रैपिड फायर
मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर भारत-इज़रायल संयुक्त मंत्रिस्तरीय घोषणा
- 16 Jan 2026
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द्वितीय वैश्विक शिखर सम्मेलन "ब्लू फूड सिक्योरिटी: सी द फ्यूचर 2026" में, भारत और इज़रायल ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में सहयोग को गहन करने हेतु एक संयुक्त मंत्रिस्तरीय आशय घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किये।
- मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर घोषणा: यह मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को गहन करने के लिये एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करती है।
- इस घोषणा-पत्र में उत्पादकता और दृढ़ता बढ़ाने के लिये रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक, केज कल्चर, एक्वापोनिक्स, मैरीकल्चर और समुद्री शैवाल कृषि जैसी उन्नत एक्वाकल्चर प्रणालियाँ, साथ ही आनुवंशिक सुधार, ब्रूडस्टॉक विकास और रोगमुक्त बीज उत्पादन में संयुक्त अनुसंधान एवं नवाचार को प्राथमिकता दी गई है।
- इसमें सतत मत्स्य पालन, क्षमता निर्माण, व्यापार सुविधा और भारत-इज़रायल उत्कृष्टता केंद्रों के सृजन पर बल दिया गया है, जिससे दोनों देशों की ब्लू इकॉनमी एवं खाद्य सुरक्षा मज़बूत होगी।
- मत्स्य पालन और जलीय कृषि: भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है, जो वैश्विक मत्स्य उत्पादन में लगभग 8% का योगदान देता है।
- मुख्य रूप से अंतर्देशीय मत्स्यन और जलीय कृषि के कारण मत्स्य उत्पादन वर्ष 2013-14 में 95.79 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 184.02 लाख टन हो गया, जो लगभग दोगुने आँकड़े को दर्शाता है।
- नीली क्रांति (वर्ष 2015-16) ने क्षेत्रीय विकास की नींव रखी, जबकि वर्ष 2020 में आरंभ हुई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का उद्देश्य मूल्य शृंखला में सुधार, उत्पादन में वृद्धि और मछुआरों व मत्स्य कृषकों की सामाजिक-आर्थिक कल्याण में सुधार करना है।
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