050 से 1195 तक पश्चिमी चालुक्य (कल्याणी चालुक्य) राजवंश की शाही राजधानी थी। सोमेश्वर प्रथम (1041-1068) ने कल्याण को अपनी राजधानी बनाया, जिसे बादामी चालुक्यों से अलग करने के लिये कल्याणी चालुक्य के रूप में मान्यता दी गई।
  • कल्याणी के कलचुरी कल्याणी चालुक्यों के उत्तराधिकारी बने और कल्याणी को अपनी राजधानी के रूप में बनाए रखा।
  • 12वीं शताब्दी के दौरान कल्याणी राजा बिज्जला (1156-1167) के कलचुरियों ने सिंहासन ग्रहण किया और बसवेश्वर को उनके महामात्य के रूप में नियुक्त किया गया।
  • बसवकल्याण किले का निर्माण चालुक्यों ने करवाया था।

कच्छ का रण

चर्चा में क्यों?

  • पर्यटन मंत्रालय ने वर्ष 2020 में गुजरात के कच्छ के रण में गंतव्य प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी पर एक सम्मेलन का आयोजन किया।

कच्छ के रण के बारे में

  • कच्छ का रण ‘साल्ट मार्शेस’ (Salt Marshes) या रेह भूमि का एक बड़ा क्षेत्र है जो भारत एवं पाकिस्तान की सीमा पर फैला हुआ है, यह अधिकतर गुजरात में स्थित है।
  • राजस्थान और गुजरात से निकलने वाली कई नदियाँ कच्छ के रण में बहती हैं, जिनमें लूनी, भुकी, भरूद, नारा, खरोद, बनास, सरस्वती, रूपेन, बंभान और माच्छू शामिल हैं।
  • कोरी खाड़ी (Kori Creek) और सर खाड़ी (Sir Creek) ज्वार की खाड़ियाँ हैं जो ग्रेट रण (Great Rann) के पश्चिमी छोर पर स्थित सिंधु नदी डेल्टा का हिस्सा हैं।
    • एक ज्वारीय संकरी खाड़ी छोटे जलमार्ग को संदर्भित करती है जिसमें मिश्रित जल (लवणीय और स्वच्छ) होता है। यह एक धारा का हिस्सा है जो समुद्र के ज्वार से प्रभावित होती है। कम ज्वार के दौरान खाड़ी सूख सकती है और एक चैनल बन सकता है। दूसरी ओर, उच्च ज्वार के दौरान उनमें बड़ी मात्रा में जल होता है।
  • मिट्टी के बेलनाकार भुंगों (झोपड़ियों) के साथ जनजातीय बस्तियाँ कच्छ कढ़ाई, टाई और डाई, चमड़े का काम, मिट्टी के बर्तनों, बेल धातु शिल्प एवं प्रसिद्ध रोगन पेंटिंग के लिये उपरिकेंद्र हैं।
  • कच्छ का रण भारत-मलय क्षेत्र (Indo-Malayan Region) का एकमात्र बड़ा बाढ़कृत घास का मैदान है।
  • भारत में सबसे बड़ा IVC साइट धौलावीरा का IVC शहर कच्छ के रण में स्थित है। यह शहर कर्क रेखा पर बनाया गया था जो संभवतः यह दर्शाता है कि धौलावीरा के निवासी खगोल विज्ञान में कुशल थे।
  • कच्छ के रण में खिरसारा (Khirasara) का औद्योगिक स्थल भी था, जहाँ एक गोदाम भी मिला था।

सोमनाथ, गुजरात

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में गुजरात के सोमनाथ में तीर्थयात्रा सुविधाओं के विकास से संबंधित परियोजना का उद्घाटन किया गया।

सोमनाथ के बारे में 

  • सोमनाथ (ज़िले का नाम गिर सोमनाथ) जो कि सोमनाथ मंदिर के लिये प्रसिद्ध है, यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग है और गिर अभयारण्य एशियाई शेरों का एकमात्र निवास स्थान है।
  • गिर अपने केसर आम, सिद्दी के लोक नृत्य "धमाल" और गिर राष्ट्रीय उद्यान तथा अभयारण्य के लिये प्रसिद्ध है।
    • सिद्दी लोग, जो मूल रूप से अफ्रीका के हैं, जंबूर गाँव में रहते हैं, जिसे भारत का मिनी अफ्रीका भी कहा जाता है।
  • जे गॉर्डन मेल्टन द्वारा प्रलेखित लोकप्रिय परंपरा के अनुसार, माना जाता है कि सोमनाथ में पहला शिव मंदिर अतीत में किसी अज्ञात समय पर बनाया गया था।
  • कहा जाता है कि दूसरा मंदिर 649 ईस्वी के आसपास वल्लभी के यादव राजाओं द्वारा उसी स्थान पर बनाया गया था। कहा जाता है कि 725 CE में सिंध के अरब गवर्नर अल-जुनैद ने गुजरात और राजस्थान के अपने आक्रमणों के हिस्से के रूप में दूसरे मंदिर को नष्ट कर दिया था। 
  • कहा जाता है कि गुर्जर-प्रतिहार राजा नागभट्ट द्वितीय ने 815 CE में तीसरे मंदिर का निर्माण किया था, जो लाल बलुआ पत्थर की एक बड़ी संरचना थी।
  • वर्ष 1024 में भीम प्रथम के शासन काल के दौरान गजनी के प्रमुख तुर्क मुस्लिम शासक महमूद ने गुजरात पर हमला किया और सोमनाथ मंदिर को लूट लिया तथा उसके ज्योतिर्लिंग को तोड़ दिया।
  • गुजरात में 1299 आक्रमण के दौरान उलुग खान के नेतृत्व में अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने वाघेला राजा कर्ण को हराया और सोमनाथ सहित कई शहरों को लूट लिया।
  • इसका पुनर्निर्माण मंदिर वास्तुकला की चालुक्य शैली में किया गया है और 1951 में इसके पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हुआ था।

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

Environment-Ecology

अगस्त्यवनम जैविक उद्यान (Agasthyavanam Biological Park)

संदर्भ

केरल वन एवं वन्यजीव विभाग (Kerala Forest and Wildlife Department) द्वारा हाल ही में शुरू की गई 'वनिका' नामक पहल ने अगस्त्यवनम जैविक उद्यान में निवास करने वाले आदिवासियों को अपनी कृषि और वन उपज को ऑनलाइन बिक्री करने में सक्षम बनाया है।

प्रमुख बिंदु

  • वर्ष 1997 में स्थापित अगस्त्यवनम जैविक उद्यान केरल के तिरुवनंतपुरम के पास अवस्थित एक वन्यजीव अभयारण्य है।
  • उद्यान का नाम अपनी सुंदरता से मंत्रमुग्ध कर देने वाले अगस्त्यमलाई अगस्त्यकूडम शिखर (Agasthyamalai Agasthyakoodam Peak) के नाम पर रखा गया है जिसे यहाँ से देखा जा सकता है।
  • यह उद्यान नेय्यर और पेप्पारा वन्यजीव अभयारण्यों से लगा हुआ है। यह अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिज़र्व के एक वृहत संरक्षित क्षेत्र के एक हिस्से का भी निर्माण करता है।

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व (Bandhavgarh Tiger Reserve)

संदर्भ

किसी टाइगर रिज़र्व में भारत की पहली हॉट एयर बैलून वाइल्डलाइफ सफ़ारी (Hot Air Balloon Wildlife Safari) हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में शुरू की गई।

प्रमुख बिंदु

  • बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व मध्य प्रदेश के उमरिया और कटनी ज़िलों की पूर्वी सतपुड़ा पहाड़ी शृंखला में स्थित है। इस संरक्षित क्षेत्र का उल्लेख नारद पंच रत्न तथा शिव संहिता पुराण में भी मिलता है।
  • इसे वर्ष 1968 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अधिसूचित किया गया था और वर्ष 1993 में इसे एक टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया। यह मध्य प्रदेश में विंध्य पहाड़ियों पर फैला हुआ है जहाँ खड़ी ढाल, ऊँची-नीची भूमि एवं वन से लेकर खुले घास के मैदान तक विभिन्न स्थालाकृतियाँ पाई जाती हैं।
  • बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में ऊँचे घास के मैदानों से लेकर घने जंगल तक मिश्रित वनस्पति-जगत व्याप्त है और इसलिये यह विभिन्न प्रकार के जंतुओं व पक्षियों के लिये एक आदर्श पर्यावास का निर्माण करता है।

भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य (Bhagwan Mahaveer Wildlife Sanctuary)

संदर्भ

गंभीर पर्यावरणीय चिंताएँ जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय की केंद्रीय अधिकारिता समिति (Central Empowerment Committee of the Supreme Court) ने भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य और मोल्लेम राष्ट्रीय उद्यान से गुजरने वाली गोवा रेल परियोजना (Goa Rail Projects) को लाल झंडी दिखा दी है।

प्रमुख बिंदु

  • पश्चिमी घाट की तलहटी पर स्थित भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य (BMWS) गोवा के चार संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों में सबसे बड़ा है और इसके अंदर ही मोल्लेम राष्ट्रीय उद्यान (MNP) शामिल है। 
  • प्रसिद्ध दूधसागर जलप्रपात (Dudhsagar Waterfall) और डेविल्स कैन्यन (Devil’s Canyon) यहीं मौजूद हैं। 
  • वनों के प्रकार: यहाँ पश्चिमी तट उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, पश्चिमी तट अर्द्ध-सदाबहार वन और नम पर्णपाती वन पाए जाते हैं। 
  • जंतु प्रजाति: हिरण, सांभर, चित्तीदार हिरण, जंगली सूअर, माउस डियर एवं बार्किंग डियर, बाघ, लेपर्ड कैट, पैंथर, छोटे भारतीय सिवट, जंगली कुत्ता, लकड़बग्घा, स्लॉथ बेयर, सियार, बोनट मकाक, स्लेंडर लोरिस, स्केली एंटईटर, विशाल गिलहरी, उड़ने वाली गिलहरी आदि।  
  • पादप प्रजाति: यहाँ पाई जाने वाली प्रमुख वृक्ष प्रजातियों में टर्मिनेलिया (Terminalia), जरुल (Lagerstroemia/Crepe Myrtle), जाम्बु (Xylia) और शीशम (Dalbergia/Timber Trees) शामिल हैं।

देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य (Dehing Patkai Wildlife Sanctuary)

संदर्भ

हाल ही में असम सरकार ने देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्यान (National Park) के रूप में अपग्रेड किया।

अभयारण्य के बारे में

  • इस उन्नयन के बाद देहिंग पटकाई असम का सातवाँ राष्ट्रीय उद्यान बन गया है। इससे पूर्व रायमोना रिज़र्व फॉरेस्ट को छठे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अपग्रेड किया गया था। असम में पहले से मौजूद पाँच राष्ट्रीय उद्यान हैं- काजीरंगा, नामेरी, मानस, ओरंग और डिब्रू-सैखोवा।
  • देहिंग पटकाई को वर्ष 2004 में एक वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था और यहाँ पादपों एवं जीवों की विविध प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • यह वृहत क्षेत्र में विस्तृत देहिंग पटकाई एलीफैंट रिज़र्व के अंदर स्थित है, जो ऊपरी असम (डिब्रूगढ़, तिनसुकिया तथा शिवसागर) के कोयला और तेल-समृद्ध ज़िलों में फैला हुआ है और माना जाता है कि यह असम में तराई के वर्षावन क्षेत्र का अंतिम शेष सन्निहित पैच है।
  • जंतु प्रजाति: इस क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ जीवों में चीनी पैंगोलिन, फ्लाइंग फॉक्स, जंगली सूअर, सांभर, बार्किंग डियर, गौर, सीरो और मलय विशाल गिलहरी शामिल हैं।
    • यह भारत का एकमात्र अभयारण्य है जहाँ जंगली बिल्ली प्रजाति की सात अलग-अलग प्रजातियों का घर है- बाघ, तेंदुआ, क्लाउडेड लेपर्ड, लेपर्ड कैट, गोल्डन कैट, जंगल कैट और मार्बल्ड कैट।
    • यहाँ संकटग्रस्त (Endangered) व्हाइट विंग्ड वुड डक (White Winged Wood Duck) की सघनतम आबादी पाई जाती है।
  • पादप प्रजाति: देहिंग पटकाई एक पर्णपाती वर्षावन है जो अर्द्ध-सदाबहार एवं हरे-भरे वनस्पतियों से घिरा हुआ है।

डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान (Dibru-Saikhowa National Park)

संदर्भ

ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के अंदर सात कुएँ खोदने के निर्णय पर चिंता प्रकट की गई है।

प्रमुख बिंदु

  • डिब्रू-सैखोवा एक राष्ट्रीय उद्यान के साथ-साथ बायोस्फीयर रिज़र्व भी है जो असम के सुदूर पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। 
  • यह उत्तर में लोहित एवं ब्रह्मपुत्र नदियों और दक्षिणी में डिब्रू नदी से घिरा है।
  • वन: अर्द्ध-सदाबहार वन, पर्णपाती वन, तटीय एवं अनूप वन और आर्द्र सदाबहार वनों के अलग-अलग खंड। 
  • उत्तर-पूर्व भारत का सबसे बड़ा सैलिक्स अनूप वन (Salix swamp forest) इसी रिज़र्व के अंदर स्थित है। 
  • जंतु प्रजाति: बाघ, हाथी, तेंदुआ, छोटे भारतीय सिवेट, गंगा डॉल्फिन, स्लो लोरिस आदि। 
  • इसे एक महत्त्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया जाता है।

ज़ुकू घाटी (Dzukou Valley)

संदर्भ

मणिपुर-नगालैंड सीमा पर स्थित ज़ुकू घाटी वनाग्नि (Wildfire) की चपेट में आ गई थी। 

ज़ुकू घाटी के बारे में

  • ज़ुकू घाटी नगालैंड और मणिपुर की सीमा पर स्थित है। जापफू शिखर (Japfu Peak) के ठीक पीछे स्थित यह घाटी उत्तर-पूर्व के सबसे लोकप्रिय ट्रेकिंग स्पॉट (Trekking Spots) में से एक है।
  • ज़ुकू घाटी और जापफू शिखर नगालैंड के पुलीबडज़े वन्यजीव अभयारण्य (Pulie Badze Wildlife Sanctuary) के निकट स्थित हैं।
  • ज़ुकू घाटी हर मौसम में विभिन्न प्रकार के फूलों के लिये भी प्रसिद्ध है और इसे ‘फूलों की घाटी’ भी कहा जाता है। यह अंगामी जनजाति का निवास स्थान भी है। 
  • जंतु प्रजाति: यह बेलीथ ट्रगोपन (Blyth's Tragopan) का आवास क्षेत्र है, जो नगालैंड का राज्य पक्षी है। यहाँ एशियाई सुनहरी बिल्ली, हूलॉक गिब्बन, हॉर्नेड टॉड, कैप्ड लंगूर, स्टंप-टेल्ड मैकाक और सीरो भी पाए जाते हैं। 
  • पादप प्रजाति: यहाँ हर मौसम में ही विभिन्न प्रकार के फूल खिले रहते हैं, लेकिन इनमें ज़ुकू लिली सबसे प्रसिद्ध है जो केवल इस घाटी में पाई जाती है। इसके अलावा, यहाँ कई रोडोडेंड्रोन प्रजातियाँ और एकोनिता नगरम (Aconita Nagaram) जैसे पौधे पाए जाते हैं।

करलापट वन्यजीव अभयारण्य (Karlapat Wildlife Sanctuary)

संदर्भ

हाल ही में करलापट वन्यजीव अभयारण्य में हेमरिज सेप्टीसीमिया (Haemorrhagic Septicaemia) के कारण छह हाथियों की मौत हो गई।

प्रमुख बिंदु

  • यह ओडिशा के कालाहांडी ज़िले में स्थित है। 
  • वनस्पति: शुष्क पर्णपाती वन।
  • जंतु प्रजाति: तेंदुआ, गौर, सांभर, नीलगाय, बार्किंग डियर, माउस डियर, सॉफ्ट क्लॉ ओटावा, आदि।
  • पादप प्रजाति: साल, बीजा, बाँस, औषधीय पौधे आदि। 
  • फुलीझरण जलप्रपात अभयारण्य के भीतर स्थित है।

कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य (Koundinya Wildlife Sanctuary)

संदर्भ

कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य तथा तमिलनाडु के सीमा से लगे जंगलों से जंगली हाथियों का झुंड बाहर निकल आता है जो लोगों और वन अधिकारियों के लिये चिंता का विषय बनता है।

प्रमुख बिंदु

  • कौंडिन्य आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के पालमनेर-कुप्पम वन शृंखला में स्थित है। यह अभयारण्य आंध्र प्रदेश राज्य में एशियाई हाथियों का एकमात्र आवास स्थान है।
  • यह अभयारण्य हाथी परियोजना के अंतर्गत आता है जो भारत सरकार द्वारा परिचालित एक देशव्यापी हाथी संरक्षण परियोजना है।
  • इस अभयारण्य में कटीली झाड़ियों के साथ शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous Forests) पाए जाते हैं।
  • अभयारण्य एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहाँ कोलार पठार समाप्त होता है और कई घाटियों एवं घाटों का निर्माण करता हुआ तमिलनाडु के मैदानी इलाकों में उतर जाता है।
  • जंतु प्रजाति: इस अभयारण्य में असुरक्षित (Vulnerable- VU) पीले गले वाली बुलबुल (Yellow-Throated Bulbul) पाई जाती है। 
  • अभयारण्य में पाए जाने वाले कुछ अन्य जीवों में स्लॉथ बियर, तेंदुआ, चीतल, चौसिंघा, सांभर, साही, जंगली सूअर, जंगली बिल्ली, सियार, जंगली मुर्गी, तारांकित कछुआ और स्लेंडर लोरिस शामिल हैं।
  • पादप प्रजाति: यहाँ पाए जाने वाले पादप प्रजातियों में अल्बिजिया अमारा (Albizia amara) अकेसिया (Acacia), लगेरस्ट्रोमिया (Lagerstroemia), फिकस (Ficus), बाँस और संतालम एल्बम (Santalum album) शामिल हैं।

मगुरी बील (Maguri Beel)

संदर्भ

हाल ही में लगभग एक सदी बाद मगुरी-मोटापुंग बील (Maguri-Motapung Beel) में मंदारिन बतख (Mandarin Ducks) देखी गई।

प्रमुख बिंदु

  • ‘मगुरी’ वॉकिंग कैटफ़िश (Walking Catfish) के लिये प्रयुक्त स्थानीय शब्द है। मगुरी बील असम के तिनसुकिया ज़िले में डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित एक आर्द्रभूमि और झील है।
  • यह डिब्रू नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है और एक छोटे से चैनल के माध्यम से डिब्रू नदी से जुड़ती है और अंत में ब्रह्मपुत्र नदी से मिल जाती है।
  • मई 2020 में ‘ऑयल इंडिया लिमिटेड’ के स्वामित्व वाले गैस कुएँ में विस्फोट और आग के कारण इस बील पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। इस कारण हुए तेल के फैलाव से मछलियों, साँपों के साथ-साथ लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के मारे जाने के मामले सामने आए थे।

महेंद्रगिरि पहाड़ी (Mahendragiri Hill)

संदर्भ

ओडिशा सरकार ने समृद्ध जैव विविधता वाले महेंद्रगिरि पहाड़ी पारितंत्र के दक्षिणी भाग में राज्य के दूसरे बायोस्फीयर रिज़र्व की स्थापना का प्रस्ताव किया है।

प्रमुख बिंदु

  • प्रस्तावित महेंद्रगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व पूर्वी घाट में गजपति और गंजाम ज़िलों में विस्तृत होगा।
  • अधिसूचित होने पर यह ओडिशा का दूसरा बायोस्फीयर रिज़र्व बन जाएगा। 5,569 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत सिमलीपाल बायोस्फीयर रिज़र्व ओडिशा का पहला ऐसा रिज़र्व था जिसे 20 मई, 1996 को अधिसूचित किया गया था।
  • महेंद्रगिरि (1,501 मीटर ऊँचाई) ओडिशा में पूर्वी घाट में स्थित पहाड़ी है। यह पूर्वी घाट के उच्चतम बिंदुओं में से एक है। 
  • महेंद्रगिरी में सौरा/सावरा (Soura) लोगों का निवास है जो एक ‘विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह’ (Particularly Vulnerable Tribal Group- PVTG) है।

मलाई महादेश्वर हिल्स वन्यजीव अभयारण्य (Malai Mahadeshwara Hills Wildlife Sanctuary)

संदर्भ

मलाई महादेश्वर हिल्स वन्यजीव अभयारण्य को एक टाइगर रिज़र्व बनाने का प्रस्ताव किया गया है। अधिसूचित होने के बाद यह कर्नाटक का छठा टाइगर रिज़र्व बन जाएगा। 

प्रमुख बिंदु

  • लगभग 670 वर्ग किलोमीटर मुख्य क्षेत्र के साथ प्रस्तावित यह टाइगर रिज़र्व मलाई महादेश्वर रिज़र्व फॉरेस्ट, हनूर रिज़र्व फॉरेस्ट (Hanur Reserve Forest) और येदियाराहल्ली रिज़र्व फॉरेस्ट (Yediyarahalli Reserve Forest) में विस्तृत होगा। प्रस्तावित टाइगर रिज़र्व अधिसूचित मैसूर एलीफैंट रिज़र्व का भी हिस्सा होगा।
  • मलाई महादेश्वर हिल्स वन्यजीव अभयारण्य एक ओर बिलिगिरी रंगनाथस्वामी मंदिर टाइगर रिज़र्व (Biligiri Ranganathaswamy Temple Tiger Reserve) और दूसरी ओर तमिलनाडु के सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व (Sathyamangalam Tiger Reserve) से लगा हुआ है।
  • कावेरी वन्यजीव अभयारण्य भी इसकी सीमा से लगा है, इस प्रकार यहाँ 3,500 वर्ग किलोमीटर से अधिक का एक सन्निहित वन आवरण तैयार होता है जो बाघों की अधिशेष आबादी को सँभालने और उनकी संख्या बढ़ाने में मदद कर सकता है।
  • यहाँ गौर, सांभर, चीतल, चौसिंगा मृग, जंगली सूअर आदि प्रजातियों की बहुतायत है। यहाँ निकट संकटग्रस्त (Near Threatened- NT) का IUCN दर्जा रखने वाली विशालकाय सफ़ेद-भूरे बालों वाली गिलहरी (grizzled giant squirrel) भी पाई जाती है। वर्ष 2014 के एक सर्वेक्षण के अनुसार इस भूदृश्य में लगभग 285 पक्षी प्रजातियों को भी दर्ज किया गया है। 

नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (Nagarahole National Park)

संदर्भ

  • कर्नाटक वन विभाग मोटर चालकों द्वारा वन कानूनों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने और सड़क हादसों को कम करने के लिये नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान के आसपास की सड़कों के लिये एक यातायात निगरानी तंत्र स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रहा है। 

प्रमुख बिंदु

  • नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान को राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जाना जाता है। यह कर्नाटक के कोडागु और मैसूर ज़िलों में स्थित है।  
  • बांदीपुर, मुदुमलाई और वायनाड वन्यजीव अभयारण्य इस अभयारण्य के निकट स्थित हैं। 
  • नागरहोल नदी इस उद्यान से होकर बहती है और धीरे-धीरे काबिनी नदी में मिल जाती है जो नागरहोल और बांदीपुर के बीच की सीमा का भी निर्माण करती है।
  • जंतु प्रजाति: चीतल (चित्तीदार हिरण), भारतीय माउस डियर, गौर, धारीदार गर्दन वाले सुर्ख नेवले (Stripe-Necked and Ruddy Mongooses), ग्रे लंगूर, बोनट मकाक, एशियाई जंगली कुत्ते, तेंदुआ, बाघ आदि। 

नागी-नकटी पक्षी अभ्यारण्य (Nagi-Nakti Bird Sanctuaries)

संदर्भ

हाल ही में बिहार के जमुई ज़िले के नागी-नकटी पक्षी अभ्यारण्य में राज्य के पहले राज्यस्तरीय पक्षी उत्सव 'कलरव' का आयोजन किया गया था।

प्रमुख बिंदु

  • नागी बाँध (Nagi Dam) और नकटी बाँध (Nakti Dam) दो अभयारण्य हैं जो एक दूसरे के इतने निकट हैं कि उन्हें प्रायः एक पक्षी क्षेत्र के रूप में देखा जाता है।
  • नागी-नकटी पक्षी अभ्यारण्य स्थानीय पक्षियों और सर्दियों के दौरान यूरेशिया, मध्य एशिया, आर्कटिक ध्रुव, रूस और उत्तरी चीन जैसे स्थानों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की विविध प्रजातियों का पर्यावास रहा है।
  • यहाँ पाई जाने वाली प्रमुख पक्षी प्रजातियों में इंडियन कौर्सर, इंडियन सैंडग्राउज़, येलो-वॉटल्ड लैपविंग और इंडियन रॉबिन शामिल हैं।

वर्ष 2020 में नए रामसर स्थल (New Ramsar Sites in 2020)

संदर्भ

वर्ष 2020 में पाँच स्थलों/साइटों को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि (Wetlands of International Importance under the Ramsar Convention) के रूप में मान्यता दी गई थी।

नए स्थल

  • आसन संरक्षण रिज़र्व (Asan Conservation Reserve)
    • आसन संरक्षण रिज़र्व देहरादून में उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर एक छोटे से शहर हर्बतपुर के पास स्थित एक मानव निर्मित आर्द्रभूमि है। 
  • काबरताल आर्द्रभूमि (Kabartal Wetland)
    • काबरताल आर्द्रभूमि बिहार की पहली आर्द्रभूमि है जिसे रामसर स्थल के रूप में चिह्नित किया गया है। इसे कांवर झील (Kanwar Jheel) के नाम से भी जाना जाता है, जो भारत की सबसे बड़ी मीठे जल की गोखुर झील (Ox Bow Lake) है जिसमें बूढ़ी गंडक नदी का बाढ़ का मैदान शामिल है। 
  • लोनार झील (Lonar Lake)
    • दक्कन के पठार की ज्वालामुखीय बेसाल्ट शैल में स्थित लोनार झील का निर्माण 35,000 से 50,000 वर्ष पूर्व एक उल्कापात के प्रभाव से हुआ था।
    • यह झील लोनार वन्यजीव अभयारण्य का अंग है जो मेलघाट टाइगर रिज़र्व (MTR) के एकीकृत नियंत्रण में है।
  • सूर सरोवर झील (Soor Sarovar Lake)
    • सूर सरोवर झील को कीठम झील (Keetham lake) के नाम से भी जाना जाता है  जो सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य (वर्ष 1991 में अधिसूचित) के अंदर स्थित है।
    • यह झील उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है।
  • त्सो कर आर्द्रभूमि (Tso Kar Wetland)
    • त्सो कर (Tso Kar) लद्दाख के चांगथांग (Changthang) क्षेत्र में समुद्र तल से 4,500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक उच्च तुंगता आर्द्रभूमि है।
    • यह एक अनूठा स्थल है जहाँ विपरीत रासायनिक संरचना वाली दो झीलें—मीठे जल की स्टार्ट्सपुक त्सो (Startsapuk Tso) और वृहत उच्च लवणीय त्सो कर (Tso Kar) आसपास स्थित हैं।
    • त्सो कर का अर्थ है सफ़ेद झील (white lake)। अत्यधिक खारे पानी के वाष्पीकरण से किनारे पर जमने वाली सफ़ेद नमक की पपड़ी के कारण इसे यह नाम मिला है।

वर्ष 2021 में नए रामसर स्थल (New Ramsar Sites in 2021)

संदर्भ

अगस्त 2021 में चार अन्य भारतीय स्थलों (हरियाणा और गुजरात दोनों से दो-दो स्थल) को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि (Wetlands of International Importance under the Ramsar Convention) के रूप में मान्यता दी गई है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 46 हो गई है।

नए स्थल

  • भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य (Bhindawas Wildlife Sanctuary)
    • झज्जर में स्थित भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य मानव निर्मित मीठे जल की आर्द्रभूमि है। यह हरियाणा की सबसे बड़ी आर्द्रभूमि है। 250 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पूरे वर्ष इस अभयारण्य का उपयोग विश्राम स्थल के रूप में करती हैं।
  • सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान
    • यह हरियाणा राज्य के दो राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। हरियाणा में स्थित दूसरा राष्ट्रीय उद्यान कालेसर राष्ट्रीय उद्यान है।
  • थोल झील वन्यजीव अभयारण्य (Thol Lake Wildlife Sanctuary)
    • गुजरात के सबसे लोकप्रिय पक्षी स्थलों (birding hotspots) में से एक थोल झील वन्यजीव अभयारण्य अहमदाबाद के निकट स्थित है।
  • वधवाना आर्द्रभूमि (Wadhvana Wetland)
    • वडोदरा (गुजरात) में स्थित वधवाना आर्द्रभूमि वेटलैंड अपने पक्षी आश्रय स्थल के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह सेंट्रल एशियन फ्लाईवे से होकर प्रवास को जाती 80 से अधिक पक्षी प्रजातियों को शीतकालीन प्रवास आश्रय प्रदान करती है।  

 नोंगखिल्लेम वन्यजीव अभयारण्य (Nongkhyllem Wildlife Sanctuary)

संदर्भ

भारत के पहले बाँस के वृक्षों पर रहने वाले चमगादड़ (Bamboo-Dwelling Bat- Eudiscopus Denticulus), जिनके पंजों के आंतरिक हिस्से चिपचिपे (Sticky Discs) होते हैं, नोंगखिल्लेम वन्यजीव अभयारण्य में पाए गए हैं।

प्रमुख बिंदु

  • मेघालय के री भोई ज़िले में अवस्थित यह अभयारण्य पूर्वोत्तर भारत के सर्वोत्कृष्ट संरक्षित क्षेत्रों में से एक है। यह पूर्वी हिमालयी जैव विविधता हॉटस्पॉट (Eastern Himalayan Biodiversity Hotspot) के अंतर्गत आता है। 
  • यह उमरान, उम्मिंग, उमपुरथिह और उमरू जैसी नदियों और जलधाराओं से प्रवाहित है। अभयारण्य के दक्षिणी भाग में बीरबाह (Birbah) नाम की एक प्राकृतिक झील भी मौजूद है।
  • यह अभयारण्य रॉयल बंगाल टाइगर, क्लाउडेड लेपर्ड, इंडियन बाइसन और हिमालयन ब्लैक बियर जैसी विभिन्न जंतु प्रजातियों को आश्रय और पोषण प्रदान करता है।
  • यहाँ मणिपुर बुश क्वेल, रूफस नेक्ड हॉर्नबिल और ब्राउन हॉर्नबिल जैसी दुर्लभ पक्षी प्रजातिययाँ भी पाई जाती हैं।
  • मेघालय के अन्य संरक्षित क्षेत्रों में सिजू वन्यजीव अभयारण्य (Siju Wildlife Sanctuary), नरपुह वन्यजीव अभयारण्य (Narpuh Wildlife Sanctuary), बाघमारा पिचर प्लांट अभयारण्य (Baghmara Pitcher Plant Sanctuary) और नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान (Nokrek National Park) शामिल हैं।

पैंगोंग त्सो 

संदर्भ 

लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच आमने-सामने होने की साक्षी रही।

पैंगोंग त्सो  के बारे में 

  • लगभग 4,350 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पैंगोंग झील विश्व  की सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित खारे पानी की झील है।
  • ग्रीष्म ऋतु के दौरान बार-सिर वाले हंस  (Bar-Headed Goose) और ब्राह्मणी बतख (Brahmini Ducks) आमतौर पर यहाँ देखे जाते हैं।
  • झील के आसपास के क्षेत्र में किआंग और मर्मोट सहित वन्यजीवों की कई प्रजातियाँ पाई जाती है।
  • झील में बड़ी मात्रा में मछलियाँ हैं, विशेष रूप से शिज़ोपाइगोप्सिस स्टोलिज़्का (Schizopygopsis stoliczka) और राकोमा लेबियाटा (Racoma labiata)।
  • लगभग 160 किमी. तक फैली पैंगोंग त्सो झील का एक तिहाई हिस्सा भारत में और अन्य दो-तिहाई चीन में स्थित है।
  • झील की यात्रा करने के लिये एक इनर लाइन परमिट की आवश्यकता होती है क्योंकि यह चीन-भारतीय वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित है।

पन्ना टाइगर रिज़र्व

संदर्भ

पन्ना टाइगर रिज़र्व को मैन एंड बायोस्फीयर (MAB) कार्यक्रम के तहत विश्व नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिज़र्व (डब्ल्यूएनबीआर) में शामिल किया गया है। एमएबी कार्यक्रम में भारत के  सूचीबद्ध 18  बायोस्फीयर रिज़र्व में से 12 बायोस्फीयर रिज़र्व शामिल हैं।

पन्ना टाइगर रिज़र्व के बारे में

  • पन्ना टाइगर रिज़र्व विंध्य में दक्कन प्रायद्वीप, ऊपरी गंगा के मैदान और अर्द्ध-शुष्क गुजरात राजपुताना के संगम के निकट स्थित है, जो तीन जैव-भौगोलिक क्षेत्रों के प्रभाव को दर्शाता है।
  • वर्ष 1981में पन्ना राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया था और वर्ष 1994 में इसे टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया था। वर्ष 2011 में, पन्ना को केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा बायोस्फीयर रिज़र्व के रूप में नामित किया गया था।
  • पचमढ़ी और अमरकंटक के बाद, यह विश्व नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिज़र्व में शामिल होने वाला भारत का 12 वां बायोस्फीयर रिज़र्व है, और मध्य प्रदेश से तीसरा है।
  • केन नदी रिज़र्व के माध्यम से दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है।
  • जीव: बाघ के अलावा यह तेंदुए, नीलगाय, चिंकारा, चौसिंघा, चीतल, चित्तीदार बिल्ली, साही और सांभर जैसे अन्य जानवरों का निवास स्थल है। घड़ियाल (लंबे थूथन वाले मगरमच्छ) और मुग्गर (दलदली मगरमच्छ) केन नदी में पाए जा सकते हैं।

पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य 

संदर्भ 

हाल के अनुमानों के अनुसार, पोबितोरा ने अपनी वहनीय करने की क्षमता को पार कर लिया है जिसके चलते गैंडों को असम के अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की आवश्यकता हो सकती है।

पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य  के बारे में 

  • पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य असम के मोरीगांव ज़िले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। गरंगा बील पोबित्रा के दक्षिण में स्थित है।
  • यह अपनी घासों के लिये प्रसिद्ध है जिसमें सिनोडोन डैक्टिलॉन, व्हिप ग्रास (Hemarthria Compressa), वेटिवर (Chrysopogon zizanioides), रेवेना घास (Saccharum Ravennae), फ्राग्माइट्स कारका आदि शामिल हैं।
  • पोबितोरा डब्ल्यूएलएस (Pobitora WLS) को वनस्पतियों और जीवों के साथ-साथ कुछ भौगोलिक विशेषताओं के समान सुविधाओं के लिये 'मिनी काजीरंगा' (Mini Kaziranga) भी कहा जाता है।

सरिस्का टाइगर रिज़र्व

संदर्भ 

नए शावक के जन्म के साथ ही सरिस्का में बाघों की संख्या 21 हो गई है।

सरिस्का टाइगर रिज़र्व के बारे में 

  • यह राजस्थान के अलवर ज़िले में एक बाघ अभ्यारण्य है जिसमें झाड़ीदार कांटेदार जंगल, शुष्क पर्णपाती वन, घास के मैदान और चट्टानी पहाड़ियाँ शामिल हैं।
  • इसे 1978 में भारत के प्रोजेक्ट टाइगर का हिस्सा बनाते हुए टाइगर रिज़र्व का दर्जा दिया गया था।
  • यह उत्तरी अरावली में तेंदुए और वन्यजीव गलियारे में एक महत्त्वपूर्ण  जैव विविधता क्षेत्र है।
  • जीव: बंगाल टाइगर के अलावा, रिज़र्व में भारतीय तेंदुआ, जंगली बिल्ली, काराकल, धारीदार लकड़बग्घा, सुनहरा सियार, चीतल, सांभर हिरण, छोटा भारतीय सिवेट, जावन नेवला, सुर्ख नेवला, रीसस मकाक सहित कई वन्यजीव प्रजातियाँ शामिल हैं। उत्तरी मैदान के ग्रे लंगूर और भारतीय खरगोश पाए जाते हैं 
  • वनस्पति: जंगलों में प्रमुख वृक्ष ढोक (Anogeissus pendula) है। अन्य पेड़ों में सालार (Boswellia serrata), कदया (Sterculia urens), ढाक (Butea monosperma), गोल (Lannea coromandelica), बेर (Ziziphus mauritiana), और खैर (Acacia catechu)  शामिल हैं।

सतकोसिया बाघ अभयारण्य

संदर्भ 

हाल ही में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने ओडिशा को सतकोसिया बाघ अभयारण्य पर पर्यटन के प्रतिकूल प्रभाव पर एक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये कहा है।

सतकोसिया बाघ अभयारण्य के बारे में :

  • सतकोसिया बाघ अभयारण्य को वर्ष 2007 में नामित किया गया था और इसमें सतकोसिया गॉर्ज वन्यजीव अभयारण्य और निकटवर्ती बैसिपल्ली वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
  • यह वह स्थान है जहांँ महानदी नदी पूर्वी घाट में 22 किमी. लंबी घाटी से होकर गुजरती है।
  • टाइगर रिज़र्व पूर्वी हाइलैंड्स नम पर्णपाती वन ईकोरियोजन में स्थित है।
  • जीव: तेंदुआ, भारतीय जंगली कुत्ता या ढोल, जंगली सूअर, धारीदार लकड़बग्घा, सुस्त भालू, तेंदुआ बिल्ली, चित्तीदार हिरण, सांभर हिरण, भौंकने वाले हिरण, लंगूर, साही और पैंगोलिन। यहाँ के सरीसृपों में मगर मगरमच्छ और घड़ियाल शामिल हैं।
  • वनस्पति: प्रमुख पादप समुदाय साल (शोरिया रोबस्टा) और नदी के किनारे स्थित जंगल सहित मिश्रित पर्णपाती वन हैं।

शत्रुंजय हिल्स रिज़र्व फॉरेस्ट

संदर्भ

गुजरात के शेत्रंजय हिल्स रिज़र्व फॉरेस्ट एरिया में आग लग गई।

शत्रुंजय हिल्स रिज़र्व फॉरेस्ट के बारे में 

  • शत्रुंजय रिज़र्व फॉरेस्ट, पहाड़ी, शुष्क और पर्णपाती जंगल का एक हिस्सा है। यह एशियाई शेरों और तेंदुओं के साथ-साथ नीले बैल जैसे शाकाहारी जीवों का घर है।
  • पहाड़ियाँ शेत्रुंजी नदी के तट पर स्थित हैं और जैनियों द्वारा पवित्र पहाड़ी मानी जाती हैं।
  • पहाड़ियाँ दक्षिण में खंभात की खाड़ी और उत्तर में भावनगर शहर से घिरी हुई हैं।
  • जब ऋषभनाथ ने पहाड़ी के ऊपर अपना पहला उपदेश दिया तबइन पहाड़ियों को पवित्र किया गया था  था। ऋषभनाथ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे।

सिमिलिपाल बायोस्फीयर रिज़र्व

संदर्भ 

सिमिलिपाल बायोस्फीयर रिज़र्व में जंगल का एक बड़ा हिस्सा हाल ही में आग की चपेट में आ गया था।

सिमिलिपाल बायोस्फीयर रिज़र्व  के बारे में 

  • सिमिलिपाल बायोस्फीयर रिज़र्व दो जैव-भौगोलिक क्षेत्रों के भीतर स्थित है- ओरिएंटल क्षेत्र के महानदियन पूर्वी तटीय क्षेत्र और दक्कन प्रायद्वीपीय क्षेत्र के छोटानागपुर जैविक प्रांत।
  • यह ऊँचें पठारों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, इसमें सबसे ऊंँची चोटी खैरीबुरु और मेघाशिनी (समुद्र तल से 1515 मीटर ऊपर) की जुड़वाँ चोटियांँ हैं। बुद्धबलंग, बैतरणी और सुवर्णरेखा जैसी प्रमुख नदियों में कई झरने और बारहमासी धाराएँ बहती हैं।
  • इसे औपचारिक रूप से वर्ष 1956 में टाइगर रिज़र्व नामित किया गया था और वर्ष 1973 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत लाया गया था।
  • इसे जून 1994 में भारत सरकार द्वारा बायोस्फीयर रिज़र्व घोषित किया गया था।
  • यह वर्ष 2009 से यूनेस्को के विश्व नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा रहा है।
  • यह सिमिलिपाल-कुलडीहा-हदगढ़ हाथी रिज़र्व का हिस्सा है, जिसे मयूरभंज हाथी रिज़र्व के नाम से जाना जाता है, जिसमें 3 संरक्षित क्षेत्र सिमिलिपाल टाइगर रिज़र्व, हाडागढ़ वन्यजीव अभयारण्य और कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
  • दो जनजातियाँ, एरेंगा खारिया और मनकीर्डिया, रिज़र्व के जंगलों में निवास करती हैं और पारंपरिक कृषि गतिविधियों (बीज और लकड़ी का संग्रह) में संलग्न हैं।

श्रीविल्लीपुथुर-मेगामलाई टाइगर रिज़र्व

संदर्भ 

हाल ही में तमिलनाडु में श्रीविल्लीपुथुर-मेगामलाई टाइगर रिज़र्व को मंजूरी दी गई है। यह टाइगर रिज़र्व तमिलनाडु का पाँचवाँ और भारत का 51वाँ टाइगर रिज़र्व है।

श्रीविल्लीपुथुर-मेगामलाई टाइगर रिज़र्व के बारे में 

  • टाइगर रिज़र्व बनाने हेतु श्रीविल्लीपुथुर ग्रिजल्ड जायंट स्क्विरेल सैंक्चुअरी और मेगामलाई वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में 1,01,657.13 हेक्टेयर या 1016.5713 किमी. के क्षेत्र को मिलाकर टाइगर रिज़र्व बनाया गया है।
  • मेघमलाई वन्यजीव अभयारण्य थेनी और मदुरै (हाईवेव्स पर्वत और इलायची पहाड़ियों) के ज़िलों में फैला हुआ है, जबकि श्रीविल्लिपुथुर ग्रिजल्ड गिलहरी वन्यजीव अभयारण्य केरल के पेरियार टाइगर रिज़र्व के साथ स्थित है।
  • जीव:
    • इसमें मेघमलाई अनगुलेट्स (खुर वाले स्तनपायी), चित्तीदार हिरण, भारतीय गौर, जंगली सूअर आदि पाए जाते हैं।
    • श्रीविल्लिपुथुर में घड़ियाल विशाल गिलहरियों, उड़ने वाली गिलहरियों, तेंदुओं, नीलगिरि तहरों, सांभर, हाथी, सिंह-पूंछ वाले मकाक आदि पाए जाते हैं।
  • तमिलनाडु में अन्य टाइगर रिज़र्व कलक्कड़ मुंडनथुराई, अनामलाई, मुदुमलाई और सत्यमंगलम हैं। 

तिलारी संरक्षण रिज़र्व

संदर्भ

महाराष्ट्र वन विभाग ने सिंधुदुर्ग ज़िले में स्थित डोडामर्ग वन क्षेत्र के लगभग 29.53 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को 'तिलारी संरक्षण रिज़र्व' (Tillari Conservation Reserve) घोषित किया है।

तिलारी संरक्षण रिज़र्व के बारे में

  • यह 38 किलोमीटर लंबा डोडामार्ग वन्यजीव गलियारा (पहले) है जो महाराष्ट्र में राधानगरी वन्यजीव अभयारण्य को कर्नाटक के भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य से जोड़ता है इसमें अक्सर हाथी और बाघ की आवाजाही को देखा जाता  है।
  • तिलारी रिज़र्व में अर्द्ध-सदाबहार वन, उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
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