रैपिड फायर
भारत की विनिमय दर प्रणाली क्रॉल-जैसी व्यवस्था के रूप में वर्गीकृत
- 28 Nov 2025
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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की वास्तविक (de facto) विनिमय दर प्रणाली को ‘स्थिर (stabilised)’ प्रणाली से बदलकर ‘क्रॉल-जैसी व्यवस्था (crawl-like arrangement)’ के रूप में पुनः वर्गीकृत किया है।
- क्रॉल-जैसी व्यवस्था का अर्थ है कि विनिमय दर कम-से-कम छह महीनों तक किसी निर्धारित प्रवृत्ति (ट्रेंड) के आसपास लगभग 2% के दायरे में बनी रहती है। जिसका अर्थ है कि यह पूरी तरह से अस्थिर नहीं है।
- एक प्रबंधित तिरती (मैनेज्ड फ्लोटिंग) विनिमय दर बाज़ार की शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है तथा इसमें स्वतंत्र रूप से उतार-चढ़ाव होता रहता है, जबकि एक स्थिर विनिमय दर सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित और अनुरक्षित की जाती है।
- भारत वर्तमान में प्रबंधित तिरती विनिमय दर प्रणाली का उपयोग करता है, जहाँ RBI बाज़ार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करने के लिये हस्तक्षेप करता है, जबकि बाज़ार को सामान्य प्रवृत्ति निर्धारित करने की अनुमति प्रदान करता है।
- एक प्रबंधित तिरती (मैनेज्ड फ्लोटिंग) विनिमय दर बाज़ार की शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है तथा इसमें स्वतंत्र रूप से उतार-चढ़ाव होता रहता है, जबकि एक स्थिर विनिमय दर सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित और अनुरक्षित की जाती है।
- यह वर्गीकरण IMF के समझौता अनुच्छेदों और विनिमय व्यवस्थाओं के अनुच्छेद IV निगरानी पर आधारित है, जो मुद्रा की वास्तविक गति और एक विशिष्ट विनिमय दर पथ के प्रति नीति प्रतिबद्धता का आकलन करता है।
- क्रॉल जैसी व्यवस्था IMF के ‘क्रॉलिंग पेग’ से थोड़ी भिन्न होती है। जबकि क्रॉलिंग पेग में परिभाषित संकेतकों (जैसे मुद्रास्फीति अंतर) के आधार पर छोटे, पूर्व-घोषित समायोजन शामिल होते हैं, क्रॉल जैसी व्यवस्था को IMF द्वारा विनिमय दर के वास्तविक व्यवहार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, भले ही कोई औपचारिक क्रॉलिंग नीति घोषित न की गई हो।
- IMF के समझौता अनुच्छेद: वर्ष 1944 में संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन में अपनाए गए, ये संगठन के संस्थापक चार्टर के रूप में कार्य करते हैं तथा भारत सहित 190 सदस्य देशों द्वारा इनका अनुसमर्थन किया गया है।
- वे IMF के उद्देश्य, शासन संरचना, सदस्य दायित्वों और संचालन के नियमों को परिभाषित करते हैं, जिनमें विशेष आहरण अधिकार भी शामिल हैं।
- इन अनुच्छेदों में IMF के प्रमुख कार्यों जैसे वैश्विक मौद्रिक निगरानी, ज़रूरतमंद देशों को ऋण देना और तकनीकी सहायता प्रदान करना आदि का प्रावधान है।
